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पानी के टैंकर के इंतजार में बीत जाता है पूरा दिन

Sat, 04 Jul 2020 12:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2020 12:57 AM IST
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Full day waist waiting water tanker
झांसी। शहर के सिद्धेश्वर नगर, आईटीआई, पत्थर गली समेत आसपास के कई मोहल्लों में रहने वाले हजारों लोगों को इस चिलचिलाती गर्मी में पीने के पानी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके लिए उनको घंटों टैंकरों के इंतजार में टकटकी लगाकर बैठना पड़ता है। टैंकरों के आते ही यहां पानी के लिए भीड़ उमड़ पड़ती है।
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पानी का जलस्तर काफी कम हो जाने से ज्यादातर शहरी इलाकों में नलों की टोटियाें में काफी समय से पानी नहीं आया है। ऐसे में बड़ी आबादी अब सिर्फ टैंकरों के सहारे ही है। आईटीआई के पास के सिद्धेश्वर नगर, पत्थर गली, साकेत नगर समेत आसपास के कई इलाकों में अप्रैल से ही जलस्तर नीचे चला गया। इस वजह से यहां जलापूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। जिन लोगों ने बोरिंग कराई है उनको भी पानी नहीं मिल रहा। ऐसे में सभी का सहारा सिर्फ टैंकर होते हैं लेकिन, यह भी नियमित नहीं आते। कोई दोपहर, तो कोई शाम को आता है। ऐसे में लोगों का पूरा समय इनके इंतजार में ही बीत जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बोरिंग वाले घरों में तीन घंटे मशीन चलाने के बाद एक बाल्टी पानी मिलता है। उनका कहना है मोहल्ले के आसपास पानी की टंकी बनने से समस्या सुलझ सकती है लेकिन, अफसरों को कोई परवाह नहीं है।
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- गर्मियों में पानी के बिना रहना मुश्किल हो जाता है। तीन महीने तक नलों से एक बूंद पानी नहीं मिलता। स्वामी प्रसाद
- टैंकर के सहारे ही पूरी गर्मी बीतती है। उनके भी आने का कोई समय तय नहीं। पूरा दिन इंतजार करना पड़ता है। जुबैदा
- पानी की बहुत समस्या है। पूरी गर्मी तक हमारे मोहल्ले में पानी नहीं मिलता। महेश साहू
- टैंकर नियमित नहीं आता। कई बार फोन करने के बाद किसी एक टाईम आता है। ऐसे में लोगों का पूरा दिन खराब हो जाता है। धमेंद्र
- पानी की जरूरत ज्यादा होती है लेकिन, पीने का पानी ही पर्याप्त नहीं मिलता। टैंकर के पानी से परिवार का काम नहीं चल पाता। माया
- पाइप लाइन से पानी नहीं मिलता। सिर्फ टैंकर के भरोसे पूरे दिन बैठे रहते हैं। टैंकर से भी सिर्फ थोड़े से गैलन ही भर पाते हैं। माया कुशवाहा
- गर्मियों में कपड़े ज्यादा गंदे होते हैं लेकिन, उनको धुलने के लिए पानी ही नहीं मिलता। किसी तरह काम चलना पड़ता है। ज्योति
- गर्मियों में पानी की खपत बढ़ जाती है तब नल से पानी नहीं आता। अगर टैंकर नहीं आए तो पूरा मोहल्ला प्यासा रह जाएगा। मीना
- यहां टैंकर के सिवाय पानी की दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। टैंकर के आने पर ही लोगों को पानी मिल पाता है। रजनी
- गर्मियों में किसी तरह से काम चल रहा है। लोगों की जरूरत अधिक होती है लेकिन, उतना पानी मिलता ही नहीं। सुशील
- पानी के लिए यहां टंकी बनवाने की कई बार मांग की गई। आज तक इसकी सुनवाई नहीं हुई। मोहल्ले के हजारों लोगों को सिर्फ टैंकर के सहारे ही रहना पड़ता है। प्रेमचंद्र पटेल
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- हमारे मोहल्ले में कुआं भी है। इसकी कभी सफाई नहीं कराई जाती। अगर इसकी सफाई हो तब भी हम लोगों की समस्या सुलझ जाए। बृजलाल
- पानी के इंतजार में ही पूरा दिन बीत जाता है। पूरी गर्मियों तक बुरा हाल रहता है। टैंकर भी समय पर नहीं आते। राहुल
- कुछ घरों में पानी आता है। उनको काफी देर तक मोटर चलानी पड़ती है। दस रुपये के पानी के लिए पचास रुपये की बिजली खर्च होती है। अभय
- कई साल से यहां समस्या बनी है। टंकी बनवाए बिना इसका हल नहीं है लेकिन, आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। शिवम
- मोहल्ले के कुएं को ही अगर साफ करा दिया जाए तब हम लोगों को टैंकर की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इसकी ओर भी किसी का ध्यान नहीं है। प्रकाश
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