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Jhansi News: गोविंद सागर बांध सालभर रहेगा लबालब, सिंचाई के लिए मिलेगा पर्याप्त पानी
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ललितपुर। केन बेतवा लिंक परियोजना किसानों के साथ आम लोगों की जिंदगी में बदलाव लाएगी। इस योजना से गोविंद सागर के लिए 56 एमसीएम पानी मिलेगा, जोकि बेतवा नदी से लिफ्ट करके आरसीसी कैनाल के जरिये बांध में लाया जाएगा। इससे बांध में सालभर पानी भरा रहेगा और इसका लाभ लोगों को मिलेगा। रबी के सीजन में गोविंद सागर बांध से संचालित नहरों का पानी टेल तक पहुंचेगा। इस पानी को बेतवा नदी से पांच चरणों में लेने की योजना पर सिंचाई विभाग काम कर रहा है।
जिले के सबसे पुराने बांधों में शुमार साइफन प्रणाली युक्त गोविंद सागर बांध का निर्माण वर्ष 1952 में हुआ था। बांध में पानी भंडारण की क्षमता 96.84 एमसीएम है। जबकि मृतप्राय जल 16.76 एमसीएम है। बांध का लाइव स्टोरेज 80.08 एमसीएम रहता है और इस पानी का उपयोग पेयजल व सिंचाई के लिए किया जाता है। पेयजल के 15.77 एमसीएम पानी और 60.00 एमसीएम पानी सिंचाई के लिए आरक्षित रहता है। बांध से 17-18 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है।
शहर के लोगों की पेयजल जरूरत को पूरी करने के लिए रबी के सीजन में नहरों का संचालन कम दिनों के लिए किया जाता है। इस कारण से नहरों का पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता और किसानों को फसल बोआई के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है। लेकिन, अब आने वाले दिनों में किसानों और शहर के लोगों को भरपूर पानी मिलेगा। इसका कारण है केन बेतवा लिंक परियोजना से गोविंद सागर बांध को 56 एमसीएम पानी दिया जाना। यह पानी बेतवा नदी से आरसीसी कैनाल के जरिये गोविंद सागर बांध तक पहुंचाया जाएगा।
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केन बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े अधिकारी सर्वे कर इसे धरातल पर लाने के प्रयास में जुटे हैं। अधिकारियों के मुताबिक पहले चरण में 10 एमसीएम नवंबर में और दूसरे चरण में दिसंबर में 10 एमसीएम पानी, तीसरे चरण में 20 एमसीएम पानी जनवरी में, फरवरी में छह एमसीएम पानी लिया जाएगा। जबकि शेष पानी मार्च में लिफ्ट कराया जाएगा।
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फैक्ट फाइल
- 4.38 एमसीएम पानी नेहरू नगर पेयजल योजना
- 11.32 एमसीएम जल संस्थान
- 0.07 एमसीएम रेलवे विभाग को
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यूपी का राजघाट बांध में 22 टीएमसी है हिस्सा
मध्य प्रदेश से होकर आने वाली बेतवा नदी पर जनपद में राजघाट बांध परियोजना निर्मित है। इसके लिए यूपी-एमपी के बीच समझौता हुआ था। 22 टीएमसी (ट्रिलियन क्यूबिक मीटर) पानी यूपी व 22 टीएमसी पानी एमपी को मिलना था। यूपी अपने हिस्से के 22 टीएमसी पानी में से 8 टीएमसी पानी को अन्य उपयोग में लेता है। जबकि, 14 टीएमसी पानी को झांसी, पारीछा में मांग के अनुसार छोड़ा जाता है। केन बेतवा लिंक परियोजना पूरी होने पर झांसी, पारीछा सहित अन्य जनपद को पानी की समस्या नहीं रहेगी। इससे राजघाट बांध में यूपी के हिस्से वाला बचा रहेगा।
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केन बेतवा लिंक परियोजना से गोविंद सागर बांध को 56 एमसीएम पानी मिलने से पेयजल परियोजना सहित किसानों को सिंचाई के लिए भी लाभदायक रहेगा। बांध में पर्याप्त मात्रा में पानी रहने से नहरों का संचालन सुचारू रूप से होगा और टेल तक आसानी से पानी पहुंचेगा।
शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खंड
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जिले के सबसे पुराने बांधों में शुमार साइफन प्रणाली युक्त गोविंद सागर बांध का निर्माण वर्ष 1952 में हुआ था। बांध में पानी भंडारण की क्षमता 96.84 एमसीएम है। जबकि मृतप्राय जल 16.76 एमसीएम है। बांध का लाइव स्टोरेज 80.08 एमसीएम रहता है और इस पानी का उपयोग पेयजल व सिंचाई के लिए किया जाता है। पेयजल के 15.77 एमसीएम पानी और 60.00 एमसीएम पानी सिंचाई के लिए आरक्षित रहता है। बांध से 17-18 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है।
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शहर के लोगों की पेयजल जरूरत को पूरी करने के लिए रबी के सीजन में नहरों का संचालन कम दिनों के लिए किया जाता है। इस कारण से नहरों का पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता और किसानों को फसल बोआई के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है। लेकिन, अब आने वाले दिनों में किसानों और शहर के लोगों को भरपूर पानी मिलेगा। इसका कारण है केन बेतवा लिंक परियोजना से गोविंद सागर बांध को 56 एमसीएम पानी दिया जाना। यह पानी बेतवा नदी से आरसीसी कैनाल के जरिये गोविंद सागर बांध तक पहुंचाया जाएगा।
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केन बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े अधिकारी सर्वे कर इसे धरातल पर लाने के प्रयास में जुटे हैं। अधिकारियों के मुताबिक पहले चरण में 10 एमसीएम नवंबर में और दूसरे चरण में दिसंबर में 10 एमसीएम पानी, तीसरे चरण में 20 एमसीएम पानी जनवरी में, फरवरी में छह एमसीएम पानी लिया जाएगा। जबकि शेष पानी मार्च में लिफ्ट कराया जाएगा।
फैक्ट फाइल
- 4.38 एमसीएम पानी नेहरू नगर पेयजल योजना
- 11.32 एमसीएम जल संस्थान
- 0.07 एमसीएम रेलवे विभाग को
यूपी का राजघाट बांध में 22 टीएमसी है हिस्सा
मध्य प्रदेश से होकर आने वाली बेतवा नदी पर जनपद में राजघाट बांध परियोजना निर्मित है। इसके लिए यूपी-एमपी के बीच समझौता हुआ था। 22 टीएमसी (ट्रिलियन क्यूबिक मीटर) पानी यूपी व 22 टीएमसी पानी एमपी को मिलना था। यूपी अपने हिस्से के 22 टीएमसी पानी में से 8 टीएमसी पानी को अन्य उपयोग में लेता है। जबकि, 14 टीएमसी पानी को झांसी, पारीछा में मांग के अनुसार छोड़ा जाता है। केन बेतवा लिंक परियोजना पूरी होने पर झांसी, पारीछा सहित अन्य जनपद को पानी की समस्या नहीं रहेगी। इससे राजघाट बांध में यूपी के हिस्से वाला बचा रहेगा।
केन बेतवा लिंक परियोजना से गोविंद सागर बांध को 56 एमसीएम पानी मिलने से पेयजल परियोजना सहित किसानों को सिंचाई के लिए भी लाभदायक रहेगा। बांध में पर्याप्त मात्रा में पानी रहने से नहरों का संचालन सुचारू रूप से होगा और टेल तक आसानी से पानी पहुंचेगा।
शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खंड