{"_id":"62aa24993503790ac82fffb9","slug":"if-lalu-bakshi-had-not-been-targeted-the-picture-of-the-first-freedom-struggle-would-have-been-different-jhansi-news-jhs2228959161","type":"story","status":"publish","title_hn":"लालू बख्शी का निशाना न चूका होता तो प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की तस्वीर अलग होती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लालू बख्शी का निशाना न चूका होता तो प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की तस्वीर अलग होती
विज्ञापन
झांसी। जनरल ह्यूरोज एक ऐसा किरदार जिसने विश्व के कई युद्धों में ब्रिटिश सरकार की विजय का परचम फहराया। इसी सेनापति को ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की बागडोर सौंपी थी। झांसी की ओर जब वह पहली बार प्रवेश के लिए निकला तो, ललितपुर की मदनपुर घाटी में उसका महारानी के विश्वस्त सेनापति लालू बख्शी से कड़ा मुकाबला हुआ। बख्शी दो हजार सैनिक लेकर ह्यूरोज को रोकने के लिए मदनपुर घाटी पहुंचा था। जमकर युद्ध हुआ और लालू बख्शी की बंदूक से निकली एक गोली ह्यूरोज को घायल करते हुए उसके घोड़े को जा लगी, घोड़ा वहीं पर ढेर हो गया, अगर उस रोज लालू बख्शी का निशाना नहीं चूका होता तो 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की तस्वीर ही दूसरी होती। उधर, झांसी की सेना मदनपुर व नाराहट घाटी में दो जगह बंटकर उलझ गई और ह्यूरोज अपने मकसद में कामयाब होकर पहले ही मोर्चे पर झांसी की सीमा में घुस गया।
युद्ध के मैदान में ह्यूरोज के घोड़े से गिरते ही अंग्रेजी सेनी में मची खलबली
सागर निवासी इतिहासकार अजय दुबे बताते हैं कि सागर से तबाही मचाते हुए अंग्रेजी सेनापति ह्यूरोज भोपाल पहुंचा था। यहां की बेगम ने न केवल उसका स्वागत किया, बल्कि मदद का भरोसा भी दिया। यहां से ह्यूरोज झांसी की सीमा में प्रवेश करना चाहता था, इसकी भनक महारानी लक्ष्मीबाई को लगी तो उन्होंने इस बारे में बानपुर के महाराजा मर्दन सिंह को पत्र लिखा। मर्दन सिंह ने अपनी फौज लेकर नाराहट घाटी में डेरा डाल दिया। उधर, ह्यूरोज को व्यूह रचना भांपने में देर नहीं लगी, उसने सैनिकों की एक छोटी टुकड़ी नाराहट घाटी भेजकर बानपुर के राजा मर्दन सिंह को अटकाए रखा, जबकि वह स्वयं सेना लेकर मदनपुर घाटी से झांसी की तरफ रवाना हुआ, पर इस रास्ते में महारानी लक्ष्मीबाई का विश्वस्त सेनापति लालू बख्शी दो हजार सैनिकों के साथ पहले ही डेरा डाले हुए था। दोनों ओर से जमकर युद्ध हुआ, लालू बख्शी की एक गोली अंग्रेज सेनापति ह्यूरोज के हाथ की हथेली को चीरते हुए उसके घोड़े के पेट में जा धंसी, ह्यूरोज घोड़े से नीचे जा गिरा, ब्रिटिश सेना में कुछ देर के लिए अफरातफरी मच गई। सैनिक उसे शिविर में ले गए और उसका उपचार किया गया।
विज्ञापन
युद्ध के मैदान में ह्यूरोज के घोड़े से गिरते ही अंग्रेजी सेनी में मची खलबली
सागर निवासी इतिहासकार अजय दुबे बताते हैं कि सागर से तबाही मचाते हुए अंग्रेजी सेनापति ह्यूरोज भोपाल पहुंचा था। यहां की बेगम ने न केवल उसका स्वागत किया, बल्कि मदद का भरोसा भी दिया। यहां से ह्यूरोज झांसी की सीमा में प्रवेश करना चाहता था, इसकी भनक महारानी लक्ष्मीबाई को लगी तो उन्होंने इस बारे में बानपुर के महाराजा मर्दन सिंह को पत्र लिखा। मर्दन सिंह ने अपनी फौज लेकर नाराहट घाटी में डेरा डाल दिया। उधर, ह्यूरोज को व्यूह रचना भांपने में देर नहीं लगी, उसने सैनिकों की एक छोटी टुकड़ी नाराहट घाटी भेजकर बानपुर के राजा मर्दन सिंह को अटकाए रखा, जबकि वह स्वयं सेना लेकर मदनपुर घाटी से झांसी की तरफ रवाना हुआ, पर इस रास्ते में महारानी लक्ष्मीबाई का विश्वस्त सेनापति लालू बख्शी दो हजार सैनिकों के साथ पहले ही डेरा डाले हुए था। दोनों ओर से जमकर युद्ध हुआ, लालू बख्शी की एक गोली अंग्रेज सेनापति ह्यूरोज के हाथ की हथेली को चीरते हुए उसके घोड़े के पेट में जा धंसी, ह्यूरोज घोड़े से नीचे जा गिरा, ब्रिटिश सेना में कुछ देर के लिए अफरातफरी मच गई। सैनिक उसे शिविर में ले गए और उसका उपचार किया गया।
विज्ञापन