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जीएसटी जटिल, पुरानी डेट में बना रहे बिल
amarujala
Updated Tue, 11 Jul 2017 12:53 AM IST
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- फोटो : demo
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जीएसटी को लागू हुए दस दिन हो चुके हैं, लेकिन इसके प्रावधान अभी तक व्यापारियों की समझ में नहीं आए हैं। जीएसटी की परेशानी से बचने के लिए व्यापारी अभी एक जुलाई से पहले की तारीखों में बिल बनाकर उपभोक्ताओं को दे रहे हैं। जीएसटी की जटिलता व्यापारियों को समझाने में वाणिज्य कर विभाग का हैल्प डेस्क भी कारगर नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि ट्रांसपोर्टर्स की आनाकानी के कारण बाजार में माल कम आ रहा है।
सोमवार को वाणिज्य कर कार्यालय की हेल्प डेस्क पर समस्या लेकर पहुंचे रमेश कुमार वर्मा ने पूछा कि शटरिंग (निर्माण में छत डालते समय लगने वाले उपकरण) कारोबार में 12 प्रतिशत जीएसटी का प्रावधान किया गया है। इस स्थिति में क्या किसी व्यक्ति के निर्माणाधीन घर में शटरिंग लगाने पर उससे टैक्स लेना है। इसी तरह धागा, बटन बेचने वाले संतोष कुमार का सवाल था कि उनका वार्षिक टर्नओवर 20 लाख से कम है, लेकिन दिल्ली व अन्य स्थानों से माल मंगाना पड़ता है। ऐसे में उनको पंजीकरण कराना जरूरी है कि नहीं। ऐसी ही तमाम जिज्ञासाओं को लेकर प्रतिदिन व्यापारी वाणिज्य कर कार्यालय पहुंच रहे हैं। लेकिन, हेल्प डेस्क उन्हें संतुष्ट नहीं कर पा रहा है। इस परेशानी से बचने के लिए व्यापारी एक जुलाई से पहले की तारीखों में बिल बना रहे हैं।
अधिकतर व्यापारी पुराना स्टॉक ठिकाने में लगे हुए हैं। बिल भी वैट में ही एक जुलाई के पहले की तिथि के काटकर दे रहे हैं, ताकि रिटर्न भरते समय परेशानी न हो। ट्रांसपोर्टर भी उन्हीं व्यापारियों को माल ला रहे हैं, जो अपना जीएसटी नंबर दे रहे हैं। इस कारण व्यापारी भी ट्रांसपोर्ट से कम ही माल मंगा रहे हैं।
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‘दूसरे राज्य से माल मंगाने पर जीएसटी में पंजीकरण कराना जरूरी है। चाहे कारोबारी का टर्न ओवर 20 लाख से कम ही क्यों न हो? शटरिंग में टैक्स उसी स्थिति में लेना है, जब कारोबारी खुद का मैटेरियल लगाकर निर्माण कार्य कर रहा है।’
रमेश चंद्र पांडे, सहायक कमिश्नर, वाणिज्य कर विभाग
फोटो
किसान नहीं चाहता बिल
जीएसटी में टॉली, पानी का टैंकर बनवाने पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। अभी ट्राली पर साढ़े छह प्रतिशत और टैंकर पर 13 प्रतिशत कर था। इसी तरह खेती से जुड़े अन्य उपकरणों में 12 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान कर दिया गया है। अभी तक कृषि उपकरण बनवाने पर कोई टैक्स नहीं था। एक लाख की ट्रॉली बनवाने पर 18 हजार रुपये टैक्स किसान किसी भी कीमत पर देने को तैयार नहीं है। वह बिना बिल के काम कराना चाहता है। इस कारण मार्केट में ग्राहक ही नहीं आ रहे हैं।
परमिंदर सिंह, लोहा व्यापारी।
फोटो
वैट में काट रहे बिल
इलेक्ट्रॉनिक आइटम पर 28 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है, लेकिन बिल में टैक्स कैसे दर्शाना है? यह स्थिति अभी तक साफ नहीं की गई है। इस कारण अभी तो मैं ग्राहक आने पर वैट में ही पुरानी डेट में बिल काट रहा हूं। दूसरा, एक जुुलाई के बाद से बाजार में ग्राहक भी नहीं आ रहे हैं।
दिनेश कुमार अग्रवाल, इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी।
फोटो
बिल मांगेगा तो कैसे देंगे?
