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दूसरों की जान बचाने के लिए रोज अपनी जान से खेलते हैं फायर फाइटर्स

Wed, 04 May 2022 01:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 04 May 2022 01:18 AM IST
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Firefighters play with their lives everyday to save the lives of others
झांसी। ड्यूटी भले ही आठ घंटे की निर्धारित है, लेकिन अलर्ट 24 घंटे रहना पड़ता है। कभी सामने रखी खाने की थाली छोड़कर निकल जाना पड़ता है, तो कभी आधी रात को नींद से उठकर दौड़ जाना पड़ता है। कुछ ऐसी ही जिंदगी होती है
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फायर फाइटर (अग्निशमन विभाग के कर्मचारी) की, इनकी जिंदगी आग की लपटों के बीच गुजरती है। दूसरों की जान-माल की सुरक्षा के लिए वे अपनी जान हथेली पर रखकर काम करते हैं।
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गर्मी के दस्तक देते ही दमकल विभाग का काम बढ़ जाता है। मार्च से लेकर जून माह तक दमकल दस्तों को फुर्सत नहीं मिलती है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले दो माह में जनपद में आग लगने की चार सौ से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लोगों की छोटी सी लापरवाही भारी पड़ जाती है। सूखे खेतों में जलती हुई माचिस की तीली या बीड़ी फेंकने से आग लग जाती है। जबकि, शहरी इलाकों में शॉर्ट सर्किट के मामले बढ़ जाते हैं। सूचना मिलने के एक मिनट के भीतर दमकल दस्ता फायर स्टेशन से घटना स्थल की ओर निकल पड़ता है। सड़कों पर ट्रैफिक को चीरते हुए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां डेढ़ किमी प्रति मिनट की रफ्तार से अपना सफर तय करते हुए आगे बढ़ती रहती हैं। घटना स्थल पर पहुंचकर सबसे पहले आग में फंसे लोगों को बाहर निकाला जाता है और उसके बाद संपत्ति को बचाया जाता है। वहीं, कई बार अपने परिवार के सदस्यों के शादी-ब्याह के आयोजन भी फायर कर्मी नहीं पहुंच पाते हैं।
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इन चुनौतियां से भी रोज जूझते हैं
- फोन पर सूचना देने वाले लोग अक्सर पता सही नहीं बताते, जिससे घटना स्थल पर पहुंचने में दिक्कत आती है।
- घटना स्थल पर जमा भीड़ काम में बाधा पहुंचाती है।
- ग्रामीण इलाकों में पानी का इंतजाम आसानी से नहीं हो पाता है।
- शहरी क्षेत्रों में लगे ज्यादातर हाइड्रेंट नहीं कर रहे काम।
- सड़कों पर लोग फायर ब्रिगेड के लिए रास्ता नहीं छोड़ते।
यह हैं संसाधन
- झांसी में जिला मुख्यालय समेत पांच फायर स्टेशन हैं। जिले में एक मुख्य अग्निशमन अधिकारी, पांच अग्निशमन अधिकारी द्वितीय, आठ लीडिंग फायरमैन, 10 चालक व 53 फायरमैन का स्टाफ तैनात है।
- मुख्यालय पर चार बड़े व एक छोटा फायर टेंडर है।
- सीपरी बाजार, गरौठा, मऊरानीपुर व मोंठ में फायर स्टेशन हैं। प्रत्येक स्टेशन पर एक बड़ा व एक छोटा फायर टेंडर है।
- विभाग के पास एक बाइक भी है, जिसका इस्तेमाल संकरी गलियों में लगने वाली छोटी-मोटी आग को बुझाने में किया जाता है।
फायर ब्रिगेड कर्मचारियों को हर समय तैयार रहना पड़ता है। यही वजह है कि फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों के आवास भी फायर स्टेशन के इर्दगिर्द होते हैं। हूटर बजते ही सभी तत्काल फायर स्टेशन पर पहुंचकर अपनी पोजिशन ले लेते हैं।

- रामकेश शुक्ला, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी
कई सामने रखी खाने की थाली को छोड़कर जाना पड़ता है तो कभी नींद से उठकर। कई बार ऐसा भी हुआ कि किसी परिजन को अस्पताल दिखाने गए और इसी बीच कॉल आ गई। ऐेसे में डॉक्टर को दिखाए बगैर ही लौटकर वापस आ जाना पड़ता है।
- धीरेंद्र सिंह चौहान, फायरमैन
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