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बच्चा हृदय, गुर्दा और सांस का गंभीर रोगी है तो जरूर लगवाएं इनफ्लुएंजा वैक्सीन

Sat, 26 Jun 2021 01:09 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jun 2021 01:09 AM IST
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If your heart child than necessary put vaccine
झांसी। फ्लू और कोरोना का संक्रमण एक जैसा होता है। पांच साल से कम उम्र के शिशुओं को फ्लू से निमोनिया होने की आशंका ज्यादा होती है। अगर शिशु पहले से ही हृदय, गुर्दा, खून की बीमारी या कुपोषण से पीड़ित है, तो उसमें यह बहुत घातक साबित हो जाता है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को इनफ्लुएंजा वैक्सीन यानी कि फ्लू का टीका जरूर लगवाएं। यह चार तरह के वायरस से बच्चों को बचाता है, जिसमें स्वाइन फ्लू भी शामिल है।
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इनफ्लुएंजा सांस का एक संक्रामक रोग है, जिसकी शुरूआत खांसी, जुकाम और हल्के बुखार के साथ होती है। इनफ्लुएंजा वायरस हमारे शरीर में नाक, हाथ और मुंह से प्रवेश कर सकता है। इस वायरस से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आता है तो संक्रमण फैल सकता है। इनफ्लुएंजा वैक्सीन छह महीने से लेकर पांच साल तक के बच्चों को लगाते हैं। दो डोज के बीच एक महीने का अंतराल रखते हैं। नौ साल से अधिक उम्र वाले बच्चों या अन्य सभी में एक ही डोज लगाई जाती है। जो व्यक्ति गंभीर हृदय, गुर्दे, श्वांस संबंधी रोगों से पीड़ित होते हैं, उन्हें हर साल फ्लू की वैक्सीन लगवानी चाहिए। हेल्थ केयर वर्कर, डॉक्टर, स्टाफ, लैब टेक्नीशियन आदि को यह वैक्सीन हर साल लगवानी चाहिए। बच्चों में श्वांस संबंधी रोगों से होने वाली हर साल मौतों में छह से सात प्रतिशत गंभीर इनफ्लुएंजा संक्रमण से होती हैं। ऐसे में डॉक्टर इसका टीका लगवाने की सलाह दे रहे हैं।
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दो प्रकार की होती वैक्सीन
देश में इनफ्लुएंजा वैक्सीन दो प्रकार की हैं इनफ्लुएंजा ए और बी। इनफ्लुएंजा वैक्सीन की कीमत लगभग डेढ़ हजार से 2000 के बीच है। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते डब्ल्यूएचओ ने शिशुओं को अनिवार्य रूप से फ्लू का टीका लगवाने की सलाह दी है। हालांकि, यह टीका कोरोना से नहीं बचाता है।
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ये हैं लक्षण
- थकान महसूस होती और शरीर अस्वस्थ रहता।
- कमजोरी से कुछ काम करने पर चक्कर आने लगते।
- तेज बुखार के साथ ठंड भी लगने लगती है।
- गले में कफ होने से खाने, पीने, निगलने में तकलीफ होती है।
- सांस की परेशानी भी हो सकती है।
ऐसे करें बचाव
- खूब पानी पीएं।
- साफ-सफाई रखें।
- बासा खाना न खाएं।
- फलों का जूस भी पीएं।
- प्रतिरोधक क्षमता कम करने वाला भोजन न करें।
- सांस लेने में तकलीफ होने पर डॉक्टर को दिखाएं।
फ्लू अथवा इनफ्लुएंजा टीका छह महीने के शिशु से बड़े बच्चों को लगाया जाता है। पहली बार टीका लगवाने पर एक महीने के अंतर से दोबारा टीका लगाया जाता है। इसके बाद हर साल एक बार। फ्लू वायरस बहुत ज्यादा बदलता है। इसलिए दो बार लगाना पड़ता है टीका। यह टीका स्वाइन फ्लू समेत चार प्रकार के वायरस से बच्चों को बचाता है। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।

छह महीने के बच्चे से 70 साल के बुजुर्ग को इनफ्लुएंजा वैक्सीन लगवा सकते हैं। चूंकि, कोरोना और फ्लू के लक्षण काफी मिलते जुलते हैं। ऐसे में दोनों बीमारियों में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। अगर फ्लू का टीका लगा होगा तो ये तय हो जाएगा कि मरीज को ये बीमारी नहीं है। बच्चों में वैक्सीन लगाने के दो माह बाद फ्लू से खतरा काफी कम हो जाता है। - डॉ. आराधना कनकने, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज।
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