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चालू पेयजल योजनाओं पर बेवजह सरकारी पैसा लुटाएगा जलनिगम

Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 01:03 AM IST
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झांसी। कोरोना महामारी में एक तरफ बजट के अभाव में जनपद में विकास की कई योजनाएं दम तोड़ रहीं हैं। वहीं, जलनिगम जल जीवन मिशन कार्यक्रम के तहत आठ करोड़ रुपये ऐसी पेयजल योजनाओं पर खर्च करने जा रहा है, जिनमें आधी से अधिक अच्छी तरह से काम कर रहीं हैं। अधिकारियों ने बिना सर्वे के ही एस्टीमेट तैयार कर लिए। विभाग का यह गड़बड़झाला चर्चा में है।
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प्रदेश सरकार ने जल जीवन मिशन कार्यक्रम के तहत गांवों के घर- घर तक पाइपलाइन के जरिये कनेक्शन देने की योजना तैयार की है। जलनिगम ने इसी कार्यक्रम के तहत पंद्रह गांवों में संचालित पेयजल योजनाओं को आठ करोड़ की लागत से और अधिक दुरुस्त बनाने के टेंडर स्वीकृत किए हैं। इसमें गुलारा, खलीलपुरा, मथनिया, बेहाटा, गंवाबली, खैरा, दौन, सिलारी, दुर्गापुर, जेरा, गौरारी, देवरी घाट, सिलौरा, धौर्रा व हरपुरा की पेयजल योजनाएं शामिल हैं। जो टेंडर आवंटित किए गए हैं, उनके हिसाब से इन गांवों में पाइपलाइन विस्तार करना, बंद पंप हाउस को चालू करना, जरूरत के हिसाब से क्षमता बढ़ाना, पानी की टंकी या उसकी क्षमता बढ़ाना, स्टार्टर समेत अन्य खराब उपकरणों को बदलना आदि कार्य शामिल हैं। एक- एक योजना पर पचास से साठ लाख रुपये खर्च होने हैं।

गौर करने वाली बात ये है कि जलनिगम ने इन योजनाओं का सर्वे तक नहीं कराया कि यहां पर कौन से काम होना है? और आनन- फानन में एस्टीमेट तैयार कर टेंडर भी जारी कर दिए। जैसे कि गुलारा पेयजल योजना पूरी तरह से काम कर रही है। गांव की हर गली में अंतिम छोर तक पाइपलाइन पड़ी और प्रतिदिन लोगों को पानी मिल रहा है। यह योजना छह साल पहले ही शुरू हुई थी। कोई भी योजना तैयार होती है तो अगले पंद्रह साल को ध्यान में रखकर उसको तैयार किया जाता है। इसके बाद भी इस योजना पर पैसा लुटाने की तैयारी की जा रही है। अधिकांश दूसरी पेयजल योजनाओं का भी ऐसा ही हाल है।
वहीं, उत्तर प्रदेश जलनिगम कांट्रैक्टर एसोसिएशन ने उक्त कामों की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि अपात्रों को ठेके दे दिए गए। जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, जलनिगम के मुख्य अभियंता व अधीक्षण अभियंता से की गई है। टेंडर प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।
ठेकेदारों ने जो आरोप लगाए हैं वे जांच में गलत पाए गए हैं। टेंडरों के आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं है। दूसरा, पेयजल योजनाओं पर उतना ही काम होगा जितनी जरूरत है। सर्वे कराके ही काम शुरू करवाएंगे। काम नहीं हुआ तो पैसा वापस लौटा देेंगे। - एएस दुबे, अधीक्षण अभियंता पंचम मंडल जलनिगम।
जलनिगम ने जो भी ग्रामीण पेयजल योजनाएं संचालित कर रखीं हैं उनके पूरा होने के बाद नियम के अनुसार उसे चलाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान को सौंप दी जाती है। ग्राम प्रधान की जिम्मेदारी है कि जिन गांव वालों ने कनेक्शन ले रखे हैं उनसे न्यूनतम बिल लेकर योजना का रखरखाव करें। गांव के किसी व्यक्ति को पारिश्रमिक देकर उसे पंप हाउस पर नियुक्त कर दें। मगर पंप हाउस में कोई तकनीकी खराबी आने पर उसे सुधरवाने में कोई रुचि नहीं लेता है। महीनों योजना बंद पड़ी रहती है। अगर पेयजल योजना के संचालन की व्यवस्था जलनिगम के हाथों में ही रहे तो उसे निरंतर चलाना मुश्किल नहीं होगा।

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