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गाय के दूध में काले तिल डालकर चढ़ाने से मनोरथ पूर्ण करते हैं हजारिया महादेव

Wed, 23 Feb 2022 11:38 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 23 Feb 2022 11:38 PM IST
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Hazaria Mahadev fulfills his wishes by offering black sesame seeds in cow's milk.
झांसी। महानगर के हजारिया महादेव मंदिर में गाय के दूध में तिल मिलाकर चढ़ाने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव अपनी पंचायत के साथ विराजमान हैं। तकरीबन 400 वर्ष पुराने इस मंदिर के हर खंड में 100 शिवलिंग स्थापित हैं। इस दुर्लभ शिवलिंग के दर्शन से कष्ट और शत्रु दूर होते हैं। झांसी ही नहीं पूरे बुंदेलखंड के लोग इस मंदिर पर पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
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हजारिया महादेव मंदिर कोतवाली के पास स्थित पानी वाली धर्मशाला में स्थापित है। यहां भगवान शिव का सिद्ध शिवलिंग है। यह शिवलिंग दूर से देखने में नक्काशीदार लगता है, लेकिन पास से देखने पर पता लगता है कि गोलाई में की गई खंडवार नक्काशी में असल में शिवलिंग स्थापित हैं। इसके हर खंड में 100 शिवलिंग विराजित हैं। पूरे शिवलिंग में एक हजार छोटे शिवलिंग हैं। इसलिए इसे हजारिया महादेव कहा जाता है। मंदिर की सुरक्षा के लिए अष्ट भैरव इसके शिखर पर विराजमान हैं।
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बताते हैं कि दूसरे शिव मंदिरों की तरह यहां शिवजी अपने परिवार के साथ विराजित नहीं हैं, बल्कि मंदिर में भोलेनाथ अपनी पंचायत के साथ विराजमान हैं। इनकी पंचायत में शिवजी के साथ भगवान श्रीगणेश, मां दुर्गा, भगवान विष्णु और भगवान सूर्यदेव शामिल हैं। इस शिवलिंग को तकरीबन 400 वर्ष पूर्व जंगल में किसने स्थापित किया था, इसकी सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसके अद्भुत सिद्ध स्वरूप से इसकी प्राचीनता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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मंदिर के तट पर बेहद सुंदर पानी का एक बड़ा कुंड है, जिसमें सदियों से पृथ्वी के जलस्रोतों से हर समय पानी आता है। इसी को पानी वाली धर्मशाला कहते हैं लेकिन इसका पानी कभी भी मंदिर में अभिषेक के लिए उपयोग नहीं किया जाता है।
शिवलिंग की अर्ध परिक्रमा करें तो मिलता है पूजा का फल
झांसी। मंदिर के आचार्य राहुल गोस्वामी बताते हैं कि शिवजी की पूजा के बाद मंदिर में शिवलिंग की अर्ध परिक्रमा ही होती है। शिवलिंग की पूरी परिक्रमा वर्जित है। मंदिर का डिजाइन भी इस तरह का है कि भक्त अर्ध परिक्रमा ही कर पाते हैं। उन्होंने बताया कि पूरी परिक्रमा करने से शिवलिंग पर चढ़ाये जल या दूध की धारा को लांघना पड़ता है। इससे पूजा का फल नहीं मिलता। शिवलिंग पर जलाभिषेक के बाद कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। हजारिया महादेव मंदिर में भक्त गाय के दूध में काले तिल डालकर भोलेनाथ पर चढ़ाएं तो सारे मनोरथ पूरे होते हैं।

महाशिवरात्रि पर सुबह 4 बजे होगा रुद्राभिषेक
झांसी। आचार्य ने बताया कि मंदिर में महाशिवरात्रि को सुबह 4 बजे रुद्राभिषेक होगा। सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक भक्तगण पूजा कर शिवलिंग के दर्शन करेंगे। इसके बाद फूलों से भव्य शृंगार किया जाएगा और प्रसाद बांटा जाएगा। रात 8 बजे भोलेनाथ की महाआरती होगी।
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