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इनकम टैक्स भरने वाले हो रहे सम्मान निधि से बाहर
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झांसी। बड़ी संख्या में अपात्र लोग पीएम किसान सम्मान निधि गटक गए। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड एकाउंटेंट जैसे पेशेवर व्यवसाय में शामिल लोग भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में करीब 512 खाते ऐसे पाए गए जिनमें पिछले वित्तीय वर्ष में इनकम टैक्स भरा गया, फिर भी उन्होंने सम्मान निधि हड़प ली। जांच बढ़ने पर इस संख्या में इजाफा होने की बात कही जा रही।
किसानों की आय दोगुनी करने की स्कीम के तहत केंद्र सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि आरंभ की। प्रत्येक माह पांच सौ रुपये के लिहाज से सलाना छह हजार रुपये दिए जाते हैं। शुरुआत में सीमांत किसान को योजना का लाभ दिया जाना था लेकिन, बाद में इसमें समान्य किसानों को भी शामिल कर लिया गया। यहीं से गड़बड़ी आरंभ हो गई। लेखपालों से सूची मांगी गई, जिसमें सत्यापन के बजाए खतौनी के मुताबिक सभी किसानों की सूची भेज दी गई। इस सूची के मुताबिक सम्मान निधि का पैसा भेजा जाने लगा लेकिन, जब सत्यापन शुरू कराया गया तब इनकी पोल खुलनी शुरू हुई।
सत्यापन सूची के मुताबिक पहली सूची में डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड एकाउंटेंट तक शामिल थे। जिन अफसरों के नाम पुश्तैनी कृषि भूमि है, उनको भी सम्मान निधि मिल रही थी जबकि सरकार ने सम्मान निधि की पात्रता से इनको बाहर कर रखा था। शुरुआती पड़ताल में 512 खाते ऐसे पाए गए, जिनसे आयकर कटौती के दायरे में हैं। इसी तरह ललितपुर में 207 खाते ऐसे पाए गए। अधिकारियों का कहना है जांच आगे बढ़ने पर इसकी संख्या में भी बढ़ेगी। फिलहाल इन सभी खातों में सम्मान निधि की राशि पर रोक लगा दी गई है।
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सम्मान निधि लेने वालों से भरवाए जा रहे शपथ पत्र
किसान सम्मान निधि लेने वाले लाभार्थियों से शपथ पत्र भरवाए जा रहे। शपथ पत्र के मुताबिक लाभार्थी को यह बताना होगा कि परिवार में दो हेक्टेयर से अधिक जमीन, भूतपूर्व अथवा वर्तमान संवैधानिक पदधारक, परिवार में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार, अर्ध सरकारी संस्थान, नियमित कर्मचारी, परिवार में किसी के आयकर भुगतान, डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, चार्टर्ड एकाउंटेंट अथवा आर्कीटेक्ट पेशे में न होने का शपथ पत्र देना होगा। गलत सूचना देने वालों से वसूली भी की जाएगी।
ऐसे किसान जो पीएम किसान सम्मान निधि में पात्र नहीं हैं लेकिन, उनको योजना का लाभ मिल रहा। उनको सम्मान निधि वापस करनी होगी। समय पर वापस न करने वालों के खिलाफ राशि की वसूली करने के साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
केके सिंह
प्रभारी उपनिदेशक, कृषि
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किसानों की आय दोगुनी करने की स्कीम के तहत केंद्र सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि आरंभ की। प्रत्येक माह पांच सौ रुपये के लिहाज से सलाना छह हजार रुपये दिए जाते हैं। शुरुआत में सीमांत किसान को योजना का लाभ दिया जाना था लेकिन, बाद में इसमें समान्य किसानों को भी शामिल कर लिया गया। यहीं से गड़बड़ी आरंभ हो गई। लेखपालों से सूची मांगी गई, जिसमें सत्यापन के बजाए खतौनी के मुताबिक सभी किसानों की सूची भेज दी गई। इस सूची के मुताबिक सम्मान निधि का पैसा भेजा जाने लगा लेकिन, जब सत्यापन शुरू कराया गया तब इनकी पोल खुलनी शुरू हुई।
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सत्यापन सूची के मुताबिक पहली सूची में डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड एकाउंटेंट तक शामिल थे। जिन अफसरों के नाम पुश्तैनी कृषि भूमि है, उनको भी सम्मान निधि मिल रही थी जबकि सरकार ने सम्मान निधि की पात्रता से इनको बाहर कर रखा था। शुरुआती पड़ताल में 512 खाते ऐसे पाए गए, जिनसे आयकर कटौती के दायरे में हैं। इसी तरह ललितपुर में 207 खाते ऐसे पाए गए। अधिकारियों का कहना है जांच आगे बढ़ने पर इसकी संख्या में भी बढ़ेगी। फिलहाल इन सभी खातों में सम्मान निधि की राशि पर रोक लगा दी गई है।
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सम्मान निधि लेने वालों से भरवाए जा रहे शपथ पत्र
किसान सम्मान निधि लेने वाले लाभार्थियों से शपथ पत्र भरवाए जा रहे। शपथ पत्र के मुताबिक लाभार्थी को यह बताना होगा कि परिवार में दो हेक्टेयर से अधिक जमीन, भूतपूर्व अथवा वर्तमान संवैधानिक पदधारक, परिवार में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार, अर्ध सरकारी संस्थान, नियमित कर्मचारी, परिवार में किसी के आयकर भुगतान, डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, चार्टर्ड एकाउंटेंट अथवा आर्कीटेक्ट पेशे में न होने का शपथ पत्र देना होगा। गलत सूचना देने वालों से वसूली भी की जाएगी।
ऐसे किसान जो पीएम किसान सम्मान निधि में पात्र नहीं हैं लेकिन, उनको योजना का लाभ मिल रहा। उनको सम्मान निधि वापस करनी होगी। समय पर वापस न करने वालों के खिलाफ राशि की वसूली करने के साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
केके सिंह
प्रभारी उपनिदेशक, कृषि