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जीएसटी से थमी छोटे रेलवे स्टेशनों की सफाई
jhansi
Updated Thu, 31 Aug 2017 12:45 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
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मंडल के छोटे स्टेशनों पर इंप्रेस राशि (अग्रदाय) का भुगतान न होने से साफ- सफाई और अन्य रखरखाव के काम ठप पड़ गए हैं। लेखा विभाग सभी कामों के जीएसटी के बिल मांग रहा है, जो स्टेशन मास्टरों के लिए उपलब्ध करा पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
दरअसल, रेल प्रशासन हर महीने छोटे स्टेशनों की साफ- सफाई और अन्य सुविधाओं के लिए साढ़े चार हजार रुपये इंप्रेस उपलब्ध कराता है। इस राशि में स्टेशन मास्टर को साफ- सफाई, मटका, स्टेशनरी, फर्नीचर की टूटफूट, फिनाइल, बैटरी के सेल की व्यवस्था करना पड़ती हैं। साफ- सफाई के लिए आसपास क्षेत्र के किसी प्राइवेट सफाई कर्मचारी को रख लेते है। अभी तक होता यह था कि जैसे सुबह- शाम दो- दो घंटे सफाई के लिए एक व्यक्ति को रख लिया गया। महीने पर एक सादा कागज पर उसका नाम, पता और अंगूठा लगवा लिया जाता था। स्टेशन मास्टर उस कागज को सत्यापित करके लेखा विभाग में भेज देते थे। इसके बाद भुगतान हो जाता था, लेकिन जुलाई महीने के सभी बिल लेखा विभाग ने वापस भेज दिए।
अब रेलवे का लेखा विभाग प्राइवेट साफ कर्मचारी को दी जाने वाली राशि का जीएसटी बिल मांग रहा है, जो देना संभव नहीं हो पा रहा है। मुश्किल यह है कि सफाई करने वाला एक गरीब व्यक्ति मजूदरी के लिए जीएसटी का बिल कहा से लाकर दे। इससे स्टेशनों की सफाई का काम बंद चल रहा है। इस संबंध में पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि समस्या का हल तलाशा जा रहा है।
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मालूम हो कि, रेल मंडल में 167 स्टेशन हैं, जिसमें 150 स्टेशन बी, डी और ई श्रेणी के छोटे स्टेशन हैं।
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दरअसल, रेल प्रशासन हर महीने छोटे स्टेशनों की साफ- सफाई और अन्य सुविधाओं के लिए साढ़े चार हजार रुपये इंप्रेस उपलब्ध कराता है। इस राशि में स्टेशन मास्टर को साफ- सफाई, मटका, स्टेशनरी, फर्नीचर की टूटफूट, फिनाइल, बैटरी के सेल की व्यवस्था करना पड़ती हैं। साफ- सफाई के लिए आसपास क्षेत्र के किसी प्राइवेट सफाई कर्मचारी को रख लेते है। अभी तक होता यह था कि जैसे सुबह- शाम दो- दो घंटे सफाई के लिए एक व्यक्ति को रख लिया गया। महीने पर एक सादा कागज पर उसका नाम, पता और अंगूठा लगवा लिया जाता था। स्टेशन मास्टर उस कागज को सत्यापित करके लेखा विभाग में भेज देते थे। इसके बाद भुगतान हो जाता था, लेकिन जुलाई महीने के सभी बिल लेखा विभाग ने वापस भेज दिए।
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अब रेलवे का लेखा विभाग प्राइवेट साफ कर्मचारी को दी जाने वाली राशि का जीएसटी बिल मांग रहा है, जो देना संभव नहीं हो पा रहा है। मुश्किल यह है कि सफाई करने वाला एक गरीब व्यक्ति मजूदरी के लिए जीएसटी का बिल कहा से लाकर दे। इससे स्टेशनों की सफाई का काम बंद चल रहा है। इस संबंध में पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि समस्या का हल तलाशा जा रहा है।
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मालूम हो कि, रेल मंडल में 167 स्टेशन हैं, जिसमें 150 स्टेशन बी, डी और ई श्रेणी के छोटे स्टेशन हैं।