फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   ghat badhal, kha hoga purkho ka tarpan

घाट बदहाल, कहां होगा पुरखों का तर्पण

Wed, 11 Sep 2019 02:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 11 Sep 2019 02:06 AM IST
विज्ञापन
ghat badhal, kha hoga purkho ka tarpan
आल्हा घाट पर फैली गंदगी व पानी में उतराता कचरा दिखाते स्थानीय लोग। अमर उजाला
फोटो
विज्ञापन

घाट बदहाल, कहां होगा पुरखों का तर्पण
सब हेड- 13 सितंबर से शुरू हो रहे हैं पितृ पक्ष
क्रासर - पानी वाली धर्मशाला, आल्हा घाट का हाल है बेहाल
क्रासर - जलकुंभी और गंदगी है पसरी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पितृपक्ष 13 सितंबर से शुरू हो रहे हैं। इसके साथ ही पूर्वजों को तर्पण देना शुरू हो जाएगा। तर्पण जलाशयों के किनारे घाटों पर किया जाता है। लेकिन, इन दिनों घाटों की स्थिति बदहाल है। ऐसे में तर्पण कहां होगा, इसे लेकर लोग परेशान हैं।
सभी मत एवं संप्रदायों में पूर्वजों को याद करने के लिए विभिन्न विधान है। हिंदू धर्म में भी पूर्वजों को नमन एवं तर्पण क रने के लिए भाद्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से 15 दिन का पितृ पक्ष शुरू होता है। इसमें सभी लोग अपने पुरखों को जलाशयों के किनारे घाटों पर जल का तर्पण करते हैं, जिसका व्यापक धार्मिक महत्व है। लेकिन, महानगर में पानी वाली धर्मशाला, सीपरी का आल्हा घाट सहित अन्य जलाशयों में पसरी गंदगी और जल कुंभी से स्थिति बदहाल हो चली है। लक्ष्मी तालाब के विकास कार्य होने से भूतनाथ मंदिर के समीप होने वाला तर्पण का कार्य भी इस साल लोग नहीं कर पाएंगे। उल्लेखनीय है कि पानी वाली धर्मशाला में दो साल पहले ही 20 लाख रुपये नगर निगम ने सफ ाई के नाम पर खर्च किए थे। लेकिन वर्तमान में इसकी हालत और भी ज्यादा खराब हो गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक धर्मशाला के पानी में अब तो खडे़ भी नहीं हो सकते हैं। इसका बेहद गंदा पानी लोगोें को जल्द बीमार कर सकता है। इधर आल्हा घाट में आवास विकास, नंदनपुरा, सीपरी सहित कई इलाकों के लोग तर्पण के लिए जुटते हैं। लेकिन यहां फैली जलकुंभी और गंदगी से आम लोग हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए आस पास के बच्चों ने जलकुंभी हटायी। नगर निगम के कर्मचारी सिर्फ देख कर ही चले गए थे।
विज्ञापन

बाक्स
जलाशयों में तर्पण करने को लेकर मान्यता
जलाशयों में खडे़ होकर पूर्वजों को जल तर्पण करने की विशेष धार्मिक मान्यता है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार जल वरुण देव हैं, जो सूर्य के माध्यम से पितरों तक पहुंचता है। जलदान के लिए पानी का शुद्ध होना आवश्यक है। धार्मिक मान्यता है कि तर्पण तालाब अथवा नदी के तट पर ही करना चाहिए। श्राद्ध विवेक ग्रंथ में तर्पण में जल के महत्ता को लेकर पूर्ण विवरण है।
विज्ञापन
विज्ञापन

फोटो
कुछ वर्षों पहले तक महाराष्ट्र समाज सहित कई अन्य समाजों के लोग तर्पण करने पानी वाली धर्मशाला में आते थे। पिंडदान भी होता था। लेकिन अब यह सभी धर्मशाला में संभव नहीं है। इसके पानी से कई बीमारियां होने की संभावना बन गई हैं।
गजानन खानवलकर स्थानीय निवासी एवं महाराष्ट्र समाज के पुरोहित
फोटो
भूतनाथ मंदिर से लगे लक्ष्मी तालाब के घाट एवं गोपाल की बगिया के चौपड़ा पर सदियों से तर्पण एवं पिंडदान लोगों द्वारा किया जाता रहा है। लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण अब यहां पुरखों को पानी देना संभव नहीं है।

डॉ. एलके पालीवाल स्थानीय निवासी
आल्हा घाट समेत अन्य स्थानों पर मंगलवार को भी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ है। एक-दो दिन और विसर्जन का कार्यक्रम चलना है। इसके बाद पितृ पक्ष शुरू होते ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त करा ली जाएगी।
- डॉ. अरुण कुमार गुप्ता, अपर नगर आयुक्त।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed