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इंसानियत ने ली अंगड़ाई, प्रकृति में आया निखार

Sat, 26 Dec 2020 02:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 26 Dec 2020 02:18 AM IST
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How much good insaniyat
आंतिया तालाब।
झांसी। यूं तो वर्ष 2020 कोरोना और इसके कारण हुई मौत, चौपट होते व्यापार, नौकरियों से छटनी के लिए जाना गया। त्योहारों की वो रौनक नहीं रही, उत्सव फीके रहे। कोरोना काल में विश्व की तरह झांसी भी ठहर सा गया। लेकिन इस बीच बहुत कुछ ऐसा भी हुआ जिसे भुलाया नहीं जा सकेगा। मदद के जज्बे के साथ लोगों में इंसानियत ने अंगड़ाई ली। प्रदूषण नियंत्रित हुआ और प्रकृति में निखार आया। यही नहीं, लोगों ने बहुत सीमित संसाधनों में जीवन जीना सीख लिया।
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पिछले कुछ महीनों का माहौल याद आते ही डर सा लगता है। संक्रमण के खतरे के चलते फल, सब्जी खरीदने में डर लगता था। अपनों के बीमार होने पर भी कुछ न कर पाने की बेबसी पर रोना आता था। झांसी में कोरोना संक्रमण और इस कारण होने वाली मौत के आंकड़ों से हर कोई सहमा हुआ था। इस कदर डर रहा कि लोग अपनों के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। इसी दौरान ऐसे मामले भी सामने आए जब बेगानों ने जान की परवाह किए बिना अपनों से बढ़कर काम किया। वर्ष 2020 में छोटी-छोटी ही सही, कई महत्वपूर्ण उपलब्ध्यिां भी रहीं।
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ऑनलाइन बाजार हुआ तैयार
महीनों झांसी के बाजार बंद रहे। लेकिन आपदा में अवसर के तहत महानगर में ऑनलाइन शॉपिंग ने जोर पकड़ा। यह कॉस्मेटिक और आटा-दाल-चावल तक ही सीमित नहीं रहा। दवाओं से लेकर पसंदीदा चाट कॉर्नर से टिक्की, समोसे, गोलगप्पे और आइसक्रीम पार्लर से मनचाही आइसक्रीम घर मंगाने का सिलसिला शुरू हुआ। इससे एक ओर जरूरत पूरी हुईं, लोगों ने स्वाद का आनंद लिया वहीं तमाम लोगों को रोजगार मिला। लॉकडाउन के बाद बाजार खुल गए हैं। फिर भी ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ता जा रहा है।
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बुंदेलखंड में छा गए झांसी में बने मास्क
लॉकडाउन में टेलर, बुटीक का काम बंद हुआ तो क्या लोगों ने अपने हुनर को रोजगार और समाजसेवा दोनों के लिए बनाए रखा। महानगर की महिलाओं ने घरों पर मास्क बनाना शुरू किए। वहीं, ग्रामीण महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर बड़े पैमाने पर मास्क का उत्पादन किया। इससे संक्रमण से तो बचाव हुआ ही बुंदेलखंड भर की मांग की बड़ी आपूर्ति का हिस्सा पूरा हुआ। आज मास्क का एक अगल बाजार तैयार हो चुका है।
महिलाओं ने शुरू की थी जैविक खेती
2020 में झांसी की महिलाओं ने घर-रसोई के साथ ही खेती की कमान संभाली। जब कोरोना के डर से लोग घरों से नहीं निकल रहे थे तब झांसी के गुरसराय ब्लॉक की महिलाओं ने जैविक खेती कर मिसाल पेश की। ये महिलाएं 75 स्वयंसहायता समूहों से जुड़ी हैं। इन्होंने धान, गेहूं आदि की पारंपरिक खेती के साथ ही बड़े पैमाने पर सब्जियां उगाईं। अभी भी ये काम में जुटी हुई हैं।
जरूरतमंदों को खाना खिलाने निकले
लॉकडाउन के चलते जब लोग घरों तक सीमित थे, तब झांसी के कई लोग, संगठन नियमित खाने के पैकेट, पानी की बोतल लेकर जरूरतमंदों तक पहुंचाते रहे। उन्हें भी संक्रमण का डर था लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की। साथ ही मास्क, सैनिटाइजर भी वितरित किए।