इलेक्ट्रॉनिक आइटम की रिपेयरिंग करने पर भी टैक्स लगाया दिया गया है। मुझे रिपेयरिंग करने पर अभी तक टैक्स देने की जरूरत ही नहीं पड़ी। अब समझ नहीं आ रहा कि जीएसटी में पंजीकरण कराए कि नहीं। ग्राहक बिल मांगेगा तो कैसे देंगे? स्थिति साफ नहीं हो रही है।
गुड्डन अग्रवाल, इलेक्ट्रानिक आइटम सुधारक।
फोटो
कम माल मिल रहा, स्टॉक ही बिक रहा
जीएसटी लगने के बाद से मुझे बाजार से कम माल मिल रहा है। आर्डर लेने सेल्समैन भी कम आ रहे हैं। अभी दुकान में रखा माल ही बेच रहे हैं। दरअसल, ऊपर से ही जीएसटी को लेकर स्थिति साफ नहीं है। इस कारण डीलर भी काम माल मंगा रहे हैं। ग्राहक जरूर बिल मांगने लगे हैं, इस कारण पंजीकरण कराना है।
लक्ष्मी नारायण गुप्ता, किराना व्यापारी।
फोटो
पुरानी बुक पर ही जारी कर रहे बिल
मैंने जीएसटी बिल बुक छपा ली है, लेकिन कौन से स्पेयर पार्ट्स पर कितना टैक्स लगना है, यह स्थिति अभी तक साफ नहीं है। इस कारण वैट की पुरानी बिल बुक पर ही बिल काट रहा हूं। दूसरा, इंटरनेट कनेक्टिविटी की हर समय समस्या बनी रहती है, ऐसे में व्यापारी कैसे हर समय अपटेड रहेगा। इस पर विभाग को विचार करना चाहिए।
किशन पंजाबी, स्पेयर पार्ट्स विक्रेता।
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जीएसटी को लागू हुए दस दिन हो चुके हैं, लेकिन इसके प्रावधान अभी तक व्यापारियों की समझ में नहीं आए हैं। जीएसटी की परेशानी से बचने के लिए व्यापारी अभी एक जुलाई से पहले की तारीखों में बिल बनाकर उपभोक्ताओं को दे रहे हैं। जीएसटी की जटिलता व्यापारियों को समझाने में वाणिज्य कर विभाग का हैल्प डेस्क भी कारगर नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि ट्रांसपोर्टर्स की आनाकानी के कारण बाजार में माल कम आ रहा है।
सोमवार को वाणिज्य कर कार्यालय की हेल्प डेस्क पर समस्या लेकर पहुंचे रमेश कुमार वर्मा ने पूछा कि शटरिंग (निर्माण में छत डालते समय लगने वाले उपकरण) कारोबार में 12 प्रतिशत जीएसटी का प्रावधान किया गया है। इस स्थिति में क्या किसी व्यक्ति के निर्माणाधीन घर में शटरिंग लगाने पर उससे टैक्स लेना है। इसी तरह धागा, बटन बेचने वाले संतोष कुमार का सवाल था कि उनका वार्षिक टर्नओवर 20 लाख से कम है, लेकिन दिल्ली व अन्य स्थानों से माल मंगाना पड़ता है। ऐसे में उनको पंजीकरण कराना जरूरी है कि नहीं। ऐसी ही तमाम जिज्ञासाओं को लेकर प्रतिदिन व्यापारी वाणिज्य कर कार्यालय पहुंच रहे हैं। लेकिन, हेल्प डेस्क उन्हें संतुष्ट नहीं कर पा रहा है। इस परेशानी से बचने के लिए व्यापारी एक जुलाई से पहले की तारीखों में बिल बना रहे हैं।
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अधिकतर व्यापारी पुराना स्टॉक ठिकाने में लगे हुए हैं। बिल भी वैट में ही एक जुलाई के पहले की तिथि के काटकर दे रहे हैं, ताकि रिटर्न भरते समय परेशानी न हो। ट्रांसपोर्टर भी उन्हीं व्यापारियों को माल ला रहे हैं, जो अपना जीएसटी नंबर दे रहे हैं। इस कारण व्यापारी भी ट्रांसपोर्ट से कम ही माल मंगा रहे हैं।
