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छुट्टी मांगने पर दी जाती है नौकरी से निकालने की धमकी

Fri, 02 Jul 2021 01:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jul 2021 01:48 AM IST
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Holiday beg remove job damaki
झांसी। झांसी परिक्षेत्र में रोडवेज में संविदा पर रखे गए करीब 500 चालकों और परिचालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। माइलेज नहीं देने पर उनसे रिकवरी की जा रही है। चालकों के अनुसार उन्हें नोटिस दिए बिना रिकवरी की जाती है। छुट्टी मांगे जाने पर निकाल दिए जाने की धमकी दी जाती है। नियमानुसार सामान्य दिनों में बसों से मिलने वाली आय का 50 प्रतिशत उन्हें कोरोना काल में ही जमा करने का निर्देश जारी है। लक्ष्य नहीं पूरा होने पर भी उसकी रिकवरी उनसे की जाती है। टिकट मशीन नहीं मिलने पर उन्हें मैनुअल टिकट बनाकर यात्रियों को देना पड़ता है। माइलेज और आय बढ़ाने के लिए चालक और परिचालक लगातार ड्यूटी कर रहे हैं। चालकों का आराम न करना दुर्घटना का कारण भी बन सकता है। चालकों का कहना है कि लंबी दूरी की बसों में दो चालक रहते हैं। नियमानुसार दोनों चालकों को पूरा भुगतान किया जाना है लेकिन नियमों को दरकिनार कर उन्हें आधा- आधा भुगतान किया जा रहा है।
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क्या कहते हैं चालक-
गर्मी में एसी बसों में तेल की खपत बढ़ने पर तेल चोरी का आरोप लगाया जाता है। बिना नोटिस दिए रिकवरी की जाती है। अगर किसी रिकवरी की नोटिस भेजते हैं तो वह भी पांच- छह महीने बाद। इससे हमलोगों का काफी नुकसान होता है।
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- रफीक खान, चालक
टिकट मशीन नहीं दी जा रही है। अधिकारी अगर देते भी हैं तो खराब और उसे खुद से सुधरवाने की बात कहते हैं। ऐसे में मजबूरीवश यात्रियों को मैनुअल टिकट बनाकर देना पड़ता है। यात्री मशीन से प्रिटिंग टिकट मांगते हैं लेकिन मशीन के अभाव में नहीं दे पा रहे हैं।
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रोहित, परिचालक
डीजल की रिकवरी के साथ ही अगर गाड़ी में कहीं से स्क्रैच लग जाता है तो हम लोगों से उसकी भी रिकवरी की जाती है। अब अगर खड़ी गाड़ी में किसी दूसरी गाड़ी ने टच कर दिया तो इसमें हम लोगों का क्या दोष।
- नरेंद्र सिंह, चालक
गाड़ी को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए काफी समय लग जाता है लेकिन हम लोगों को ओवरटाइम भी नहीं दिया जाता। लंबी दूरी की बसों को अधिकारियों के दबाव में मजबूरीवश कभी- कभी अकेले भी ले जाना पड़ता है।
- सुरेश चंद्र, चालक
एक साल से हमें ड्रेस भी नहीं दिया जा रहा है। हमें ड्रेस भी अपने पैसे से बनवाना पड़ता है। गाड़ी का टायर खराब होने की स्थिति खुद से बनवाने का दबाव डाला जाता है। लाख सफाई के बावजूद हमारी यहां कोई नहीं सुनता।
- उमाशंकर, चालक
अधिकांश गाड़ियों में हार्न नहीं होता। शिकायत करने पर अधिकारियों द्वारा खुद के खर्च से हार्न ठीक कराने को कहा जाता है। मना करने पर हटा दिए जाने की धमकी भी दी जाती है।
- सुनील, चालक
हेड लाइट खराब होने पर पर हमें खुद बनवाना पड़ता है। इसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता। माइलेज बढ़ानेे के लिए हमलोग अफसरों के दबाव में लगातार ड्यूटी कर रहे हैं पर हमारी सुधि लेने वाला कोई नहीं है।
- सुनील यादव, चालक
लगातार ड्यूटी करने पर हम लोग भी थक जाते हैं। ऐसे में छुट्टी मांगने पर हमारे ऊपर काफी दबाव दिया जाता है। परेशानी बताने पर नौकरी से बैठा दिए जाने अथवा निकाल दिए जाने की धमकी मिलती रहती है।

- शैलेंद्र सिंह, परिचालक
कर्मचारियों की समस्याएं हैं और उन्हें जितनी सहूलियत दी जा सकती है दी जाती है। कम दूरी वाली बसों के अधिकांश चालक और परिचालक माइलेज बढ़ाने के चक्कर में खुद से लगातार ड्यूटी करते हैं। उनकी डिमांड पर ही उनकी ड्यूटी लगाई जाती है।
- राज कुमार त्रिवेदी
स्टेशन इंजार्च
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