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बालिकाएं समझेंगी ‘गुड टच, बैड टच’
झांसी/ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2015 11:44 PM IST
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परिषदीय स्कूलों में बालिकाओं को ‘गुड टच, बैड टच’ सीखाया जाएगा, जिससे वह लिंग भेद का शिकार न हो। सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक ने सुरक्षा संबंधी आवश्यक प्रशिक्षण तथा एसएमसी सदस्यों क ो नई जिम्मेदारियां दी हैं। इसकी रिपोर्ट प्रत्येक माह की सात तारीख को देनी है।
निदेशक के मुताबिक समाज में लिंग भेद के चलते बालिकाओं की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव देखा जा रहा है, जिससे उनका विकास बाधित हो रहा है। बेहतर व स्वस्थ समाज के लिए बालक व बालिका दोनों का शिक्षित होना जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया है कि बालिकाओं में लिंग के सूक्ष्म स्वरूप की समझ पैदा की जाए, जिससे वह विरोध करना एवं आवाज उठाना सीख सकें। इसके तहत बालिकाओं को ‘गुड टच, बैड टच’ क्या है, किन परिस्थितियों में वह किसकी सहायता लें आदि की जानकारी दी जाए। विद्यालय की दीवार पर जरूरी सूचना के अलावा वूमन हेल्पलाइन नंबर को अंकित कराएं। साथ ही जरूरी है कि एसएमसी की महिला सदस्य बराबर विद्यालय का भ्रमण कर बालिकाओं की सुरक्षा के बिंदुओं पर अनुश्रवण करें। वे बालिकाओं के विद्यालय न आने का कारण समझेें, अगर जरूरी हो तो बालिकाओं की काउंसलिंग भी करें। बालिकाएं अपनी समस्या एवं शिकायतों को खुलकर व्यक्त कर सकें इसके लिए स्कूलों में ड्राप बाक्स रखें। वहीं, एक्सपोजर विजिट में बालिकाओं के शामिल होने पर विजिट के दौरान पर्याप्त सुरक्षा के प्रबंध किए जाएं। ऐसे विजिट में एक महिला अध्यापक अनिवार्य रूप से बालिकाओं के साथ रहे।
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निदेशक के मुताबिक समाज में लिंग भेद के चलते बालिकाओं की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव देखा जा रहा है, जिससे उनका विकास बाधित हो रहा है। बेहतर व स्वस्थ समाज के लिए बालक व बालिका दोनों का शिक्षित होना जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया है कि बालिकाओं में लिंग के सूक्ष्म स्वरूप की समझ पैदा की जाए, जिससे वह विरोध करना एवं आवाज उठाना सीख सकें। इसके तहत बालिकाओं को ‘गुड टच, बैड टच’ क्या है, किन परिस्थितियों में वह किसकी सहायता लें आदि की जानकारी दी जाए। विद्यालय की दीवार पर जरूरी सूचना के अलावा वूमन हेल्पलाइन नंबर को अंकित कराएं। साथ ही जरूरी है कि एसएमसी की महिला सदस्य बराबर विद्यालय का भ्रमण कर बालिकाओं की सुरक्षा के बिंदुओं पर अनुश्रवण करें। वे बालिकाओं के विद्यालय न आने का कारण समझेें, अगर जरूरी हो तो बालिकाओं की काउंसलिंग भी करें। बालिकाएं अपनी समस्या एवं शिकायतों को खुलकर व्यक्त कर सकें इसके लिए स्कूलों में ड्राप बाक्स रखें। वहीं, एक्सपोजर विजिट में बालिकाओं के शामिल होने पर विजिट के दौरान पर्याप्त सुरक्षा के प्रबंध किए जाएं। ऐसे विजिट में एक महिला अध्यापक अनिवार्य रूप से बालिकाओं के साथ रहे।
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