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Jhansi News: वन विभाग और सेना ने दे दी एनओसी तो पूरी हो जाएगी रिंग, बस 13 किमी का टुकड़ा शेष

Tue, 03 Dec 2024 02:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 03 Dec 2024 02:48 AM IST
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If forest department and army give NOC then the ring will be completed, only 13 km piece left

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। अगर सब कुछ तयशुदा योजना के मुताबिक रहा तब कुछ साल के भीतर झांसी की पहली रिंग रोड बनकर तैयार हो जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कवायद शुरू कर दी है। एनएचएआई अफसरों के मुताबिक झांसी में करीब 80 फीसदी रिंग रोड तैयार है। सिर्फ भगवंतपुरा से बिजौली के हिस्से को ही जोड़ा जाना है। एनएचएआई ने इसके लिए डीपीआर बनाने का काम शुरू किया है। अधिकारियों का कहना है इस राह की सबसे बड़ी अड़चन वन विभाग एवं सेना की एनओसी है। एनओसी मिलने पर यह काम आसानी से कराया जा सकेगा।



महानगर से ट्रैफिक का दबाव कम करने में रिंग रोड बेहद अहम हो जाती है। झांसी चारों ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग से घिरा है। इसके चलते यहां अलग से रिंग रोड बनाने की जरूरत नहीं है। भगवंतपुरा से बिजौली के अभी न जुड़ा होने से यह रिंग अधूरी है। इसे ही जोड़ने की जरूरत है। एनएचएआई अफसरों का कहना है कि इसके जुड़ने से झांसी-कानपुर हाईवे, झांसी-शिवपुरी हाईवे, झांसी-ग्वालियर हाईवे एवं झांसी-ललितपुर हाईवे आपस में जुड़ जाएंगे। इससे कानपुर, ललितपुर, शिवपुरी एवं ग्वालियर की ओर आने-जाने वाले वाहन बिना महानगर में आए बाहर से निकाले जा सकेंगे।
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वर्ष 2018 में कॉरिडोर के जरिये रिंग को पूरा करने की योजना बनी लेकिन, यहां वन, सेना एवं जंतु अभ्यारण के होने से एनओसी नहीं मिल सकी। इसके बाद यह मामला फाइलों में अटक गया। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से संकेत मिलने के बाद एनएचएआई महकमा फिर से हरकत में आया। छतरपुर डिविजन को यह काम सौंपा गया है। इसके लिए सर्वे शुरू हो गया है। परियोजना अधिकारी (छतरपुर) देवेंद्र चापेकर के मुताबिक करीब 13-15 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर से इसे जोड़ने का प्रस्ताव है, लेकिन अभी इसकी जगह तय नहीं है। डीपीआर बनाने का काम किया जा रहा है। डीपीआर बनाकर मंजूरी के लिए इसे भेजा जाएगा।
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रिंग रोड के यह भी फायदे



- रिंग रोड की मदद से यातायात सुगम होता है। रिंग रोड की मदद से शहर के भीतर आने-जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्ता भी मिलता है।

- रिंग रोड से यात्रा में समय कम लगता है। जगह-जगह ट्रैफिक जाम की समस्या भी खत्म होती है।



- रिंग रोड की बदौलत आसपास आवासीय एवं व्यावसायिक गतिविधियां तेज होती हैं।

इनसेट

रिंग रोड न होने से आठ किलोमीटर का काटना पड़ रहा चक्कर



रिंग रोड न होने से रोजाना हजारों भारी वाहनों को महानगर के बीचों-बीच होकर गुजरना पड़ता है। अगर कानपुर की ओर से आने वाले को ललितपुर जाना होता है, तब न सिर्फ 8-10 किलोमीटर चक्कर काटना पड़ता है बल्कि महानगर में बस अड्डा, कचहरी चौराहा, जेल चौराहा होते हुए जाना होता है। इस वजह से यहां अक्सर ही जाम की समस्या झेलनी पड़ती है।
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