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कोरोना के खिलाफ हो रही लड़ाई देखनी है तो गांव में जाइए, अभावों के बीच बड़ा संदेश दे रहे अन्नदाता
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चंदनपुर गांव में लॉकडाउन के कारण सड़कों पर पसरा सन्नाटा।
पुनीत शर्मा
झांसी। यूं तो कोरोना के खिलाफ हो रही जंग में हर कोई शामिल है लेकिन अगर आपको असल लड़ाई देखनी है तो गांव में जाइए। गांव में भारी अभावों के बीच लोग लॉडाउन का पालन कर रहे हैं। हर चेहरे पर मास्क या गमछा बंधा मिलेगा। महिलाएं घूंघट में नजर आएंगी। खेतों पर लोग मुंह पर कपड़ा बांधकर जाते हैं। न तो कोई चौपाल सज रही है और न ही किसी चौराहे पर नौजवानों का जमघट दिखाई देगा। इतने जागरूक हैं कि अगर किसी के घर कोई रिश्तेदार भी आ जाता है तो तत्काल पुलिस के पास सूचना पहुंच जाती है। शनिवार को अमर उजाला ने गांवों में जाकर हालात देखे तो पूरी तरह से सन्नाटा था। जो लोग हमें मिले भी वह मास्क लगाए थे। सामाजिक दूरी बनाकर खड़े थे। लोगों ने बताया कि जिनके पास जमीन नहीं है उनकी मदद बड़े किसान कर रहे हैं।
झांसी से तकरीबन बीस किलोमीटर दूर खजुराहो बुजुर्ग गांव में हम सबसे पहले पहुंचे। उम्मीद थी कि यहां जगह-जगह लोग खड़े होंगे। चौपालों पर बातचीत का दौर चल रहा होगा। बच्चे गलियों में खेल रहे होंगे। लेकिन यकीन मानिए झांसी महानगर से भी ज्यादा सन्नाटा था इस गांव में। 5000 की आबादी वाले इस गांव निवासी विनोद कुमार ने कहा कि खुद ही लोग लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं। जितेंद्र ने बताया कि जिन लोगों के पास जमीन नहीं है उनके सामने दिक्कत है लेकिन गांव में मदद हो जा रही है। राकेश टैक्सी चलाता है लेकिन अब घर पर ही है, कहता है कि गांव में लोग एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। यहां से करीब तीन किलोमीटर दूर चंद्रनगर गांव में तो भी पूरी तरह से सन्नाटा था। एक हैंडपंप के पास बैठे शिवा से हमने बात की तो कहने लगे कि किसान तो पूरी दुनिया का पेट पालता है तो अपने गांव में भला किसे भूखा रहने देगा। यहां कोई दिक्कत नहीं है। इसके बाद गांव काली पहाड़ी पर पहुंचे। इस गांव की गलियों तक में हम घूमे लेकिन कोई बाहर नहीं था। दरवाजे पर चारपाई डालकर बैठीं आशा देवी से पूछा गया तो कहने लगीं कि इसमें किसी के कहने की जरूरत ही नहीं। इस बीमारी से हम लोग खुद लड़ रहे हैं। उमाचरन ने बताया कि सारी दुकानें बंद रहती हैं। चौराहों पर हम लोग खुद ही जमघट नहीं लगने दे रहे हैं। दोपहर को एक बजे सिमरावली गांव में भी पूरी तरह से सन्नाटा था। पूरा गांव हमने घूम डाला लेकिन कहीं कोई बाहर नहीं दिखा। ललितपुर के गांव कुंआघोषी में भी लोग लॉकडाउन का कड़ाई के साथ पालन करते मिले।
जरूरी आंकड़े
झांसी में ग्राम पंचायतें-496
ललितपुर में ग्राम पंचायतें-416
सुबह को जल्दी निपटा लेते खेती का काम, फिर सारा दिन घर में
झांसी। सिमरावली निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि खेत पर जाते वक्त चेहरे पर कपड़ा बांधकर जाते हैं। सुबह को दस बजे तक खेती का काम निपटा लेते हैं और फिर सारा दिन घर में। किसी के घर न जाते हैं और न ही किसी को अपने घर आने देते हैं। अगर कोई मिल भी गया तो सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन किया जाता है। अगर कोई मास्क नहीं लगाया तो उसे टोका जाता है। घर वालों से भी कहा जाता है कि ध्यान रखें।
