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खसरा खतौनी में मूंगफली का उत्पादन लिखा तभी मिलेगा लाभ
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झांसी। न्यूनतम समर्थन योजना के अंतर्गत जिले में मूंगफली खरीद के लिए चार केंद्र खोल दिए गए हैं। इन केंद्रों पर कुछ किसान ऐसे भी पहुंच रहे हैं, जो पिछले साल की खतौनी दिखाकर मूंगफली बेचना चाह रहे हैं, लेकिन उन्हें लौटा दिया जा रहा है। क्योंकि, नई खतौनी अनिवार्य है।
मूंगफली का समर्थन मूल्य 5550 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। मूंगफली खरीद के लिए गरौठा के मारकुआं, उल्दन, चिरगांव के रामनगर मंडी और क्रय विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड चिरगांव में खरीद केंद्र खोले गये हैं। जो किसान मूंगफली बेचना चाहते हैं, उनको खसरा-खतौनी और आधार कार्ड के साथ पंजीकरण कराना अनिवार्य है। कई किसान फसली वर्ष 1428 का खसरा- खतौनी लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें लौटा दिया जा रहा है। क्योंकि इन दिनों 1429 फसली साल चल रहा है। पिछले साल की खतौनी में कई किसानों की उपज में उड़द लिखी हुई है, जबकि मूंगफली लिखा जाना अनिवार्य है।
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अनूप कुमार द्विवेदी ने बताया कि खसरा खतौनी का सत्यापन होता है। इसी साल की खतौनी होना अनिवार्य है और उस पर मूंगफली की फसल लिखा होना अनिवार्य है। मूंगफली में सात प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए।
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मूंगफली का समर्थन मूल्य 5550 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। मूंगफली खरीद के लिए गरौठा के मारकुआं, उल्दन, चिरगांव के रामनगर मंडी और क्रय विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड चिरगांव में खरीद केंद्र खोले गये हैं। जो किसान मूंगफली बेचना चाहते हैं, उनको खसरा-खतौनी और आधार कार्ड के साथ पंजीकरण कराना अनिवार्य है। कई किसान फसली वर्ष 1428 का खसरा- खतौनी लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें लौटा दिया जा रहा है। क्योंकि इन दिनों 1429 फसली साल चल रहा है। पिछले साल की खतौनी में कई किसानों की उपज में उड़द लिखी हुई है, जबकि मूंगफली लिखा जाना अनिवार्य है।
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सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अनूप कुमार द्विवेदी ने बताया कि खसरा खतौनी का सत्यापन होता है। इसी साल की खतौनी होना अनिवार्य है और उस पर मूंगफली की फसल लिखा होना अनिवार्य है। मूंगफली में सात प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए।
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