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Jhansi News: गायत्री मंत्र और रामधुन सुन दर्द हो रहा गुम

Thu, 09 May 2024 03:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 09 May 2024 03:06 AM IST
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Got physiotherapy done after listening to Ramdhun, got relief from pain one and a half times faster
- सिर्फ फिजियोथेरेपी कराने वाले रोगियों से बेहतर परिणाम मिले
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। रामधुन और गायत्री मंत्र सुनने से मानसिक शांति मिलती है, मगर अब यह शारीरिक दर्द में भी आराम दे रही है। रानी लक्ष्मी पैरामेडिकल कॉलेज के फिजियोथेरेपी विभाग के विद्यार्थियों के शोध में यह साबित हुआ है। विद्यार्थियों ने एक साल तक 48 रोगियों की रामधुन और गायत्री मंत्र सुनाकर फिजियोथेरेपी की। इसके बाद पाया गया कि मरीजों को दर्द में सामान्य फिजियोथेरेपी कराने वाले मरीजों की तुलना में डेढ़ गुना तेजी से आराम मिला। अब यह शोध अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित होगा।
प्रमुख शोधकर्ता गौरव सक्सेना और सहयोगी अभिषेक मिश्रा ने बताया कि उन्होंने शोध कार्य के दौरान मरीजों को दो समूहों में बांटा गया। पहले समूह में 46 और दूसरे में 48 रोगियों को रखा गया। पहले ग्रुप के 46 मरीजों का सामान्य फिजियोथेरेपी से इलाज किया गया। जबकि, दूसरे ग्रुप के 48 रोगियों को फिजियोथेरेपी के साथ-साथ 30 मिनट के सत्र में गायत्री मंत्र और रामधुन भी सुनाई गई। मरीजों के होने वाले सर्वाइकल दर्द पर इसका असर न्यूमेरिक पेन स्केल और डिसेबिलिटी स्केल के जरिये देखा गया।
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उन्होंने बताया कि दोनों समूह के मरीजों का अध्ययन करने पर पाया गया कि रामधुन और गायत्री मंत्र सुनकर फिजियोथेरेपी कराने वाले मरीजों को दूसरे ग्रुप की तुलना में सवा से डेढ़ गुना तेजी से दर्द में आराम मिला। रामधुन सुनने वाले मरीजों का न्यूमेरिक पेन स्केल दो से तीन पाया गया। जबकि सामान्य थेरेपी वाले मरीजों का न्यूमेरिक पेन स्केल तीन से छह तक मिला। इसके अलावा मरीजों का डिसेबिलिटी स्केल भी मापा गया। रामधुन सुनने वाले मरीजों का यह स्केल 19 से 24 मिला। जबकि सामान्य मरीजों में यह 26 से 38 तक पाया गया। इससे साफ कि रामधुन और गायत्री मंत्र सुनकर फिजियोथेरेपी कराने वाले मरीज डेढ़ गुना तेजी से ठीक हुए।
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यह होता है न्यूमेरिक पेन स्केल
न्यूमेरिक पेन स्केल दर्द का स्तर पता करने की विधि होती है। इसका उपयोग आमतौर पर शून्य से 10 स्केल (पैमाना) का उपयोग करके उस समय दर्द की गंभीरता का आंकलन करने के लिए किया जाता है। इसमें शून्य का अर्थ कोई दर्द नहीं और 10 का अर्थ जीवन का सबसे तीव्र दर्द होता है। वहीं, डिसेबिलिटी स्केल में किसी भी बीमारी से शारीरिक सक्रियता पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के बारे में पता लगाया जाता है। इसका पैमाना 30 से 40 तक मध्यम और 41 से 60 तक अत्याधिक की श्रेणी में आता है।

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वर्जन..
इस शोध कार्य के डाटा का विश्लेषण का काम पूरा हो चुका है। जल्द ही ये शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हो जाएगा। कॉलेज में लगातार शोध कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है। - डॉ. अंशुल जैन, निदेशक, पैरामेडिकल कॉलेज।
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