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कदम-कदम पर धरोहरें और हरियाली...अपनी झांसी की बात है निराली
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झांसी। अपना शहर झांसी...इसे लोग महारानी लक्ष्मीबाई की नगरी के नाम से जानते हैं। लेकिन इसकी हर झलक निराली है। झांसी जैसी हरियाली और कदम-कदम पर सम्मोहित करने वाले झरने व कल-कल बहता बेतवा का पानी पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है।
यहां रानी का किला देखने हर रोज पर्यटकों की भीड़ लगती है। पास में ही सुंदर महारानी लक्ष्मीबाई पार्क, मैथिलीशरण गुप्त पार्क, वृंदावन लाल वर्मा पार्क, अटल एकता पार्क और पंचतंत्र पार्क की हरियाली झांसी की शोभा बढ़ाती है। महाराजा गंगाधर राव की समाधि और रानी महल के अलावा तमाम ऐतिहासिक धरोहर भी हैं जो शहर की भव्यता को दर्शाती हैं। कई बड़े ताल जैसे कि लक्ष्मी ताल, आंतिया तालाब, पानी वाली धर्मशाला और डैम इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। बरसात के दिनों में पहूज नदी और बेतवा के अलावा पारीछा डैम, सुुकुवां-डुकुवां डैम, बरुआसागर झरना सहित तमाम नजारे देखने वाले होते हैं।
वहीं, नारायण बाग के अंदर केवड़े का बाग देखने लायक है। यहां कभी-कभी बड़े-बड़े सांप और अजगर भी दिखते हैं। झांसी से लगे दतिया में मां पीतांबरा और धूमावती माता तो शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हैं। जबकि ओरछा में रामराजा सरकार और यहां के किले व महल देखने हर साल हजारों लोग ओरछा पहुंचते हैं। ब्यूरो
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यहां रानी का किला देखने हर रोज पर्यटकों की भीड़ लगती है। पास में ही सुंदर महारानी लक्ष्मीबाई पार्क, मैथिलीशरण गुप्त पार्क, वृंदावन लाल वर्मा पार्क, अटल एकता पार्क और पंचतंत्र पार्क की हरियाली झांसी की शोभा बढ़ाती है। महाराजा गंगाधर राव की समाधि और रानी महल के अलावा तमाम ऐतिहासिक धरोहर भी हैं जो शहर की भव्यता को दर्शाती हैं। कई बड़े ताल जैसे कि लक्ष्मी ताल, आंतिया तालाब, पानी वाली धर्मशाला और डैम इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। बरसात के दिनों में पहूज नदी और बेतवा के अलावा पारीछा डैम, सुुकुवां-डुकुवां डैम, बरुआसागर झरना सहित तमाम नजारे देखने वाले होते हैं।
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वहीं, नारायण बाग के अंदर केवड़े का बाग देखने लायक है। यहां कभी-कभी बड़े-बड़े सांप और अजगर भी दिखते हैं। झांसी से लगे दतिया में मां पीतांबरा और धूमावती माता तो शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हैं। जबकि ओरछा में रामराजा सरकार और यहां के किले व महल देखने हर साल हजारों लोग ओरछा पहुंचते हैं। ब्यूरो
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