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वीरान हो गया था गिरार, भगवान आदिनाथ ने किया उद्धार

Mon, 05 Sep 2022 12:07 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 05 Sep 2022 12:07 AM IST
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Girar was deserted, Lord Adinath saved
झांसी/ललितपुर। प्राचीन तीर्थक्षेत्र हमारी आस्था और श्रद्धा के केंद्र बिंदु हैं। मड़ावरा तहसील में स्थित गिरार नगर एक समय में वीरान हो गया था, लेकिन भगवान आदिनाथ के प्रभाव से यह क्षेत्र आज पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां बने मंदिर श्रावक-श्राविकाओं को आत्मिक शांति का अनुभव कराते हैं।
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इतिहासकारों की मानें तो 18वीं सदी और उससे पहले गिरार झांसी रियासत का एक सुसंपन्न नगर था। यहां सिंहद्वार, शिव मंदिर और जैन मंदिर थे। वर्ष 1844 में मरैया वंश के सिंघई धुर मंगल जी और लाला बिंददास ने नमक व्यापार में मुनाफा होने के बाद यहां जैन मंदिर में गजरथ जिनबिंब प्रतिष्ठा और जिनालय का निर्माण कराया था। इसके बाद काल के प्रभाव के चलते गिरार नगर वीरान हो गया। यहां के लोग गिरार को छोड़कर जाने लगे। स्थानीय जैन श्रावकों ने मंदिर में विराजित भगवान आदिनाथ की मूर्ति को भी अपने साथ ले जाने का निर्णय ले लिया। इसके बाद कुछ श्रावकों को स्वप्न आया कि मंदिर और मूर्ति को यहां से कहीं और न ले जाया जाए।
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इससे श्रावक मंदिर और आदिनाथ भगवान की मूर्ति को छोड़कर चले गए। उधर, एक श्रावक प्रतिदिन भगवान के अभिषेक व पूजन को मंदिर आने लगा। कुछ समय बाद कायापलट हुआ और आज यह तीर्थक्षेत्र गिरारगिरी के नाम से जाना जाता है। मान्यता के अनुसार यहां कई चमत्कार हुए। वर्ष 1990 में यहां पर पहली बार 35 दिन का णमोकार मंत्र का अखंड पाठ हुआ। इसके साथ ही मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। आज यहां पांच वेदियां हैं। जिनालय के पास धसान नदी बहती है। साथ ही क्षेत्र पर थाना, स्कूल, पोस्ट ऑफिस, प्राथमिक उपचार केंद्र और सहकारी बैंक समेत तमाम शासकीय सुविधाएं हैं।
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क्षेत्र कमेटी के महामंत्री अभिषेक जैन मड़ावरा ने बताया कि गिरारगिरी में 18 से 23 फ रवरी 2023 तक आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि गिरार पहुंचने वाले मार्ग का हाल बदहाल है। क्षेत्र पर पेयजल की सुविधा नहीं है। प्रदीप जैन, अजित जैन बताते हैं कि क्षेत्र पर साधुओं और श्रावकों का निरंतर आना-जाना लगा रहता है।
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