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Income TaxRed: सपा सरकार में बोलती थी घनाराम ग्रुप की तूती, दिल्ली से लखनऊ तक मजबूत रिश्ते

Thu, 04 Aug 2022 01:06 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Thu, 04 Aug 2022 01:06 AM IST
सार

आयकर विभाग की टीम ने लखनऊ में सपा नेता श्याम सुंदर यादव के तीन ठिकानों पर छापामारी करके जमीनी खरीद फरोख्त के दस्तावेज सीज किए। यह छापामारी हजरतगंज के मीराबाई मार्ग स्थित गौरी अपार्टमेंट एवं श्याम सुंदर यादव के गोमतीनगर स्थित आवास पर हुई।

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Ghanaram Group used to speak in SP government, strong relations from Delhi to Lucknow
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई

विस्तार

आयकर विभाग का शिकंजा कसने के बाद झांसी का घनाराम ग्रुप प्रदेश भर में सुर्खियों में आ गया है। कारोबार की ऊंचाइयों को छूने में इस ग्रुप ने अपने राजनीतिक रसूख का भी खूब इस्तेमाल किया। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव से नजदीकियों के चलते इस ग्रुप के श्यामसुंदर सिंह और विशुन सिंह यादव की सपा सरकार में तूती बोलती थी। हालांकि, बीच में कुछ समय के लिए दोनों भाजपा में भी चले गए थे, लेकिन बाद में सपा में वापसी कर ली थी।
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घनाराम ग्रुप के श्यामसुंदर सिंह यादव व विशुन सिंह यादव मूलत: पारीछा गांव के रहने वाले हैं। इन्होंने अपने कारोबार की शुरुआत 80 के दशक में पारीछा थर्मल पावर प्लांट में छोटी-मोटी ठेकेदारी से की थी। इसके बाद दोनों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कारोबार को ऊंचाइयां देने के लिए राजनीति में भी पांव जमा लिए। मुलायम सिंह यादव से नजदीकी के चलते ग्रुप के श्यामसुंदर सिंह यादव दो बार विधान परिषद पहुंचे। इसी बीच छोटे भाई विशुन सिंह यादव भी राजनीति में उतर लिए। विशुन सिंह दतिया से जिला पंचायत अध्यक्ष बने। सपा सरकार में रहते हुए घनाराम ग्रुप ने झांसी व आसपास के जिलों में बड़े-बड़े ठेके हासिल किए। खासतौर पर बांध निर्माण और उनकी मरम्मत के बड़े काम किए। सपा सरकार में 711 करोड़ के एरच बांध के निर्माण का काम भी इसी ग्रुप को मिला था।
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ठेकेदारी के साथ ग्रुप ने रियल एस्टेट कारोबार में भी अपना सिक्का जमा लिया। इसके अलावा झांसी में एक बड़े होटल का निर्माण किया। इसके अलावा यह ग्रुप इलाइट-सीपरी रोड पर बुंदेलखंड का सबसे बड़े मॉल का भी निर्माण कर रहा है। इसके लिए रेलवे से प्राइम लोकेशन में ग्रुप ने लीज पर जमीन ली है।
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बीच में श्यामसुंदर सिंह यादव सपा छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा के टिकट पर उन्होंने बबीना विधानसभा से चुनाव भी लड़ा था। चुनाव हारने के बाद एक बार फिर से वे साइकिल पर सवार हो गए थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में श्यामसुंदर ने सपा-बसपा गठबंधन से झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था। हाल ही में उन्होंने सपा के टिकट पर विधान परिषद का चुनाव भी लड़ा था।

सपा को दूसरा झटका
हाल ही में आय से अधिक संपत्ति के मामले में समाजवादी पार्टी के पूर्व गरौठा विधायक दीपनारायण सिंह यादव पर विजिलेंस ने मुकदमा दर्ज कराया है। इसके दो दिन बाद ही सपा के कद्दावर नेता और पूर्व एमएलसी श्यामसुंदर सिंह यादव के घनाराम ग्रुप पर आयकर विभाग ने हमला बोला है। ग्रुप के झांसी, लखनऊ, दिल्ली और कानपुर के 32 ठिकानों पर आयकर विभाग ने बुधवार को छापा मारा है। समाजवादी पार्टी के लिए ये बड़ा झटका माना जा रहा है। एक के बाद एक हो रही कार्रवाई को राजनीतिक चश्मे से भी देखा जा रहा है।

यह भी हैं आयकर विभाग के निशाने पर
- विजय सरावगी:
रियल एस्टेट का बड़ा कारोबार है। झांसी के रियल एस्टेट के कमोबेश सभी बड़े प्रोजेक्ट में पार्टनरी रही है। घनाराम ग्रुप द्वारा बनाए जा रहे बुंदेलखंड के सबसे बड़ मॉल में भी पार्टनर हैं।
- वीरेंद्र राय:
रियल एस्टेट कारोबारी हैं। इसके अलावा ऑटोमोबाइल्स का भी बड़ा काम है। होटल भी है तथा झांसी के दो बड़े स्कूलों के संचालक भी हैं।
- संजय अरोड़ा:
शहर की एक पुरानी नामचीन इलेक्ट्रानिक्स के शोरूम के संचालक हैं। रियल एस्टेट के कई बड़े प्रोजेक्ट में पैसा लगा रखा है और पार्टनर हैं।
- शिवा सोनी:
इनकी कंपनी कई कॉलोनियों का निर्माण कर चुकी है। इसके अलावा कई प्रोजेक्ट पर काम जारी है। रियल एस्टेट कारोबार का झांसी का बड़ा नाम है।

लखनऊ में जमीनी दस्तावेज सीज
आयकर विभाग की टीम ने लखनऊ में सपा नेता श्याम सुंदर यादव के तीन ठिकानों पर छापामारी करके जमीनी खरीद फरोख्त के दस्तावेज सीज किए। यह छापामारी हजरतगंज के मीराबाई मार्ग स्थित गौरी अपार्टमेंट एवं श्याम सुंदर यादव के गोमतीनगर स्थित आवास पर हुई। गौरी अपार्टमेंट में रियल इस्टेट कंपनी का कार्यालय खोल रखा था। फ्लैट में टीम ने करीब आठ घंटे तक जांच की। इन कार्यालय से करोड़ों रुपये की जमीन की खरीद के दस्तावेज पाए गये, जिसको अफसराें ने विस्तृत जांच के लिए सीज कर लिया है। जबकि, आवास से नकदी मिलने की बात सामने आयी, हालांकि आयकर विभाग ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की।
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