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ट्रेन के गर्म पहियों को पहचानेगा हॉट बाक्स डिटेंशन मैसेज डिवाइस
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मालगाड़ी
- फोटो : ????????
झांसी। ट्रेन व मालगाड़ियों के पहिये अक्सर ब्रेक जाम (हॉट एक्सल) होने व अन्य कारणों के कारण गर्म होने लगते हैं। वक्त पर खामी का पता न लगने पर दुर्घटना की संभावना रहती है। रेलवे अब ऐसी घटनाओं का पता लगाने के लिए हॉट बाक्स डिटेंशन मैसेज डिवाइस की मदद लेगा। उपकरण से वक्त रहते ही ब्रेक जाम का पता लग जाएगा। उपकरण को सबसे पहले सीपरी बाजार पुल के पास एफ केबिन के पास लगाया जा रहा है।
कभी रेलकर्मियों की लापरवाही तो कभी तकनीकी खामी ट्रेन दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। दुर्घटनाओं का एक कारण हॉट एक्सल भी होता है। इसमें पहियों के गर्म होने पर चिंगारी या धुआं निकलने लगता है। वक्त पर खामी का पता न लगने पर कोई भी दुर्घटना हो सकती है। ऐसी खामियों का वक्त पर पता लग सके, इसके लिए रेल प्रशासन हॉट बाक्स डिटेंशन मैसेज डिवाइस लगाने जा रहा है। इसकी शुरूआत सीपरी बाजार पुल के पास से की जा रही है। यहां पटरियों के दोनों तरफ उक्त
उपकरण को लगाया जाएगा। ट्रेन के निकलते ही अगर किसी भी गाड़ी के पहिये में हॉट एक्सल जैसी खामी होगी डिवाइस तुरंत उसे पकड़ लेगा। डिवाइस तुरंत की इसकी सूचना कंट्रोल रूम, प्लेटफार्म सुपरवाइजरों आदि को मैसेज के माध्यम से कर देगा। जिससे प्लेटफार्म पर ट्रेन के आते ही खामी को दूर कर दिया जाएगा। अभी इस डिवाइस से दतिया और मुस्तरा स्टेशन की तरफ से आने वाली सवारी और मालगाड़ियों की निगरानी हो सकेगी। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि जल्द ही इस डिवाइस को लगाया जाएगा।
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इस हॉट बाक्स डिटेंशन मैसेज डिवाइस में 31.4 मिलियंस रीडिंग दर्ज की जा सकती है। यानी डेढ़ साल का डाटा रखा जा सकता है, जिसे समय अनुसार बढ़ाया जा सकता है। डिडेक्टर में माइनस 20 डिग्री से प्लस 240 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रिकॉर्ड किया जा सकता है।
मौजूदा समय में ट्रेन व मालगाड़ियों की जांच के लिए मैनुअल कार्य किया जा रहा है। ट्रेन के प्लेटफार्म में प्रवेश करने से पहले यार्ड में बैठे कर्मचारी ट्रैक के पास बैठ जाते हैं। जैसे- जैसे ट्रेन आगे प्लेटफार्म की तरफ बढ़ती है कर्मचारी कोच व वैगनों के नीचे जांच करते रहते हैं। यही जांच ट्रेन के प्लेटफार्म से आगे बढ़ने पर अपनाई जाती है। खामी पाए जाने पर ट्रेन के खड़े होते ही उसे दूर किया जाता है।
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कभी रेलकर्मियों की लापरवाही तो कभी तकनीकी खामी ट्रेन दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। दुर्घटनाओं का एक कारण हॉट एक्सल भी होता है। इसमें पहियों के गर्म होने पर चिंगारी या धुआं निकलने लगता है। वक्त पर खामी का पता न लगने पर कोई भी दुर्घटना हो सकती है। ऐसी खामियों का वक्त पर पता लग सके, इसके लिए रेल प्रशासन हॉट बाक्स डिटेंशन मैसेज डिवाइस लगाने जा रहा है। इसकी शुरूआत सीपरी बाजार पुल के पास से की जा रही है। यहां पटरियों के दोनों तरफ उक्त
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उपकरण को लगाया जाएगा। ट्रेन के निकलते ही अगर किसी भी गाड़ी के पहिये में हॉट एक्सल जैसी खामी होगी डिवाइस तुरंत उसे पकड़ लेगा। डिवाइस तुरंत की इसकी सूचना कंट्रोल रूम, प्लेटफार्म सुपरवाइजरों आदि को मैसेज के माध्यम से कर देगा। जिससे प्लेटफार्म पर ट्रेन के आते ही खामी को दूर कर दिया जाएगा। अभी इस डिवाइस से दतिया और मुस्तरा स्टेशन की तरफ से आने वाली सवारी और मालगाड़ियों की निगरानी हो सकेगी। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि जल्द ही इस डिवाइस को लगाया जाएगा।
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इस हॉट बाक्स डिटेंशन मैसेज डिवाइस में 31.4 मिलियंस रीडिंग दर्ज की जा सकती है। यानी डेढ़ साल का डाटा रखा जा सकता है, जिसे समय अनुसार बढ़ाया जा सकता है। डिडेक्टर में माइनस 20 डिग्री से प्लस 240 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रिकॉर्ड किया जा सकता है।
मौजूदा समय में ट्रेन व मालगाड़ियों की जांच के लिए मैनुअल कार्य किया जा रहा है। ट्रेन के प्लेटफार्म में प्रवेश करने से पहले यार्ड में बैठे कर्मचारी ट्रैक के पास बैठ जाते हैं। जैसे- जैसे ट्रेन आगे प्लेटफार्म की तरफ बढ़ती है कर्मचारी कोच व वैगनों के नीचे जांच करते रहते हैं। यही जांच ट्रेन के प्लेटफार्म से आगे बढ़ने पर अपनाई जाती है। खामी पाए जाने पर ट्रेन के खड़े होते ही उसे दूर किया जाता है।