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‘दूसरे राज्य से माल मंगाने पर जीएसटी में पंजीकरण कराना जरूरी है। चाहे कारोबारी का टर्न ओवर 20 लाख से कम ही क्यों न हो? शटरिंग में टैक्स उसी स्थिति में लेना है, जब कारोबारी खुद का मैटेरियल लगाकर निर्माण कार्य कर रहा है।’
रमेश चंद्र पांडे, सहायक कमिश्नर, वाणिज्य कर विभाग
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किसान नहीं चाहता बिल
जीएसटी में टॉली, पानी का टैंकर बनवाने पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। अभी ट्राली पर साढ़े छह प्रतिशत और टैंकर पर 13 प्रतिशत कर था। इसी तरह खेती से जुड़े अन्य उपकरणों में 12 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान कर दिया गया है। अभी तक कृषि उपकरण बनवाने पर कोई टैक्स नहीं था। एक लाख की ट्रॉली बनवाने पर 18 हजार रुपये टैक्स किसान किसी भी कीमत पर देने को तैयार नहीं है। वह बिना बिल के काम कराना चाहता है। इस कारण मार्केट में ग्राहक ही नहीं आ रहे हैं।
परमिंदर सिंह, लोहा व्यापारी।
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वैट में काट रहे बिल
इलेक्ट्रॉनिक आइटम पर 28 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है, लेकिन बिल में टैक्स कैसे दर्शाना है? यह स्थिति अभी तक साफ नहीं की गई है। इस कारण अभी तो मैं ग्राहक आने पर वैट में ही पुरानी डेट में बिल काट रहा हूं। दूसरा, एक जुुलाई के बाद से बाजार में ग्राहक भी नहीं आ रहे हैं।
दिनेश कुमार अग्रवाल, इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी।
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बिल मांगेगा तो कैसे देंगे?
इलेक्ट्रॉनिक आइटम की रिपेयरिंग करने पर भी टैक्स लगाया दिया गया है। मुझे रिपेयरिंग करने पर अभी तक टैक्स देने की जरूरत ही नहीं पड़ी। अब समझ नहीं आ रहा कि जीएसटी में पंजीकरण कराए कि नहीं। ग्राहक बिल मांगेगा तो कैसे देंगे? स्थिति साफ नहीं हो रही है।
गुड्डन अग्रवाल, इलेक्ट्रानिक आइटम सुधारक।
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कम माल मिल रहा, स्टॉक ही बिक रहा
जीएसटी लगने के बाद से मुझे बाजार से कम माल मिल रहा है। आर्डर लेने सेल्समैन भी कम आ रहे हैं। अभी दुकान में रखा माल ही बेच रहे हैं। दरअसल, ऊपर से ही जीएसटी को लेकर स्थिति साफ नहीं है। इस कारण डीलर भी काम माल मंगा रहे हैं। ग्राहक जरूर बिल मांगने लगे हैं, इस कारण पंजीकरण कराना है।
लक्ष्मी नारायण गुप्ता, किराना व्यापारी।
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पुरानी बुक पर ही जारी कर रहे बिल
मैंने जीएसटी बिल बुक छपा ली है, लेकिन कौन से स्पेयर पार्ट्स पर कितना टैक्स लगना है, यह स्थिति अभी तक साफ नहीं है। इस कारण वैट की पुरानी बिल बुक पर ही बिल काट रहा हूं। दूसरा, इंटरनेट कनेक्टिविटी की हर समय समस्या बनी रहती है, ऐसे में व्यापारी कैसे हर समय अपटेड रहेगा। इस पर विभाग को विचार करना चाहिए।
किशन पंजाबी, स्पेयर पार्ट्स विक्रेता।