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तीन साल में चार विधायकों ने मांगे असलाह के 1200 लाइसेंस, बने सिर्फ 60

Mon, 06 Dec 2021 01:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 06 Dec 2021 01:27 AM IST
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Four MLAs asked for 1200 licenses of weapons in three years, only 60 were made
झांसी। पिछले तीन साल के दरम्यान जिले के विधायकों ने प्रशासन से 1200 से शस्त्र लाइसेंस मांगे, जबकि सिर्फ 60 ही बन पाए हैं। न्यायालय की सख्ती के बाद शासन की ओर से लागू की गईं पाबंदियों की वजह से बेहद सीमित संख्या में ही लाइसेंस जारी हो पाए, लेकिन विधायक अपनों को कैसे समझाएं। लाइसेंस न बन पाने की वजह से कइयों ने विधायकों से दूरी तक बना ली है। आने वाले चुनाव में ये स्थिति भारी पड़ सकती है।
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प्रशासन द्वारा जान-माल की सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस जारी किया जाता है। लेकिन, ये हर किसी को आसानी से हासिल नहीं हो पाता है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने और अफसरों की चौखट पर लगातार दस्तक देने के बाद भी फाइल पर अंतिम मुहर नहीं लग पाती है। ऐसे में तमाम लोग नेताओं की सिफारिशें लगवाते हैं। खासतौर पर विधायकों पर ज्यादा दबाव रहता है। दबाव तब और भी बढ़ जाता है, जब विधायक सत्ताधारी दल से जुड़ा हुआ हो। पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर करीबी तक विधायकों से लाइसेंस के लिए सिफारिश लगवाते हैं। लेकिन, पिछले तीन साल के दरम्यान जिले के विधायक महज 60 लाइसेंस ही जारी करवा पाए हैं। जबकि, चारों विधायकों के द्वारा 1200 से अधिक लोगों की सिफारिश की जा चुकी है। न्यायालय की सख्ती और शासन की पाबंदियों की वजह से नए शस्त्र लाइसेंस जारी करने में खासी कंजूसी बरती गई। उतने ही नए शस्त्र लाइसेंस बनाए गए, जितने निरस्त किए गए। लेकिन, लाइसेंस न बनवा पाने की वजह से कइयों ने तो विधायकों से दूरी तक बना ली है। चुनाव से ठीक पहले ये स्थिति विधायकों पर भारी पड़ रही है। लेकिन, अब समय भी काफी कम बचा है। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होते ही नए शस्त्र लाइसेंस जारी करने प्रक्रिया बंद हो जाएगी और ये आगामी चुनाव के बाद ही शुरू होगी।
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बने कम, निरस्त ज्यादा हुए
झांसी। नवंबर 2013 में न्यायालय ने नए शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी थी, जो लगातार छह साल तक लगी रही। नवंबर 2018 में ये रोक हटी। इसके बाद से अब तक की तीन साल की अवधि में जिले में 197 ही नए शस्त्र लाइसेंस बन पाए है, इनमें भी ज्यादातर विरासतन हैं। जबकि, इस अवधि में 305 शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। आपराधिक घटनाओं में संलिप्तता सामने आने पर लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। इसके अलावा जिनके पास तीन लाइसेंस थे, उनका भी एक-एक लाइसेंस निरस्त कर दिया। विदित हो कि नए नियमों के मुताबिक अब एक व्यक्ति को दो शस्त्र लाइसेंस ही दिए जा सकते हैं। जबकि, पहले एक व्यक्ति को तीन लाइसेंस देने तक का प्रावधान था।
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लाइसेंस के लिए लगातार प्रशासन से सिफारिश की जाती है। प्रशासन अपने विवेक के आधार पर जारी करता है। वैसे भी उत्तर प्रदेश में बंदूक युग खत्म हो चुका है। पूर्ववर्ती सरकारों में लोग बतौर स्टेटस सिंबल असलाह लेकर चलते थे। लेकिन, अब ये स्थिति नहीं रह गई है।

- रवि शर्मा, सदर विधायक
जान-माल की सुरक्षा के लिए लोग शस्त्र लेते हैं। जरूरतमंद लोगों के शस्त्र लाइसेंस बन जाएं, इसके लिए प्रशासन से सिफारिश की जाती है। प्रशासन की ओर से इस पर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है। हर जरूरतमंद को लाइसेंस मिल जाए, इसकी पूरी कोशिश की जाती है।
- जवाहर लाल राजपूत, गरौठा विधायक
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