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Jhansi News: हिरण्यकश्यप की राजधानी एरच से हुई थी होली की शुरुआत
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पुरातात्विक खोजों में यहां विकसित सभ्यता निवास करने के मिले हैं प्रमाण, आज भी धूमधाम से यहां मनाया जाता है होली महोत्सव
झांसी मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर है कस्बा एरच
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिले के कस्बा एरच से होली की शुरुआत हुई थी, जिसे यहां फाग कहा जाता है। कस्बे में भगवान नरसिंह का प्राचीन मंदिर है, जिसमें नरसिंह भगवान की मूर्तियां हैं। कस्बे में महल और प्राचीन भवनों के अवशेष हैं, जिन्हें राजा हिरण्यकश्यप का महल बताया जाता है। एरच हिरण्यकश्यप की राजधानी थी। मान्यता है कि इसी महल के पास हिरण्यकश्यप की बहन होलिका भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ गई थी और जल गई थी। प्राचीन मंदिरों को देखने के लिए प्रतिवर्ष लाखों लोग एरच पहुंचते हैं। आज भी यहां होली महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।
पुरातात्विक खुदाई में मिले साक्ष्यों के आधार पर एरच ऐतिहासिक नगर है। कस्बे के पास स्थित बेतवा नदी के किनारे बसे डिकोली गांव को ऐतिहासिक डीकांचल पर्वत के किनारे बसा गांव माना जाता है। मान्यता है कि डीकांचल पर्वत से भक्त प्रहलाद को नदी में फेंका गया था। जिस स्थान पर भक्त प्रह्लाद को फेंका गया था उसे वर्तमान समय में लोग प्रह्लाद कुंड के नाम से जानते हैं। पुरातात्विक खोजों में यहां कई ऐसे प्रमाण मिले हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि किसी समय में इस स्थान पर विकसित सभ्यता निवास करती थी। इस स्थान पर कई ऐसे अवशेष मौजूद हैं जिनके आधार पर इसे हिरण्यकश्यप की राजधानी माना जाता है। मान्यता है कि होली पर्व की शुरुआत झांसी जिले के इसी एरच कस्बे से हुई थी। एरच कस्बा जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर है।
साढ़े तीन हजार साल पहले व्यापार का बड़ा केंद्र था एरच
रिटायर्ड क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार दुबे ने बताया कि एरच में पुरातात्विक खुदाई में जो साक्ष्य मिले हैं, उनके अनुसार झांसी जिले का एरच कस्बा लगभग तीन हजार दो सौ साल पुराना है। कुछ राजाओं के नाम भी मिले हैं। यहां बंदरगाह के साक्ष्य मिलने के कारण माना जा सकता है कि यहां व्यापार का बड़ा केंद्र रहा है। शास्त्रों के आधार पर एरच को हिरण्यकश्यप की राजधानी भी बताया जाता है।
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हिमालय से प्राचीन है बुंदेलखंड का इतिहास
इतिहास के जानकार मुकुंद महरोत्रा बताते हैं कि बुंदेलखंड का इतिहास हिमालय से भी प्राचीन है। शास्त्रों के अनुसार भक्त प्रह्लाद को अग्नि में जलाने की कोशिश, हिरण्यकश्यप के वध और भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की मान्यता को इससे बल मिलता है कि बुंदेलखंड से पलायन करके दक्षिण भारत में गए लोगों ने नरसिंह भगवान के मंदिर स्थापित किए। मान्यता यह भी है कि हिरण्यकश्यप के वध के बाद यहां देव और दानवों की पंचायत हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर दुश्मनी मिटाने का संदेश दिया और तभी से होली की शुरुआत हुई।
एरच में होली महोत्सव 21 से
एरच कस्बे में पांच दिवसीय होली महोत्सव 21 से 25 मार्च तक मनाया जाएगा। शासन द्वारा होली महोत्सव के लिए दस लाख की धनराशि मुहैया कराई जाती है, जिसमें पर्यटन विभाग के निर्देशन और भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान के संयोजन में आयोजन किया जाता है। 21 मार्च को भक्त प्रहलाद की भव्य शोभायात्रा के साथ महोत्सव का आगाज होगा। 22 को बेबी इमरान की टीम द्वारा बुंदेली राई नृत्य एवं रात्रि कवि सम्मेलन होगा, 23 को रंगोली प्रतियोगिता, रात्रि में सितार वादक सरजू शरण पाठक द्वारा शास्त्रीय संगीत एवं भजन की प्रस्तुति होगी, 24 को लोकगीत एवं संजो बघेल द्वारा आल्हा भजन गायन, 25 को अखिलेश अलख एवं राधिका प्रजापति द्वारा लोकगीत एवं राई नृत्य के साथ रात्रि में भक्त प्रहलाद नाट्य मंचन की प्रस्तुति होगी।
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झांसी मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर है कस्बा एरच
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिले के कस्बा एरच से होली की शुरुआत हुई थी, जिसे यहां फाग कहा जाता है। कस्बे में भगवान नरसिंह का प्राचीन मंदिर है, जिसमें नरसिंह भगवान की मूर्तियां हैं। कस्बे में महल और प्राचीन भवनों के अवशेष हैं, जिन्हें राजा हिरण्यकश्यप का महल बताया जाता है। एरच हिरण्यकश्यप की राजधानी थी। मान्यता है कि इसी महल के पास हिरण्यकश्यप की बहन होलिका भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ गई थी और जल गई थी। प्राचीन मंदिरों को देखने के लिए प्रतिवर्ष लाखों लोग एरच पहुंचते हैं। आज भी यहां होली महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।
पुरातात्विक खुदाई में मिले साक्ष्यों के आधार पर एरच ऐतिहासिक नगर है। कस्बे के पास स्थित बेतवा नदी के किनारे बसे डिकोली गांव को ऐतिहासिक डीकांचल पर्वत के किनारे बसा गांव माना जाता है। मान्यता है कि डीकांचल पर्वत से भक्त प्रहलाद को नदी में फेंका गया था। जिस स्थान पर भक्त प्रह्लाद को फेंका गया था उसे वर्तमान समय में लोग प्रह्लाद कुंड के नाम से जानते हैं। पुरातात्विक खोजों में यहां कई ऐसे प्रमाण मिले हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि किसी समय में इस स्थान पर विकसित सभ्यता निवास करती थी। इस स्थान पर कई ऐसे अवशेष मौजूद हैं जिनके आधार पर इसे हिरण्यकश्यप की राजधानी माना जाता है। मान्यता है कि होली पर्व की शुरुआत झांसी जिले के इसी एरच कस्बे से हुई थी। एरच कस्बा जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर है।
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साढ़े तीन हजार साल पहले व्यापार का बड़ा केंद्र था एरच
रिटायर्ड क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार दुबे ने बताया कि एरच में पुरातात्विक खुदाई में जो साक्ष्य मिले हैं, उनके अनुसार झांसी जिले का एरच कस्बा लगभग तीन हजार दो सौ साल पुराना है। कुछ राजाओं के नाम भी मिले हैं। यहां बंदरगाह के साक्ष्य मिलने के कारण माना जा सकता है कि यहां व्यापार का बड़ा केंद्र रहा है। शास्त्रों के आधार पर एरच को हिरण्यकश्यप की राजधानी भी बताया जाता है।
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हिमालय से प्राचीन है बुंदेलखंड का इतिहास
इतिहास के जानकार मुकुंद महरोत्रा बताते हैं कि बुंदेलखंड का इतिहास हिमालय से भी प्राचीन है। शास्त्रों के अनुसार भक्त प्रह्लाद को अग्नि में जलाने की कोशिश, हिरण्यकश्यप के वध और भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की मान्यता को इससे बल मिलता है कि बुंदेलखंड से पलायन करके दक्षिण भारत में गए लोगों ने नरसिंह भगवान के मंदिर स्थापित किए। मान्यता यह भी है कि हिरण्यकश्यप के वध के बाद यहां देव और दानवों की पंचायत हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर दुश्मनी मिटाने का संदेश दिया और तभी से होली की शुरुआत हुई।
एरच में होली महोत्सव 21 से
एरच कस्बे में पांच दिवसीय होली महोत्सव 21 से 25 मार्च तक मनाया जाएगा। शासन द्वारा होली महोत्सव के लिए दस लाख की धनराशि मुहैया कराई जाती है, जिसमें पर्यटन विभाग के निर्देशन और भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान के संयोजन में आयोजन किया जाता है। 21 मार्च को भक्त प्रहलाद की भव्य शोभायात्रा के साथ महोत्सव का आगाज होगा। 22 को बेबी इमरान की टीम द्वारा बुंदेली राई नृत्य एवं रात्रि कवि सम्मेलन होगा, 23 को रंगोली प्रतियोगिता, रात्रि में सितार वादक सरजू शरण पाठक द्वारा शास्त्रीय संगीत एवं भजन की प्रस्तुति होगी, 24 को लोकगीत एवं संजो बघेल द्वारा आल्हा भजन गायन, 25 को अखिलेश अलख एवं राधिका प्रजापति द्वारा लोकगीत एवं राई नृत्य के साथ रात्रि में भक्त प्रहलाद नाट्य मंचन की प्रस्तुति होगी।