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भारत से सर्जिकल स्ट्राइक का गुरुमंत्र लेगी रूस की सेना
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बबीना फायर रेंज
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झांसी। भारत और रूस की सेनाएं भारत में संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘इंद्र 2019’ करेंगी। दस से 19 दिसंबर तक चलने वाले इस युद्ध अभ्यास में रूस की सेना खास तौर पर भारतीय सेना से सर्जिकल स्ट्राइक का ‘गुरुमंत्र’ लेगी। दो बार पाकिस्तान की सीमा में घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकियों के कैंपों का सफाया करने वाली भारतीय सेना का लोहा विश्व की सभी सेनाएं मान रही हैं। रूस की सेना भी इसमें खुद को दक्ष बनाना चाहती है।
दोनाें देशों की थल सेना, वायु सेना और नौ सेना की टुकड़ियां झांसी के बबीना, महाराष्ट्र के पुणे और गोवा में अपने-अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगी। इस दौरान आधुनिक अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन, उनकी मारक क्षमता, युद्ध रणनीति और सामंजस्य को परखा और बढ़ाया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र की पहल पर यह दस दिवसीय युद्धाभ्यास भारत में किया जा रहा है। भारत-रूस के बीच ‘इंद्र’ की शुरुआत 2003 में हुई थी। पहला संयुक्त युद्धाभ्यास 2017 में हुआ था। दस दिन के इस अभ्यास में मैकेनाइज्ड कनटिंजेंट, फाइटर-ट्रांस्पोर्ट एयरक्राफ्ट और पानी के जहाज अपनी कुशलता दिखाएंगे। इस दौरान पांच दिनों का विशेष प्रशिक्षण सत्र रहेगा।
रणनीति के तहत आतंकियों को खोजने, उन पर सर्जिकल स्ट्राइक करने, आईईडी (इम्प्रूवाइज एक्सप्लोसिव डिवाइस) को निष्क्रिय करने, समुद्र के रास्ते होने वाली हथियारों की तस्करी रोकने पर दोनों देशों की सेनाएं साझा तैयारी करेंगी। बबीना में थल सेना के युद्धाभ्यास की औपचारिक शुरुआत 11 दिसंबर को होगी। अंतिम दिन दोनों देशों के तोप और टैंक की मारक क्षमताओं का भी प्रदर्शन होगा।
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दोनाें देशों की थल सेना, वायु सेना और नौ सेना की टुकड़ियां झांसी के बबीना, महाराष्ट्र के पुणे और गोवा में अपने-अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगी। इस दौरान आधुनिक अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन, उनकी मारक क्षमता, युद्ध रणनीति और सामंजस्य को परखा और बढ़ाया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र की पहल पर यह दस दिवसीय युद्धाभ्यास भारत में किया जा रहा है। भारत-रूस के बीच ‘इंद्र’ की शुरुआत 2003 में हुई थी। पहला संयुक्त युद्धाभ्यास 2017 में हुआ था। दस दिन के इस अभ्यास में मैकेनाइज्ड कनटिंजेंट, फाइटर-ट्रांस्पोर्ट एयरक्राफ्ट और पानी के जहाज अपनी कुशलता दिखाएंगे। इस दौरान पांच दिनों का विशेष प्रशिक्षण सत्र रहेगा।
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रणनीति के तहत आतंकियों को खोजने, उन पर सर्जिकल स्ट्राइक करने, आईईडी (इम्प्रूवाइज एक्सप्लोसिव डिवाइस) को निष्क्रिय करने, समुद्र के रास्ते होने वाली हथियारों की तस्करी रोकने पर दोनों देशों की सेनाएं साझा तैयारी करेंगी। बबीना में थल सेना के युद्धाभ्यास की औपचारिक शुरुआत 11 दिसंबर को होगी। अंतिम दिन दोनों देशों के तोप और टैंक की मारक क्षमताओं का भी प्रदर्शन होगा।
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