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चौपालों पर लगा दिए ताले, शाम को नहीं खुलने दी जातीं गांव में दुकानें
झांसी। दरअसल हर गांव में पांच से दस तक दुकानें हैं। चंद्रनगर निवासी कपिल का कहना है कि शाम को आमतौर पर दुकानों के आसपास भीड़ लग जाती है। लेकिन इन दुकानों को शाम के वक्त खुलने ही नहीं दिया जा रहा है। दुकानदारों से कह दिया गया है कि वह भी सामान सामाजिक दूरी बनाकर दें। किसी की भी दुकान पर भीड़ नहीं लगने दी जा रही है। सोमती का कहना है कि पहले परिवार वालों के घरों में दोपहर के वक्त बैठने के लिए चले जाते थे लेकिन अब तो बिलकुल बंद है।
पानी भरते वक्त भी सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखतीं महिलाएं
झांसी। आमतौर पर हर गांव पानी की समस्या से जूझ रहा है। कहीं हैंडपंप से पानी ढोया जाता है तो कहीं कुएं से। लेकिन खास बात यह देखने को मिली कि एक दो जगह को छोड़कर अधिकांश में महिलाएं सामाजिक दूरी के नियम का पालन कर रही थीं। दरियापुर निवासी सुमन, कविता और आशा ने बताया कि वह बच्चों को भी बिना मास्क लगाए घर से बाहर नहीं निकलने दे रही हैं। कपड़ों के मास्क तैयार कर लिए हैं।
कंट्रोल रूम पर गांवों से ज्यादा आ रहे फोन
झांसी। पुलिस कंट्रोल रूम पर गांवों से ज्यादा फोन आ रहे हैं। अगर गांव में किसी के घर कोई रिश्तेदार आ जाता है तो तत्काल पुलिस के पास खबर पहुंच जाती है। एसपी देहात राहुल मिठास ने बताया कि 26 थानों में जिला बंटा है। थानों पर भी लोग फोन करके बाहरी लोगों के बारे में सूचना दे रहे हैं। तत्काल पुलिस को मौके पर भेजा जाता है।
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झांसी। यूं तो कोरोना के खिलाफ हो रही जंग में हर कोई शामिल है लेकिन अगर आपको असल लड़ाई देखनी है तो गांव में जाइए। गांव में भारी अभावों के बीच लोग लॉडाउन का पालन कर रहे हैं। हर चेहरे पर मास्क या गमछा बंधा मिलेगा। महिलाएं घूंघट में नजर आएंगी। खेतों पर लोग मुंह पर कपड़ा बांधकर जाते हैं। न तो कोई चौपाल सज रही है और न ही किसी चौराहे पर नौजवानों का जमघट दिखाई देगा। इतने जागरूक हैं कि अगर किसी के घर कोई रिश्तेदार भी आ जाता है तो तत्काल पुलिस के पास सूचना पहुंच जाती है। शनिवार को अमर उजाला ने गांवों में जाकर हालात देखे तो पूरी तरह से सन्नाटा था। जो लोग हमें मिले भी वह मास्क लगाए थे। सामाजिक दूरी बनाकर खड़े थे। लोगों ने बताया कि जिनके पास जमीन नहीं है उनकी मदद बड़े किसान कर रहे हैं।
झांसी से तकरीबन बीस किलोमीटर दूर खजुराहो बुजुर्ग गांव में हम सबसे पहले पहुंचे। उम्मीद थी कि यहां जगह-जगह लोग खड़े होंगे। चौपालों पर बातचीत का दौर चल रहा होगा। बच्चे गलियों में खेल रहे होंगे। लेकिन यकीन मानिए झांसी महानगर से भी ज्यादा सन्नाटा था इस गांव में। 