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योगी जी, योजना तो बना डालीं, बुंदेलखंड में किसान के हाथ फिर भी खाली

Sat, 07 Dec 2019 01:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 07 Dec 2019 01:06 AM IST
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gov launch many scheem but farmar dont get benifit
किसान बृजलाल सेन
योगी जी, योजना तो बना डालीं, बुंदेलखंड में किसान के हाथ फिर भी खाली
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झांसी। शासन की योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन न होने से बुंदेलखंड का किसान अब भी बदहाल है। खेतों में हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी किसानों को फल नहीं मिल पा रहा है। अन्ना जानवर, सिंचाई की सुविधाओं का अभाव, खाद-बीज की किल्लत के अलावा दैवी आपदाओं से परेशान किसानों को अफसरों के मनमाने रवैये का शिकार होना पड़ रहा है। यही कारण है कि कई किसान खेती छोड़कर कामधंधे की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। कर्ज के बोझ से दबे कई किसान अपनी जान भी गंवा रहे हैं। अब पराली ने किसानों को कानूनी जंजीरों में भी जकड़ना शुरू कर दिया है। उन पर धड़ाधड़ मुकदमे हो रहे हैं।
आधे रास्ते बंद कर दी ऋण मोचन योजना
योगी आदित्यनाथ सरकार ने किसानों को राहत दिलाने के लिए बहुप्रचारित ऋण मोचन योजना आंरभ की थी लेकिन बुंदेलखंड में आधे किसान इसके लाभ से अभी तक वंचित हैं। बीच रास्ते में यह योजना अचानक से बंद कर दी गई। कृषि महकमे के आंकड़ों के मुताबिक झांसी में महज 60,787 किसानों को फायदा मिल सका जबकि 1,42,378 किसानों ने कर्ज माफी का दावा किया था। योजना लागू होने से पहले ऋण माफी का लाभ सभी किसानों को दिए जाने की बात हुई थी लेकिन, बाद में कई शर्तें जोड़ दी गईं। इसके जरिए सीमांत किसान (जिनके पास एक हेक्टेयर से कम कृषि भूमि हो) एवं लघु किसानों (जिसके पास एक हेक्टेयर से अधिक एवं दो हेक्टेयर से कम कृषि भूमि) को फायदा दिया जाना था। इस तरह देखा जाए तब 2.19 लाख केसीसी कार्ड धारकों को भी इस योजना का लाभ मिलना चाहिए था लेकिन, महज 60,787 किसानोें को ही फायदा दिया गया।
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पूरी खरीफ फसल नष्ट, अब तक नहीं मिला बीमा
बुंदेलखंड में इस बार बिन मौसम बारिश हो जाने की वजह से खरीफ की खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। सरकारी अनुमान के मुताबिक भी झांसी के ही बबीना, चिरगांव, मोंठ, बामौर, गुरसराय, मऊरानीपुर एवं बंगरा ब्लॉक के गांवों में अस्सी से सौ फीसदी तक फसल पूरी तरह खराब हो गई। खरीफ की फसल खराब हो जाने से किसानों की कमर पूरी तरह टूट गई। ऐसी दशा में उनको राहत दिलाने के लिए ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई थी। इसमें बीस फीसद मुआवजा फसल खराब होने के एक माह के भीतर दिया जाना था लेकिन करीब तीन माह बीत जाने के बाद भी मुआवजे के तौर पर एक भी रुपया किसानों के खाते में नहीं पहुंचा। इस वजह से किसान बेहद मायूस हैं।
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सिर्फ चौथाई किसानों तक पहुंची सम्मान निधि
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री सम्मान निधि की शुरुआत की। इसके जरिए किसानों को छह हजार रुपये सालाना दिया जाना है लेकिन अभी तक सिर्फ एक चौथाई किसानों को ही तीसरी किस्त हासिल हुई है। करीब एक लाख किसान ऐसे हैं जिन्हें एक अथवा दो किस्तें मिली हैं। वहीं, किसानों के डेटा की गड़बड़ियों को दूर करने में कृषि महकमे के अधिकारी एवं कर्मचारियों का भी दम फूल गया है। सरकार अब सिर्फ उन्हीं किसानों को तीसरी किस्त देने की बात कह रही, जिनके बैंक खाते एवं आधार में नाम एक तरीके का हो। इसकी पुष्टि करने में ही विभाग एवं किसान चकरघिन्नी बने हुए हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पहली किस्त जहां 1,77,096 किसानों के खाते में भेजी गई वहीं, तीसरी किस्त सिर्फ एक लाख से कम किसानों तक ही पहुंची है।
फसल खरीदने के बाद भी सरकार ने नहीं चुकाया पैसा
प्रकृति की मार झेलने वाले किसानों को चूना लगाने में सरकार भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही। उड़द एवं मूंगफली उगाने वाले सवा चार सौ किसानों का सवा दो करोड़ रुपया सरकारी महकमा एक साल से दबाए बैठा है। सरकारी खरीद केंद्र में अनाज बेचने के बाद भी किसानों को उनका भुगतान नहीं किया गया। अधिकारियों के तमाम चक्कर काटने के बावजूद उनके हाथ खाली हैं। मऊरानीपुर स्थित खरीफ क्रय केंद्र से पिछले वर्ष उड़द एवं मूंगफली की खरीद हुई थी। खरीद के बाद इन किसानों के नाम तकनीकी वजहों से केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सके। इस वजह से किसानों का पैसा फंस गया। जांच-पड़ताल के बाद स्थानीय स्तर पर भुगतान के लिए रजामंदी जता दी गई लेकिन अभी तक इन किसानों का भुगतान नहीं किया गया। पास में पैसा न होने की वजह से कई किसान रबी की फसल की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं।
बढ़ रहे अन्ना जानवर, रात भर करनी पड़ रही खेतों की रखवाली
अन्ना जानवरों की रोकथाम की कवायद भी फेल होती नजर आ रही है। अन्ना जानवरों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा। इस समय चना, मटर, गेहूं, जौ, अलसी आदि रबी की फसल खेतों में तैयार हो रही है लेकिन अन्ना जानवरों का आतंक इस कदर है कि किसानों को सर्द रात में जागकर अपने खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। झांसी में ही अन्ना जानवरों की संख्या 25258 थी जो इस साल तक बढ़कर करीब 46709 तक पहुंच चुकी है।

पराली का आतंक, अलाव तक पर पाबंदी
पराली जलाने को लेकर प्रशासनिक अमले की सख्ती ने किसानों के भीतर खौफ पैदा कर दिया है। अब रात में भी गांवों के भीतर पुलिस टीम गश्त कर रही है। हालत यह है सर्दियों में गांव में जलने वाले अलाव तक पर पाबंदी लगा दी गई है। झांसी में ही अभी तक पराली जलाने के आरोप में 177 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। दो लाख रुपये जुर्माना भी किसानों से वसूल किया गया है। वहीं, लापरवाही के आरोप में किसी भी अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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