पुलिस बनी ‘मित्र’, केक तक पहुंचाया
अक्सर सवालों के घेरे में रहने वाली पुलिस की सकारात्मक भूमिका 2020 में नजर आई। चिलचिलाती धूप हो, झमाझम बारिश या आंधी पसीना में तरबतर पुलिस वाले लॉकडाउन का पालन कराने के लिए 24 घंटे सड़कों पर रहे। अपराध नियंत्रण से इतर उन्होंने जरूरतमंदों तक खाद्य सामग्री, दवाएं पहुंचाईं। यही नहीं, जिन घरों में बच्चों का जन्मदिन था वहां केक लेकर पहुंचे बच्चों को उपहार दिए।
खुद किया काम, कर्मचारियों की नहीं रोकी पगार
बड़ी तादाद में लोगों ने घरों पर साफ सफाई, माली, खाने बनाने वाली, दुकानों के सेल्समैन व अन्य कर्मियों को बिना काम के भी वेतन दिया। लोगों का तर्क था कि इंसानियत का यही तकाजा है।
कोरोना काल में बनाए गए 325 तालाब
पानी के लिए तरसते बुंदेलखंड में कोरोना काल का सदुपयोग किया गया। इस दौरान मनरेगा मजदूरों ने 325 गांवों में तालाबों को पुनर्जीवित किया। इन जलाशयाें का लाभ भविष्य में मिलेगा।
खतरे की चिंता किए बिना महिला डॉक्टर ने की थी कोरोना संक्रमित की डिलीवरी
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की चिकित्सक डॉ.निधि दुबे ने संक्रमण की चिंता किए बिना जिले की पहली कोरोना पॉजिटिव गर्भवती की डिलीवरी कराई। इसके बाद वे खुद भी कोरोना संक्रमित हो गईं थीं। लेकिन इसका उन्हें जरा भी अफसोस नहीं रहा। उन्होंने फर्ज निभाते हुए इस पर गर्व जताया था। इस काम के लिए उन्हें राजकीय सम्मान भी मिला था।
ऑक्सीजन प्लांट को मिली हरी झंडी
अब तक ऑक्सीजन के लिए झांसी समेत पूरे बुंदेलखंड को मध्य प्रदेश व अन्य जिलों पर निर्भर रहना पड़ता था। 2020 में झांसी में ऑक्सीजन प्लांट को हरी झंडी मिल गई है। प्लांट में रोज एक हजार ऑक्सीजन सिलिंडर के बराबर गैस का उत्पादन हो सकेगा।

सफाई कर्मियों ने भी संभाला था मोर्चा
2020 में झांसी के सफाई कर्मियों का योगदान भुलाया नहीं जा सकेगा। कोरोना काल में जब तमाम शहरों में साफ सफाई प्रभावित होने की खबरें आ रहीं थीं तब झांसी के सफाई कर्मी कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर ड्यूटी करने पहुंचे थे। क्योंकि उन दिनों टेंपो, बस, रिक्शे नहीं चल रहे थे। पुलिस के रोकने पर उन्होंने आई कार्ड दिखाकर अपनी जिम्मेदारी का अहसास भी कराया था। सामान्य साफ सफाई के साथ ही मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में भी नहीं चूके थे।
कुछ अन्य उपलब्धियां
- झांसी मेडिकल कॉलेज को एफेरेसिस मशीन मिली। इससे प्लाज्मा डोनशन के साथ ही डेंगू मरीजों को जंबो प्लेटलेट्स की सुविधा मिलेगी।
- साइबर अपराधों के नियंत्रण के लिए 2020 में साइबर थाना मिला।
- झांसी से महज 17 किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश की प्रमुख पर्यटन नगरी ओरछा में 2020 में पहली बार सांस्कृतिक उत्सव ‘नमस्ते ओरछा’ का आयोजन हुआ।
कुछ कड़वी यादें
कोरोना से अब तक 173 की मौत हो चुकीं।
पहला संक्रमित मरीज 27 अप्रैल को सामने आया।
अब तक 10043 हो चुके हैं संक्रमित।
रेलवे के झांसी मंडल को तीन अरब से अधिक का नुकसान।
महानगर के व्यापारियों को एक अरब से अधिक का नुकसान।
बुंदेलखंड के हजारों मजदूरों को पलायन और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
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