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बड़े खर्च से बच रही सरकार, इस साल भी नहीं होंगे रेलवे यूनियन मान्यता चुनाव
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झांसी। रेलवे यूनियन मान्यता के चुनाव पिछले ढाई साल से टलते आ रहे हैं। इस चुनाव में सरकार को करीब छह सौ करोड़ का खर्चा उठाना होगा। इस कारण इस साल भी चुनाव होने की संभावना नहीं है। यूनियन नेताओं का कहना है कि अब चुनाव मार्च 2022 के बाद ही होगा। जबकि गैर मान्यता प्राप्त संगठन चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
रेलवे अपने कर्मचारी संगठनों को मान्यता देने के लिए हर छह साल में चुनाव कराता है। पिछली बार 2013 में 25, 26 और 27 अप्रैल को चुनाव हुए थे। नीति के हिसाब से मान्यता प्राप्त संगठनों का कार्यकाल अप्रैल 2019 में पूरा हो गया था और उक्त तिथियों के हिसाब से ही चुनाव होने चाहिए थे, लेकिन पहले लोकसभा चुनाव और बाद में कोरोना महामारी के चलते ऐसा संभव नहीं हो सका। पिछली बार चुनाव के तीन महीने पहले संगठनों की सुविधाएं छीन ली गई थीं। मगर, इस बार चुनाव न होने से ऐसा संभव नहीं हो सका।े रेलवे बोर्ड के निदेशक देवाशीष मलिक ने यूनियनों की मान्यता के चुनाव का आदेश जारी कर दिया था। सभी जोनल रेलवे को चुनाव की तैयारी करने के लिए कहा गया। मगर यह निर्णय अंतिम मतदाता सूची तैयार न होने के बदल दिया गया। इस साल भी चुनाव होने की संभावना नहीं है। यूनियन नेताओं की माने तो देश के सभी 18 जोन के 70 मंडलों में एक साथ चुनाव होंगे। चुनाव में करीब 600 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। सरकार अभी इतना खर्च उठाना नहीं चाहती है। ऐसे में अब चुनाव मार्च 2022 के बाद ही होंगे।
छह साल में होते हैं चुनाव
इसके पूर्व यह चुनाव 2013 में हुए थे। मान्यता के लिए हर छह साल में चुनाव होता है। उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद जोन में अभी 18 पंजीकृत संगठन हैं, जिनमें दो के पास मान्यता है।
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ये मिलती हैं सुविधाएं
रेलवे की तरफ से मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों को कार्ड पास जारी किए जाते हैं। इनकी मदद से पदाधिकारी मंडल के किसी भी स्टेशन के लिए मुफ्त यात्रा कर सकते हैं। साथ ही हर तीन महीने में प्रबंध तंत्र के की बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं को रखने का मौका मिलता है। धरना- प्रदर्शन कर मांग पत्र सौंप सकते हैं। किसी भी अधिकारी से मुलाकात कर सकते हैं। संगठन की मासिक बैठक के लिए स्पेशल अवकाश मिलता है। यह सुविधाएं अभी मान्यता प्राप्त संगठनों के पदाधिकारियों को मिल रहीं हैं।
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रेलवे अपने कर्मचारी संगठनों को मान्यता देने के लिए हर छह साल में चुनाव कराता है। पिछली बार 2013 में 25, 26 और 27 अप्रैल को चुनाव हुए थे। नीति के हिसाब से मान्यता प्राप्त संगठनों का कार्यकाल अप्रैल 2019 में पूरा हो गया था और उक्त तिथियों के हिसाब से ही चुनाव होने चाहिए थे, लेकिन पहले लोकसभा चुनाव और बाद में कोरोना महामारी के चलते ऐसा संभव नहीं हो सका। पिछली बार चुनाव के तीन महीने पहले संगठनों की सुविधाएं छीन ली गई थीं। मगर, इस बार चुनाव न होने से ऐसा संभव नहीं हो सका।े रेलवे बोर्ड के निदेशक देवाशीष मलिक ने यूनियनों की मान्यता के चुनाव का आदेश जारी कर दिया था। सभी जोनल रेलवे को चुनाव की तैयारी करने के लिए कहा गया। मगर यह निर्णय अंतिम मतदाता सूची तैयार न होने के बदल दिया गया। इस साल भी चुनाव होने की संभावना नहीं है। यूनियन नेताओं की माने तो देश के सभी 18 जोन के 70 मंडलों में एक साथ चुनाव होंगे। चुनाव में करीब 600 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। सरकार अभी इतना खर्च उठाना नहीं चाहती है। ऐसे में अब चुनाव मार्च 2022 के बाद ही होंगे।
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छह साल में होते हैं चुनाव
इसके पूर्व यह चुनाव 2013 में हुए थे। मान्यता के लिए हर छह साल में चुनाव होता है। उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद जोन में अभी 18 पंजीकृत संगठन हैं, जिनमें दो के पास मान्यता है।
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ये मिलती हैं सुविधाएं
रेलवे की तरफ से मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों को कार्ड पास जारी किए जाते हैं। इनकी मदद से पदाधिकारी मंडल के किसी भी स्टेशन के लिए मुफ्त यात्रा कर सकते हैं। साथ ही हर तीन महीने में प्रबंध तंत्र के की बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं को रखने का मौका मिलता है। धरना- प्रदर्शन कर मांग पत्र सौंप सकते हैं। किसी भी अधिकारी से मुलाकात कर सकते हैं। संगठन की मासिक बैठक के लिए स्पेशल अवकाश मिलता है। यह सुविधाएं अभी मान्यता प्राप्त संगठनों के पदाधिकारियों को मिल रहीं हैं।