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चुनौतियों का सामना करने का संदेश देती है गीता : प्राचार्य
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को संस्कृत भारती एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में श्रीमद्भगवत गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. ओम प्रकाश शास्त्री ने दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रीय धर्म शास्त्र श्रीमद्भगवत गीता का पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि गीता मनुष्य को कर्म योग के पथ पर चलना सिखाती है। गीता जीवन और संसार की चुनौतियों से सामना करने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि गीता ज्ञान शाश्वत सत्य है। गीता का दर्शन इसी देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी बड़ी मान्यता है कि गीता विश्व का महान ग्रंथ है। गीता युद्ध के लिए ही नहीं अपितु शांति के लिए उपयोगी है। गीता के उपदेशों को आत्मसात कर जीवन की अनेक व्याधियों से आसानी से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। संस्कृत भारती की जिलाध्यक्ष डॉ जनक किशोरी शर्मा ने कहा कि इस देश की विभूतियों ने अपनी जीवनशैली गीता के अनुसार बनाई जिसमें वे आज भी भौतिक शरीर से ना होने के बाद भी हमारे बीच हैं।
समारोह में डॉ. प्रीति सीरोटिया ने कहा कि भौतिकता के घनघोर अंधकार में भटकती मानव जाति के उद्धार के लिए गीता का आलोक ही एकमात्र उपाय है। इसका गंभीर अध्ययन और उसके संदेश का परिचालन व्यक्ति एवं समाज तथा मानवता की रक्षा करने में समर्थ है। विद्यार्थी परिषद के विभाग संगठन मंत्री संजय ने कहा कि भारतीय दर्शन में धर्म को एक जीवन पद्धति माना गया है। प्रो.आशा साहू ने कहा कि आज युवा पीढ़ी को विद्वान आचार्यों से गीता के ज्ञान को ग्रहण कर संस्कार एवं संस्कृति को सीखना चाहिए। शिक्षाविद जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि आज राष्ट्र में गीता ज्ञान का प्रसार किया जाए जिससे देश के निवासियों में राष्ट्रप्रेम एवं कर्तव्य परायणता की भावना विकसित हो सके।
संयोजक डॉ. दीपक पाठक ने कहा कि गीता जीवन और संसार की चुनौतियों से भागने की ही नहीं बल्कि उनसे मुकाबला करने की सीख देती है। गीता जयंती समारोह में श्रीमद्भागवतगीता का सामूहिक पारायण किया गया। इस अवसर पर प्रो अनिल सूर्यवंशी, हिमांशधर द्विवेदी, जितेंद्र कुमार, डॉ मनोज कुमार, डॉ रोशन कुमार सिंह, डॉ सुधाकर उपाध्याय, डॉ संजीव कुमार, डॉ प्रीति सीरोटिया, डाॅ. रामकुमार रिछारिया, डॉ. ओपी चौधरी आदि मौजूद रहे।
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ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को संस्कृत भारती एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में श्रीमद्भगवत गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. ओम प्रकाश शास्त्री ने दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रीय धर्म शास्त्र श्रीमद्भगवत गीता का पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि गीता मनुष्य को कर्म योग के पथ पर चलना सिखाती है। गीता जीवन और संसार की चुनौतियों से सामना करने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि गीता ज्ञान शाश्वत सत्य है। गीता का दर्शन इसी देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी बड़ी मान्यता है कि गीता विश्व का महान ग्रंथ है। गीता युद्ध के लिए ही नहीं अपितु शांति के लिए उपयोगी है। गीता के उपदेशों को आत्मसात कर जीवन की अनेक व्याधियों से आसानी से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। संस्कृत भारती की जिलाध्यक्ष डॉ जनक किशोरी शर्मा ने कहा कि इस देश की विभूतियों ने अपनी जीवनशैली गीता के अनुसार बनाई जिसमें वे आज भी भौतिक शरीर से ना होने के बाद भी हमारे बीच हैं।
समारोह में डॉ. प्रीति सीरोटिया ने कहा कि भौतिकता के घनघोर अंधकार में भटकती मानव जाति के उद्धार के लिए गीता का आलोक ही एकमात्र उपाय है। इसका गंभीर अध्ययन और उसके संदेश का परिचालन व्यक्ति एवं समाज तथा मानवता की रक्षा करने में समर्थ है। विद्यार्थी परिषद के विभाग संगठन मंत्री संजय ने कहा कि भारतीय दर्शन में धर्म को एक जीवन पद्धति माना गया है। प्रो.आशा साहू ने कहा कि आज युवा पीढ़ी को विद्वान आचार्यों से गीता के ज्ञान को ग्रहण कर संस्कार एवं संस्कृति को सीखना चाहिए। शिक्षाविद जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि आज राष्ट्र में गीता ज्ञान का प्रसार किया जाए जिससे देश के निवासियों में राष्ट्रप्रेम एवं कर्तव्य परायणता की भावना विकसित हो सके।
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संयोजक डॉ. दीपक पाठक ने कहा कि गीता जीवन और संसार की चुनौतियों से भागने की ही नहीं बल्कि उनसे मुकाबला करने की सीख देती है। गीता जयंती समारोह में श्रीमद्भागवतगीता का सामूहिक पारायण किया गया। इस अवसर पर प्रो अनिल सूर्यवंशी, हिमांशधर द्विवेदी, जितेंद्र कुमार, डॉ मनोज कुमार, डॉ रोशन कुमार सिंह, डॉ सुधाकर उपाध्याय, डॉ संजीव कुमार, डॉ प्रीति सीरोटिया, डाॅ. रामकुमार रिछारिया, डॉ. ओपी चौधरी आदि मौजूद रहे।
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