UP: तीन दिन में चार मौत से दहला दिल, भरे-पूरे परिवार में अब तीन लोग ही बचे, दिल झकझोर कर रख देगा मामला
छोटे बेटे आदित्य की असमय मौत ने पूरे परिवार को झकझोर डाला था। आदित्य की दो साल पहले शादी हुई थी। छुट्टियों में पत्नी चारू को लेकर यहां आ जाता था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दीनदयाल नगर की जिस गली में रामकुमार भार्गव रहते थे, वहां बृहस्पतिवार से ही मातम पसरा है। जिसने भी तीन दिन में परिवार के चार लोगों की मौत की बात सुनी, उसका ही दिल दहल उठा। रामकुमार के छोटे बेटे आदित्य की असमय मौत ने पूरे परिवार को झकझोर डाला था। आदित्य की दो साल पहले शादी हुई थी। छुट्टियों में पत्नी चारू को लेकर यहां आ जाता था। 10 अप्रैल को छुट्टी मानने आया था। यहां से पत्नी को लेकर उज्जैन चला गया। अपने साथ मां को ले जाना चाहता था, लेकिन मां जाने को राजी नहीं हुई।
उज्जैन से दोनों ओंकारेश्वर चले गए। किसे पता था, उस अनहोनी का जो उनका ओंकारेश्वर में इंतजार कर रही थी। 12 अप्रैल को पत्नी चारू के सामने आदित्य नहाते हुए नर्मदा के गहरे पानी में समा गया। चार दिन बाद 16 अप्रैल को उसका शव बरामद हुआ। आदित्य की मौत से मां कमलेश, पिता रामकुमार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पिता रामकुमार रेलवे से मुख्य टिकट निरीक्षक पद से रिटायर्ड थे। बेटे आदित्य को पढ़ा लिखाकर इंजीनियर बनाया था। उसकी पत्नी चारू भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।
पड़ोस में रहने वाले राजीव नयन शुक्ला का कहना है कि अंत्येष्टि के बाद शुक्रवार को सिर्फ पिता रामकुमार, दामाद पराग के साथ प्रयागराज जाने के लिए तैयार हुए थे, लेकिन अंतिम समय में उसकी मां कमलेश और पत्नी चारू भी जाने की जिद करने लगीं। आदित्य का अपने भतीजे काश्विक से बेहद लगाव था। इस वजह से उसे भी अपने साथ ले लिया जबकि घर में बड़े भाई शैलेंद्र एवं उनकी पत्नी रह गई थीं। हादसे में उनकी बड़ी बहन निधि के पति पराग की भी मौत हो गई। हादसे में भरे-पूरे परिवार में अब तीन लोग ही शेष बचे।
कार में पीछे के एयरबैग ही खुले, इसलिए पीछे बैठने वाले बचे
हादसे में गलती भले किसी की हो, लेकिन सभी की जुबां पर कार तेज रफ्तार में होने की बात आ रही है। इसी वजह से सबसे पीछे बैठे कार सवार तक चोटिल हो गए। हादसा स्थल पर कार के चारों एयरबैग खुले थे। ठीहों के टूटने से इंजन डैशबोर्ड से टकरा गया। डैशबाेर्ड में चालक और रामकुमार की दबने से मौत हो गई। उनके पीछे रामकुमार की पत्नी कमलेश और दामाद पराग बैठे थे। जोरदार धक्के से आगे वाली सीटें टूट गईं। उन सीटों में दबने से दोनों की मौत हो गई। तीसरी सबसे पीछे की सीट पर चारू और काश्विक थे। वह दोनों नींद में थे। बीच की सीट अपनी जगह ही रही। इसी वजह से पीछे बैठी चारू और काश्विक की जान बच गई। हाईवे पर कार के परखच्चों को पुलिस एक-एक कर बटोरती नजर आई। हादसा स्थल देखकर सभी बोले कि कार बहुत ही तेज थी। अगर कार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर होती तो शायद दुर्घटना इतनी भीषण न होती।
हादसे से दहशत में दिखी चारू ने मांगा मोबाइल
जिला अस्पताल में भर्ती चारू अभी भी खौफ में है। जिला अस्पताल कर्मियों ने उसे हादसे में परिवार के खोने की जानकारी नहीं दी। होश आने पर वह परिवार के संपर्क के लिए अपना मोबाइल मांगती दिखी। वह बोली पापा-मम्मी कहां हैं। वह लोग कैसे हैं। उसे मिलना है। कोई मोबाइल दे दो वह उनसे बात करना चाहती है। पति की मौत के सदमे से उबर न पाने वाली चारू को किसी में हिम्मत नहीं थी कि कोई उसे मां-बाप जैसे सास-ससुर की मौत की खबर दे सके।