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आइस कैंडी में मिला खतरनाक रंग....सेहत पर इसका असर जानकर रह जाएंगे दंग
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झांसी। अगर आपका बच्चा आइस कैंडी खाने का शौकीन है तो सावधान हो जाइये। झांसी में लोकल कंपनी की कैंडी मानकों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से बेची जा रही है। खाद्य विभाग द्वारा भेजे गए नमूने में चार गुना तक रंग मिला है, जो कि बच्चों का लिवर डैमेज करने से लेकर कैंसर तक का कारण बन सकता है।
खाद्य विभाग की ओर से नमूने एकत्र करके जांच के लिए गोरखपुर प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। हाल ही में 52 नमूनों की रिपोर्ट आई है, जिसमें 31 नमूने फेल मिले हैं। बच्चों द्वारा खूब खाई जाने वाली कैंडी का नमूना असुरक्षित पाया गया है। जिला अभिहित अधिकारी चितरंजन कुमार ने बताया कि कैंडी में फूड कलर 100 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) होना चाहिए। मगर जांच के दौरान 375 पीपीएम रंग मिला है। इसके अलावा 27 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इसमें दूध के 12 नमूनों में पानी मिला है। इनमें फैट कम था। वहीं, छह पनीर के नमूनों में 50 प्रतिशत की जगह 20 से 30 फीसदी और तीन खोआ के नमूनों में 30 प्रतिशत की जगह 18 से 20 फीसदी फैट मिला है। दो बर्फी में भी वसा कम मिला है। इसके अलावा मसाले के भी तीन नमूने फेल हो गए हैं। किसी में एसिड मात्रा कम है तो किसी में नमक ज्यादा। एक्सपायरी तिथि आदि न होने पर तीन नमूने मिथ्याछाप पाए गए हैं।
कैंडी में चार गुना तक रंग मिलना सेहत के लिए बहुत खतरनाक है। लंबे समय तक इसका सेवन करने से बच्चे का लिवर डैमेज हो सकता है। कैंसर तक हो सकता है। केमिकल हेपेटाइटिस का शिकार होने से बच्चे पीलिया और फ्लू का भी शिकार हो सकते हैं। - डॉ. पीके जैन, वरिष्ठ फिजीशियन।
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खाद्य विभाग द्वारा लगातार नमूने जांच के लिए लैब भेजे जा रहे हैं। नमूने हानिकारक मिलते हैं, तो कंपनी और विक्रेता के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर करते हैं। इस बार कैंडी का नमूना असुरक्षित मिला है। अब छापेमारी अभियान और तेज होगा। - हरिमोहन श्रीवास्तव, सहायक आयुक्त खाद्य।
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खाद्य विभाग की ओर से नमूने एकत्र करके जांच के लिए गोरखपुर प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। हाल ही में 52 नमूनों की रिपोर्ट आई है, जिसमें 31 नमूने फेल मिले हैं। बच्चों द्वारा खूब खाई जाने वाली कैंडी का नमूना असुरक्षित पाया गया है। जिला अभिहित अधिकारी चितरंजन कुमार ने बताया कि कैंडी में फूड कलर 100 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) होना चाहिए। मगर जांच के दौरान 375 पीपीएम रंग मिला है। इसके अलावा 27 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इसमें दूध के 12 नमूनों में पानी मिला है। इनमें फैट कम था। वहीं, छह पनीर के नमूनों में 50 प्रतिशत की जगह 20 से 30 फीसदी और तीन खोआ के नमूनों में 30 प्रतिशत की जगह 18 से 20 फीसदी फैट मिला है। दो बर्फी में भी वसा कम मिला है। इसके अलावा मसाले के भी तीन नमूने फेल हो गए हैं। किसी में एसिड मात्रा कम है तो किसी में नमक ज्यादा। एक्सपायरी तिथि आदि न होने पर तीन नमूने मिथ्याछाप पाए गए हैं।
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कैंडी में चार गुना तक रंग मिलना सेहत के लिए बहुत खतरनाक है। लंबे समय तक इसका सेवन करने से बच्चे का लिवर डैमेज हो सकता है। कैंसर तक हो सकता है। केमिकल हेपेटाइटिस का शिकार होने से बच्चे पीलिया और फ्लू का भी शिकार हो सकते हैं। - डॉ. पीके जैन, वरिष्ठ फिजीशियन।
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खाद्य विभाग द्वारा लगातार नमूने जांच के लिए लैब भेजे जा रहे हैं। नमूने हानिकारक मिलते हैं, तो कंपनी और विक्रेता के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर करते हैं। इस बार कैंडी का नमूना असुरक्षित मिला है। अब छापेमारी अभियान और तेज होगा। - हरिमोहन श्रीवास्तव, सहायक आयुक्त खाद्य।