फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Homes being illuminated with boxes in Chaukapatha village divided in UP-MP, children studying in the light of lamps

यूपी-एमपी में बंटे चौकापाठा गांव में डिबिया से रोशन हो रहे घर, लैंप की रोशनी में पढ़ते बच्चे

Thu, 23 Jun 2022 12:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jun 2022 12:27 AM IST
विज्ञापन
Homes being illuminated with boxes in Chaukapatha village divided in UP-MP, children studying in the light of lamps
झांसी। मुख्यालय से बामुश्किल 15 किलोमीटर दूर बसा है यह चौकापाठ गांव। खास बात यह है कि इस गांव का आधा हिस्सा उत्तर प्रदेश में है और झांसी नगर निगम में शामिल है और आधा मध्यप्रदेश में। बस दोनों के बीच में एक रास्ता है। दो राज्यों के बीच फंसे होने के कारण यह गांव मूलभूत सुविधाओं को भी तरस रहा है। यूपी वाले हिस्से में तो आज तक बिजली नहीं पहुंची। जबकि कहने को यह नगर निगम के वार्ड 22 का हिस्सा है। यहां बिजली कब आएगी इसका जवाब नगर निगम से लेकर बिजली अफसरों तक के पास नहीं है।
विज्ञापन

चौकापाठा गांव का जो हिस्सा झांसी नगर निगम में आता है वहां करीब 400 लोग रहते हैं। लेकिन मजे की बात देखिए कि यहां रहने वाले लोगों के घरों में आज तक बिजली का बल्ब नहीं जला। बिजली की लाइन नहीं खिंची है। जबकि रास्ते के दूसरी तरफ चौकापाठा गांव का आधा हिस्सा जो मध्यप्रदेश में आता है वहां भरपूर बिजली रहती है। एक तरफ जहां डिबिया, लैंप और मोमबत्ती से घर रोशने होते हैं तो दूसरी तरफ आकर्षक लाइटों से घर जगमगाते हैं।
विज्ञापन

रवि शर्मा तीन बार बने विधायक, नहीं लगवा पाए लाइट
विधायक रवि शर्मा तीन बार विधायक बन चुके हैं, लेकिन तीनों बार उन्होंने आश्वासन ही दिया है। बिजली आज तक गांव में नहीं पहुंच पाई है। गांव के लोगों का कहना है कि वह कई बार विधायक से कह चुके लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। हर बार आश्वासन दे दिया जाता है कि विधायक निधि से विद्युतीकरण करा दिया जाएगा लेकिन केवल वादे मिलते हैं बिजली आज तक नहीं मिल पाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मोबाइल चार्ज करने के लिए भी जाते मध्यप्रदेश
झांसी। इस गांव के लोग मोबाइल चार्ज करने के लिए भी रास्ता पार करके मध्यप्रदेश के हिस्से वाले चौकापाठा गांव में जाते हैं। कई दफा लोग रात को वहीं मोबाइल को चार्जिंग पर लगाकर चले जाते हैं और सुबह को वहां से ले आते हैं। ऐसा नहीं है कि गांव वालों के इस दर्द से सरकारी मशीनरी वाकिफ न हो लेकिन किसी ने ध्यान ही नहीं दिया।

पहले विधायक निधि से यहां खंभे और तार लगवाने के लिए पत्र भेजा गया था लेकिन विधायक निधि से 25 लाख का काम प्रस्तावित हो पा रहा था और कॉस्ट इसकी ज्यादा पड़ रही थी। इस कारण काम नहीं हो पाया है। अब डूडा के तहत काम करवाने के लिए पत्राचार किया गया है। - मुकेश कुमार चौरसिया, एसडीओ बिजौली
मैंने तो उम्मीद ही छोड़ दी है, पंद्रह सालों से तो में ही लाइट खंभों का इंतजार कर रहा हूं। - रविंद्र सिंह
कई बार शिकायत की, प्रदर्शन किया लेकिन कोई हल नहीं निकला है। सिर्फ आश्वासन मिला है। - लायक राम पाल
वर्षों से इंतजार करते-करते उम्र निकल जा रही है। लेकिन पता नहीं बिजली कब आएगी। - पंचू पाल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed