फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   hindi backgraound best in jhansi

हिंदी दिवस 2022: झांसी में समृद्ध रहा है हिंदी का अतीत, भविष्य भी है गौरवशाली

Wed, 14 Sep 2022 12:57 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Wed, 14 Sep 2022 12:57 AM IST
सार

झांसी में मातृभाषा का अतीत बेहद समृद्धशाली रहा है। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त व उपन्यासकार डॉ. वृंदावन लाल वर्मा ने हिंदी को खाद-पानी देने का काम किया। यह परंपरा अब भी कायम है।

विज्ञापन
hindi backgraound best in jhansi
विश्व हिंदी दिवस 2022 - फोटो : Istock

विस्तार

वीरांगना की धरती झांसी को यदि साहित्य की धरा भी कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहां मातृभाषा का अतीत बेहद समृद्धशाली रहा है। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त व उपन्यासकार डॉ. वृंदावन लाल वर्मा ने हिंदी को खाद-पानी देने का काम किया। यह परंपरा अब भी कायम है। मैत्रेयी पुष्पा के लेखन में भी बुंदेली झलक साफ देखने को मिलती है। इसके अलावा अन्य स्थानीय साहित्यकार भी अपनी कलम के बलबूते पर देश-विदेश में हिंदी का परचम ऊंचा किए हुए हैं।

विज्ञापन


हिंदी खड़ी बोली को जन-जन तक पहुंचाने का काम झांसी की धरती से ही आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने किया था। जन्म भले ही उनका यहां नहीं हुआ था। लेकिन, कर्मभूमि उनकी झांसी ही थी। रेलवे में नौकरी करते हुए उन्होंने लंबा समय यहां गुजारा था और यहीं से अपने लेखन को आगे बढ़ाया था।
विज्ञापन


इसी कड़ी में नाम जुड़ता है राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का, जो खड़ी बोली के प्रथम महत्वपूर्ण कवि रहे। उपन्यासकार पद्मभूषण डा. वृंदावन लाल वर्मा ने अपने लेखन के जरिये देश के कोने-कोने में हिंदी को पहुंचाने का काम किया। जबकि, सियाशरण गुप्ता ने नारी व वंचित वर्ग की करुणा को अपने लेखन में समाहित करने का काम किया। इसी कड़ी में नाम आता है मैत्रेयी पुष्पा का। उनका जन्म भले ही झांसी में नहीं हुआ था, परंतु बचपना यहीं बीता और यहीं से उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की। यही वजह है कि आज भी उनके लेखन में बृज के साथ-साथ बुंदेलखंड की झलक देखने को मिलती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

इसके अलावा भी कई ऐसे नाम हैं, जिनके लेखन की वजह से झांसी की धरती पर हिंदी की फसल खूब लहलहाई। इनमें घासीराम व्यास, महाकवि अवधेश, जानकारी शरण वर्मा, रामचरण मित्र हयारण, बृजमोहन, कृष्णानंद गुप्ता, डा. ओमप्रकाश बरसैंया, डा. मनुजी श्रीवास्तव, सेवकेंद्र त्रिपाठी, चंद्ररेखा सिंह समेत डा. रामशंकर भारती, निहालचंद्र शिवहरे, गौरीशंकर उपाध्याय, देवेंद्र भारद्वाज, डा. निधि अग्रवाल, डा. पीके अग्रवाल, अर्जुन सिंह चांद, विवेक मिश्र आदि के नाम शामिल हैं।

झांसी में हिंदी का अतीत बेहद समृद्धशाली रहा है। अब के साहित्यकारों को हिंदी की समृद्ध विरासत मिली है, जिसे सभी अपने लेखन के जरिये और भी आगे बढ़ा रहे हैं। - डा. रामशंकर भारती, साहित्यकार

देश में शायद ही कोई ऐसी जगह होगी, जहां हिंदी पर इतना काम हुआ होगा, जितना झांसी में हुआ है। यह क्रम लगातार जारी है। झांसी का लेखन देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहा है। - देवेेंद्र भारद्वाज, कवि

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed