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‘हैश टैग’ का निशान, यूनिवर्सिटी ने माना यही थी नंबर बढ़ने वाली कापियों की पहचान

Fri, 09 Jul 2021 12:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jul 2021 12:30 AM IST
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hass tag singh increase number for examination copy
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध आयुर्वेदिक कॉलेज में ‘हैश टैग’ का निशान ही नंबर बढ़ाने की पहचान था। मूल्यांकन से पहले ही बीयू अधिकारियों को इसकी सूचना मिल गई थी मगर अफसर जाल में फंसने तक चुप्पी साधे रहे। मूल्यांकन के बाद कुलपति से अनुमति लेकर कॉपियों की दोबारा जांच की गई, तो ‘हैश टैग’ प्रकरण खुल गया। चिह्न वाली कॉपियों में औसत से ज्यादा नंबर दिए गए हैं।
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बीएएमएस छात्रों की परीक्षा के बाद मूल्यांकन मई में शुरू हुआ था। इससे पहले ही किसी ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों को गोपनीय सूचना दी कि बीएएमएस के कई छात्रों ने अपनी कॉपियों में ‘हैश टैग’ चिह्न बनाया है। ये चिह्न बनाने वाले छात्रों को कॉपियों में अच्छे नंबर दिए जाने हैं। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने भी इस मामले पर बातचीत की। फिर तय किया कि पहले मूल्यांकन हो जाने दिया जाए, इसके बाद जांच कराई जाएगी। मूल्यांकन पूरा होने के बाद उत्तर पुस्तिका प्रभारी ने कुलपति से अनुमति लेकर कॉपियों की दोबारा जांच शुरू कर दी। जांच में सामने आया कि 3200 कॉपियों में से 500 में ‘हैश टैग’ चिह्न पहले ही पन्ने पर बना मिला।
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चिह्न बनाना यूएफएम की श्रेणी में आता
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि कॉपी में किसी भी तरह का पहचान चिह्न बनाना यूएफएम यानी अन फेयर मींन्स की श्रेणी में आता है। इस स्थिति में कॉपी को बुक किया जा सकता है। छात्र को परीक्षा से डिबार किया जा सकता है।
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तीन, दो या एक कॉलेज में हुआ खेल
बुंदेलखंड में तीन आयुर्वेदिक कॉलेज हैं। 15 फीसदी कॉपियों में ‘हैश टैग’ चिह्न सामने आने के बाद बड़ा सवाल ये खड़ा हो रहा है कि तीन, दो या फिर एक कॉलेज में ये खेल हुआ है। चूंकि, कॉपियों में कोडिंग के बाद मूल्यांकन होता है, ऐसे में अभी ये नहीं पता चल सका है कि चिह्न बनाने वाले छात्र किस कॉलेज के हैं। जल्द ही जांच में इसका खुलासा हो जाएगा।

पहले साल के 35 फीसदी छात्रों ने बनाया चिह्न
शुरूआती जांच में पता चला है कि 500 कॉपियों में चिह्न बनाने वाले 35 फीसदी छात्र तो पहले साल के हैं। एक कॉपी में तो सर्वाधिक 100 में से 93 अंक दिए गए हैं। जबकि, बाकी कॉपियों में 70 से लेकर 85 के बीच अंक दिए गए हैं। जिन्होंने हैश टैग का इस्तेमाल नहीं किया है, उनके औसत अंक 50 से 60 के बीच हैं। कुछ को 70 से 83 के बीच में अंक मिले हैं।
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