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मालगाड़ी धीमी गति से दौड़ रही थी, इसलिए बच गया बड़ा हादसा
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झांसी। चिरुला स्टेशन के निकट मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में सामने आया है कि हादसे के वक्त गाड़ी धीमी गति से दौड़ रही थी। इस कारण परिचालन कर्मचारियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। दुर्घटनाग्रस्त वैगन के ब्रेक ब्लाक व्हील का रॉड कैसे टूटा? इसकी जांच अधिकारियों की चार सदस्यीय समिति कर रही है।
विगत आठ दिसंबर की रात साढ़े आठ बजे झांसी दतिया सेक्शन के बीच चिरुला स्टेशन के निकट किलोमीटर नंबर 1146/05 पर डाउन ट्रैक पर दौड़ रही मालगाड़ी का एक वैगन पटरी से उतर गया था। यह वैगन इंजन से 19 वे नंबर पर लगा था। इस दुर्घटना के कारण डाउन ट्रैक का यातायात छह घंटे तक बाधित रहा था। इससे 12 से अधिक ट्रेनें लेट हो गई थीं। इस मामले की जांच सहायक संरक्षा अधिकारी, सहायक यांत्रिक अभियंता समेत चार अधिकारी कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दुर्घटना की रात इंजीनियरिंग विभाग ने चिरुला स्टेशन के आसपास काम के लिए ब्लाक ले रखा था। इस कारण गाड़ियों को मौके से 30 किलोमीटर प्रति घंटा की धीमी गति से गुजारा जा रहा था। उक्त मालगाड़ी जब मौके से गुजर रही थी, तब गेटमैन व स्टेशन मास्टर को वैगन के नीचे रॉड आसानी से लटकता दिखाई दे गया। गार्ड को लाल सिग्नल दिखा दिया गया। गार्ड ने चालक को जानकारी दी। चालक ने जैसे ही ट्रेन रोकी, वैसे ही लटकता रॉड पहिये के नीचे आ गया और वैगन पटरी से उतर गया। अगर मालगाड़ी तेज गति से दौड़ रही होती तो रॉड टूटकर पहले ही गिर पड़ता। इससे एक की जगह कई वैगन पटरी से उतर सकते थे। इस मामले में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच चल रही है।
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विगत आठ दिसंबर की रात साढ़े आठ बजे झांसी दतिया सेक्शन के बीच चिरुला स्टेशन के निकट किलोमीटर नंबर 1146/05 पर डाउन ट्रैक पर दौड़ रही मालगाड़ी का एक वैगन पटरी से उतर गया था। यह वैगन इंजन से 19 वे नंबर पर लगा था। इस दुर्घटना के कारण डाउन ट्रैक का यातायात छह घंटे तक बाधित रहा था। इससे 12 से अधिक ट्रेनें लेट हो गई थीं। इस मामले की जांच सहायक संरक्षा अधिकारी, सहायक यांत्रिक अभियंता समेत चार अधिकारी कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दुर्घटना की रात इंजीनियरिंग विभाग ने चिरुला स्टेशन के आसपास काम के लिए ब्लाक ले रखा था। इस कारण गाड़ियों को मौके से 30 किलोमीटर प्रति घंटा की धीमी गति से गुजारा जा रहा था। उक्त मालगाड़ी जब मौके से गुजर रही थी, तब गेटमैन व स्टेशन मास्टर को वैगन के नीचे रॉड आसानी से लटकता दिखाई दे गया। गार्ड को लाल सिग्नल दिखा दिया गया। गार्ड ने चालक को जानकारी दी। चालक ने जैसे ही ट्रेन रोकी, वैसे ही लटकता रॉड पहिये के नीचे आ गया और वैगन पटरी से उतर गया। अगर मालगाड़ी तेज गति से दौड़ रही होती तो रॉड टूटकर पहले ही गिर पड़ता। इससे एक की जगह कई वैगन पटरी से उतर सकते थे। इस मामले में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच चल रही है।
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