5000 की आबादी वाले इस गांव निवासी विनोद कुमार ने कहा कि खुद ही लोग लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं। जितेंद्र ने बताया कि जिन लोगों के पास जमीन नहीं है उनके सामने दिक्कत है लेकिन गांव में मदद हो जा रही है। राकेश टैक्सी चलाता है लेकिन अब घर पर ही है, कहता है कि गांव में लोग एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। यहां से करीब तीन किलोमीटर दूर चंद्रनगर गांव में तो भी पूरी तरह से सन्नाटा था। एक हैंडपंप के पास बैठे शिवा से हमने बात की तो कहने लगे कि किसान तो पूरी दुनिया का पेट पालता है तो अपने गांव में भला किसे भूखा रहने देगा। यहां कोई दिक्कत नहीं है। इसके बाद गांव काली पहाड़ी पर पहुंचे। इस गांव की गलियों तक में हम घूमे लेकिन कोई बाहर नहीं था। दरवाजे पर चारपाई डालकर बैठीं आशा देवी से पूछा गया तो कहने लगीं कि इसमें किसी के कहने की जरूरत ही नहीं। इस बीमारी से हम लोग खुद लड़ रहे हैं। उमाचरन ने बताया कि सारी दुकानें बंद रहती हैं। चौराहों पर हम लोग खुद ही जमघट नहीं लगने दे रहे हैं। दोपहर को एक बजे सिमरावली गांव में भी पूरी तरह से सन्नाटा था। पूरा गांव हमने घूम डाला लेकिन कहीं कोई बाहर नहीं दिखा। ललितपुर के गांव कुंआघोषी में भी लोग लॉकडाउन का कड़ाई के साथ पालन करते मिले।
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जरूरी आंकड़े
झांसी में ग्राम पंचायतें-496
ललितपुर में ग्राम पंचायतें-416
सुबह को जल्दी निपटा लेते खेती का काम, फिर सारा दिन घर में
झांसी। सिमरावली निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि खेत पर जाते वक्त चेहरे पर कपड़ा बांधकर जाते हैं। सुबह को दस बजे तक खेती का काम निपटा लेते हैं और फिर सारा दिन घर में। किसी के घर न जाते हैं और न ही किसी को अपने घर आने देते हैं। अगर कोई मिल भी गया तो सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन किया जाता है। अगर कोई मास्क नहीं लगाया तो उसे टोका जाता है। घर वालों से भी कहा जाता है कि ध्यान रखें।
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चौपालों पर लगा दिए ताले, शाम को नहीं खुलने दी जातीं गांव में दुकानें
झांसी। दरअसल हर गांव में पांच से दस तक दुकानें हैं। चंद्रनगर निवासी कपिल का कहना है कि शाम को आमतौर पर दुकानों के आसपास भीड़ लग जाती है। लेकिन इन दुकानों को शाम के वक्त खुलने ही नहीं दिया जा रहा है। दुकानदारों से कह दिया गया है कि वह भी सामान सामाजिक दूरी बनाकर दें। किसी की भी दुकान पर भीड़ नहीं लगने दी जा रही है। सोमती का कहना है कि पहले परिवार वालों के घरों में दोपहर के वक्त बैठने के लिए चले जाते थे लेकिन अब तो बिलकुल बंद है।
पानी भरते वक्त भी सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखतीं महिलाएं
झांसी। आमतौर पर हर गांव पानी की समस्या से जूझ रहा है। कहीं हैंडपंप से पानी ढोया जाता है तो कहीं कुएं से। लेकिन खास बात यह देखने को मिली कि एक दो जगह को छोड़कर अधिकांश में महिलाएं सामाजिक दूरी के नियम का पालन कर रही थीं। दरियापुर निवासी सुमन, कविता और आशा ने बताया कि वह बच्चों को भी बिना मास्क लगाए घर से बाहर नहीं निकलने दे रही हैं। कपड़ों के मास्क तैयार कर लिए हैं।
कंट्रोल रूम पर गांवों से ज्यादा आ रहे फोन
झांसी। पुलिस कंट्रोल रूम पर गांवों से ज्यादा फोन आ रहे हैं। अगर गांव में किसी के घर कोई रिश्तेदार आ जाता है तो तत्काल पुलिस के पास खबर पहुंच जाती है। एसपी देहात राहुल मिठास ने बताया कि 26 थानों में जिला बंटा है। थानों पर भी लोग फोन करके बाहरी लोगों के बारे में सूचना दे रहे हैं। तत्काल पुलिस को मौके पर भेजा जाता है।

काली पहाड़ी गांव में लॉकडाउन के कारण सड़कों पर पसरा सन्नाटा।

खजराहा बुजुर्ग में लॉकडाउन के कारण सड़क पर पसरा सन्नाटा।