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जिस बेटी को पैदा होते ही छोड़ दिया था, आज वो इटली में बड़ी वकील है और झांसी में मां-बाप को ढूंढ रही है

Thu, 02 Jul 2020 03:15 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Thu, 02 Jul 2020 03:15 AM IST
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गोद लेने वाली मां के साथ नन्हीं वेरा बेरती - फोटो : अमर उजाला

वीरांगना की भूमि झांसी में चार दशक पहले एक बेटी का जन्म हुआ था और जन्म के एक साल बाद ही जन्मभूमि छूट गई थी। जी हां, ये दास्तां एक ऐसी बेटी की, जो लावारिस अवस्था में अनाथालय में छोड़ दी गई थी और यहां से उसे इटली के एक दंपती ने गोद ले लिया था और वे अपने साथ ले गए थे। आज यही बेटी सिविल लॉयर बनकर इटली में ऊंचे मुकाम पर है। जबकि, उसके पति स्विट्जरलैंड में रहते हैं। चार दशक बाद झांसी की इस बेटी ने अपने खून के रिश्तेदारों की सरगर्मी से तलाश शुरू की है। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है। लोगों से मदद की गुहार लगाई है। भरोसा भी खूब मिल रहा है, अब देखना ये है कि इस बेटी की तलाश पूरी हो पाती है या नहीं।

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सोशल मीडिया पर डाली पोस्ट के माध्यम से वेरा बेरती नाम की महिला ने बताया कि 1980 में 22 जून को उसका जन्म हुआ था। जन्म के तुरंत बाद कोई अंजान व्यक्ति उसे सेंट ज्यूड फाउंडलिंग होम छोड़ गया था। 1981 में उसे गोद ले लिया गया था और तब से वो इटली में ही है। इसके 35 साल बाद 2015 में वो झांसी आई थी। इस यात्रा का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ मां-बाप या अन्य परिजनों की तलाश था। काफी खोजबीन के बाद कोई जानकारी नहीं हुई। आखिरकार थक हारकर वापस इटली लौट गई।
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लेकिन, परिजनों की तलाश की हूक कम नहीं हुई। यही वजह है कि इटली में रह रही झांसी की इस बेटी ने सोशल मीडिया के जरिए एक बार फिर अपने परिजनों की तलाश शुरू कर दी है। उसने अपना पुराना पासपोर्ट भी सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसमें लगी फोटो में वो लगभग एक साल की नन्हीं बच्ची नजर आ रही है। सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के जारी होने के बाद से तमाम लोग सक्रिय हो गए हैं। लोगों की ओर से झांसी की इस बेटी को उसके माता-पिता की तलाश में मदद करने का भरोसा जताया जा रहा है। साथ ही, इस पोस्ट को लोग एक दूसरे से खूब साझा कर रहे हैं। झांसी की इस बेटी की कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है है।
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बेटी के नाम में जोड़ा इंडिया
वेरा बेरती का जन्म ही भारत में हुआ था, जबकि उसकी पूरी परवरिश इटली में हुई। बावजूद, उसके दिल में भारत के प्रति अटूट प्यार बसता है। वेरा बेरती की दस साल की बेटी है, उसने अपनी बेटी का नाम सोफिया इंडिया रखा है। सोफिया ने बताया कि वो भारत से अटूट प्यार करती है। यही वजह है कि उसने अपनी बेटी के नाम के साथ इंडिया जोड़ा।

दो साल में चार बच्चे गए विदेश
महानगर के खातीबाबा क्षेत्र में 1956 से शिशु विहार फाउंडलिंग होम का संचालन किया जा रहा है। यहां लावारिस पाए जाने वाले बच्चों का पालन पोषण किया जाता है। वर्तमान में यहां पचास बच्चे रह रहे हैं। पिछले दो साल के दरम्यान यहां से चार बच्चों को विदेशियों ने गोद लिया। इन चार बच्चों में तीन बेटियां व एक बेटा शामिल है। ये सभी बच्चे कारा (सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी) के माध्यम से दिए गए।

परखी जाती है हैसियत
बच्चे को गोद देने से पहले लेने वाले की हैसियत परखी जाती है। खासतौर पर ये जांचा जाता है कि परिवार बच्चे की बेहतर परवरिश करने में सक्षम है या नहीं। इसके बाद भी लगातार फॉलोअप किया जाता है। देखा जाता है कि बच्चे की पालन - पोषण सही ढंग से हो रहा है या नहीं।


बच्चों के संपर्क में रहता है फाउंडलिंग होम
फाउंडलिंग होम की सिस्टर मोली जेकब ने बताया कि फाउंडलिंग होम के तमाम बच्चे देश के विभिन्न हिस्सों व विदेशों में हैं। कई बच्चे अब भी लगातार संपर्क में रहते हैं। समय - समय पर वो फाउंडलिंग होम भी आते हैं। उन्होंने बताया कि फाउंडलिंग होम में आने वाले बच्चों को तत्काल किसी को गोद नहीं दिया जाता है। इंतजार किया जाता है कि शायद उसके परिजन आ जाएं, जब परिजनों के आने की उम्मीद खत्म हो जाती है तो फिर बच्चा गोद दे दिया जाता है।

वेरा बेरती अपने पति पीटर और बेटी सोफिया इंडिया के साथ

वेरा बेरती अपने पति पीटर और बेटी सोफिया इंडिया के साथ - फोटो : REPORTERS

 

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