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बच्चा कैसे बने मजबूत, जन्म के एक घंटे में कइयों को नहीं मिलता मां का दूध

Sun, 06 Feb 2022 01:34 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 06 Feb 2022 01:34 AM IST
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How the child became strong, many do not get mother's milk in an hour after birth
झांसी। जन्म के एक घंटे के अंदर झांसी के अधिकतर बच्चों को मां का दूध नहीं मिल पा रहा है। जबकि, ये अमृत समान होता है और बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करते हुए तमाम संक्रमण से बचाता है। कई बार ये बच्चों की जान बचाने में भी मदद गार साबित होता है। मगर नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-5 में इसका ग्राफ पांच सालों में दो तिहाई गिर गया है।
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मां के दूध में वे सभी पोषक तत्व होते हैं, जिनकी शिशु को जीवन के पहले छह महीनों में जरूरत होती है। स्तनपान दस्त और सामान्य बचपन की बीमारियों जैसे निमोनिया से बचाता है। इसके दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ भी हो सकते हैं, जिसमें बचपन और किशोरावस्था में अधिक वजन और मोटापे के जोखिम को कम करना, नवजात की मृत्यु की संभावना को कम करना शामिल है। यह भी प्रमाणिक हुआ है कि पहले एक घंटे में स्तनपान शुरू कराने से बच्चों में स्तनपान की प्रवृत्ति बढ़ती है। मगर तीन साल तक के बच्चों पर किए गए एनएफएचएस-5 के सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। पिछले पांच सालों में दो तिहाई कम हो गया है। 2015-16 एनएफएचएस-4 सर्वे में ये आंकड़ा 35.1 फीसदी था, जो अब 12.7 प्रतिशत हो गया है। यही नहीं, छह महीने तक लगातार स्तनपान कराने का ग्राफ भी लगभग तीन प्रतिशत की कमी आई है। इस आंकड़े से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी चिंतित हैं।
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ये होते पहले घंटे में स्तनपान फायदे
- मां के पहले दूध में कोलोस्ट्रम नाम का फ्लूइड होता है।
- इसमें प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की भरमार होती है।
- इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाली एंटीबॉडीज मिलती हैं।
- यह शिशु को कई संक्रमणों से बचाती हैं।
- कान, सांस, पेट, एलर्जी, डायबिटीज आदि बीमारियों से सुरक्षा मिलती।
- बच्चों का दिमाग तेज और मजबूत होता है।
- संतुलित वजन बनता है।
ये आया अंतर
सूचकांक एनएफएचएस-5 एनएफएचएस-4
शुरूआती एक घंटे में स्तनपान किया 12.7 फीसदी 35.1 फीसदी
लगातार छह माह तक स्तनपान किया 49.7 फीसदी 52.4 फीसदी
6-23 माह तक पूरी डाइट मिली 7.3 फीसदी 10.9 फीसदी
फोटो..
प्रजनन आयु वर्ग की सभी महिलाओं को जन्म के पहले एक घंटे में स्तनपान के महत्व को समझना होगा। ये नवजात के लिए अमृत समान होता है। इस कार्य में प्रसव कार्य से जुड़े स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी अपना योगदान देना होगा। - आनंद चौबे, मंडलीय परियोजना प्रबंधक, एनएचएम।
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