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शहर क्षेत्र में आज भी खुले में शौच जाते हैं दस हजार परिवार
ब्यूरो
Updated Sun, 31 Jan 2016 12:44 AM IST
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झांसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत का सपना अभी हकीकत के धरातल पर उतरने से बहुत दूर है। जनपद की बात तो दूर, अकेले महानगर के दस हजार परिवारों के करीब पचास हजार लोग आज भी खुले में शौच जा रहे हैं।
इनमें अधिकांश वह लोग हैं, जो नये परिसीमन में शामिल हुए गांवों में रहते हैं। शासन द्वारा शौचालय के लिए बनाई गई नई योजना में बदलाव होने से आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
महानगर में करीब पौने दो लाख परिवारों में पांच लाख लोग निवास करते हैं। नगर पालिका से जब झांसी नगर निगम बना था तो इसमें सीमावर्ती 13 गांवों को शहर में शामिल किया गया था। नगर निगम बने एक दशक बीतने को है, लेकिन अभी तक इन गांवों के लोग सभी सुविधाओं से आच्छादित नहीं हो सके हैं। स्थिति यह है कि करीब दस हजार घरों में शौचालय तक नहीं है।
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गरीब वर्ग के लोगों को खुले में जाकर शौच निस्तारण करना पड़ रहा है। बारिश व सर्दी के मौसम में इन लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार भले ही खुले में शौच जाने की व्यवस्था बंद करने के लिए प्रतिबद्ध हो, लेकिन नियमों की जटिलता के कारण आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
नगर निगम द्वारा चलाई जा रही योजना के तहत घरों में शौचालय बनवाने के लिए लोगों से आवेदन मांगे गए थे, इसमें 15,250 लोगों ने आवेदन किया था। नगर निगम की कसौटी पर 7,175 लोग ही पास हो सके और इन्हें शौचालय निर्माण की योजना के लिए चुना गया। हालांकि, अभी तक इनके घरों में भी शौचालय नहीं बन सके हैं। आवेदन की अंतिम तिथि निकले दो माह से अधिक का समय हो गया है, लेकिन हर रोज कोई न कोई शौचालय के लिए आवेदन लेकर आ रहा है।
प्रक्रिया में यह हुआ बदलाव
पूर्व में नगरीय योजना के तहत शौचालय बनाने का काम जिला नगरीय विकास अभिकरण करता था। इसमें, चयनित लाभार्थियों के यहां टैंक बनाकर सीट फिट करने का काम ठेकेदार को दिया जाता था। इसमें लाभार्थी को कुल लागत का दशांश ही देना पड़ता था। चयन के लिए आवेदन के बाद कठिन प्रक्रिया नहीं थी। नये नियम जटिल होने के कारण लाभार्थियों का चयन नहीं हो पा रहा है।
आवेदन पत्रों की जांच का काम पार्षद, सेनेटरी निरीक्षक व सफाई हवलदार को दिया गया है। तीन में से एक के भी संतुष्ट न होने पर आवेदन रद्द कर दिया जाता है। पहले शौचालय निर्माण के लिए दस हजार रुपये दिए जाते थे, जिसे घटाकर अब आठ हजार रुपये कर दिया गया है। नगर निगम द्वारा चयनित 7175 लोगों में से अभी तक सौ लोग भी गड्ढे खोद कर पहली किस्त भी हासिल नहीं कर सके हैं।
नगर निगम द्वारा शौचालय निर्माण के लिए आवेदन मांगे गए थे। चयनित आवेदकों को खुद ही शौचालय बनवाना है।अभी इन परिवारों के लोग खुले में शौच जा रहे हैं, लेकिन शीघ्र ही हर घर में शौचालय बन जाएंगे।
- डॉ. राकेश बाबू गौतम, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
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इनमें अधिकांश वह लोग हैं, जो नये परिसीमन में शामिल हुए गांवों में रहते हैं। शासन द्वारा शौचालय के लिए बनाई गई नई योजना में बदलाव होने से आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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महानगर में करीब पौने दो लाख परिवारों में पांच लाख लोग निवास करते हैं। नगर पालिका से जब झांसी नगर निगम बना था तो इसमें सीमावर्ती 13 गांवों को शहर में शामिल किया गया था। नगर निगम बने एक दशक बीतने को है, लेकिन अभी तक इन गांवों के लोग सभी सुविधाओं से आच्छादित नहीं हो सके हैं। स्थिति यह है कि करीब दस हजार घरों में शौचालय तक नहीं है।
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गरीब वर्ग के लोगों को खुले में जाकर शौच निस्तारण करना पड़ रहा है। बारिश व सर्दी के मौसम में इन लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार भले ही खुले में शौच जाने की व्यवस्था बंद करने के लिए प्रतिबद्ध हो, लेकिन नियमों की जटिलता के कारण आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
नगर निगम द्वारा चलाई जा रही योजना के तहत घरों में शौचालय बनवाने के लिए लोगों से आवेदन मांगे गए थे, इसमें 15,250 लोगों ने आवेदन किया था। नगर निगम की कसौटी पर 7,175 लोग ही पास हो सके और इन्हें शौचालय निर्माण की योजना के लिए चुना गया। हालांकि, अभी तक इनके घरों में भी शौचालय नहीं बन सके हैं। आवेदन की अंतिम तिथि निकले दो माह से अधिक का समय हो गया है, लेकिन हर रोज कोई न कोई शौचालय के लिए आवेदन लेकर आ रहा है।
प्रक्रिया में यह हुआ बदलाव
पूर्व में नगरीय योजना के तहत शौचालय बनाने का काम जिला नगरीय विकास अभिकरण करता था। इसमें, चयनित लाभार्थियों के यहां टैंक बनाकर सीट फिट करने का काम ठेकेदार को दिया जाता था। इसमें लाभार्थी को कुल लागत का दशांश ही देना पड़ता था। चयन के लिए आवेदन के बाद कठिन प्रक्रिया नहीं थी। नये नियम जटिल होने के कारण लाभार्थियों का चयन नहीं हो पा रहा है।
आवेदन पत्रों की जांच का काम पार्षद, सेनेटरी निरीक्षक व सफाई हवलदार को दिया गया है। तीन में से एक के भी संतुष्ट न होने पर आवेदन रद्द कर दिया जाता है। पहले शौचालय निर्माण के लिए दस हजार रुपये दिए जाते थे, जिसे घटाकर अब आठ हजार रुपये कर दिया गया है। नगर निगम द्वारा चयनित 7175 लोगों में से अभी तक सौ लोग भी गड्ढे खोद कर पहली किस्त भी हासिल नहीं कर सके हैं।
नगर निगम द्वारा शौचालय निर्माण के लिए आवेदन मांगे गए थे। चयनित आवेदकों को खुद ही शौचालय बनवाना है।अभी इन परिवारों के लोग खुले में शौच जा रहे हैं, लेकिन शीघ्र ही हर घर में शौचालय बन जाएंगे।
- डॉ. राकेश बाबू गौतम, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम