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भ्रूण हत्या समाज के लिए अभिशाप : आर्यिका सृष्टि भूषण
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युवा पीढ़ी का मोबाइल देखकर उठना और सोना चिंताजनक
आर्यिका माता ने धर्मसभा में बताए अच्छे संस्कारों के सुख
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिनधर्म प्रभाविका आर्यिका सृष्टि भूषण माता ने जीवन अच्छे संस्कारों के सुख बताते हुए कहा कि बुरे संस्कार पतन के कारण हैं। प्राचीन गुरुकुल पद्धति को संस्कारों की जननी बताया, जहां बच्चों को शिक्षित करके चऱित्रवान और धार्मिक शिक्षा के साथ उन्हें धर्मगुरुओं का चरित्र बताया जाता रहा है। वह बृहस्पतिवार को नगर के पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटामंदिर में धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं।
आर्यिका श्री ने कहा कि जब मां-बाप संस्कारहीन होंगे, तब बच्चे क्या सीखेंगे। समाज में भ्रूण हत्या और तलाक जैसी कुरीति को लेकर उन्होंने कहा कि नारी एक नहीं दो-दो कुलों को संस्कारित करती है। आज संस्कारों के अभाव में न तो उसे यह बताया जाता है कि कैसे रिश्ते व्यवहार निभाए जाते हैं और कैसे परिवार चलाया जाता है। संस्कार जो मां-बाप से मिलना चाहिए, उन्हें अब टीवी और फिल्मों के माध्यम से मिल रहे हैं जिससे पाश्चात संस्कृति को बढावा मिल रहा है।
धर्मसभा में आर्यिका विश्वयश मति माता ने कहा कि प्रातःकाल प्रभु के दर्शन करने की जगह युवा पीढ़ी मोबाइल को देखकर उठती है और वही देखकर सोती है उसे फुर्सत ही नहीं रहती कि वह अपने मां-बाप के पास बैठकर अच्छे बुरे के बारे में बात करे। धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज एवं आचार्य विद्याभूषण सन्मतिसागर महाराज के सम्मुख श्रेष्ठीजनों ने दीपप्रज्जवलित कर किया। मंगलाचरण कविता जैन ने किया। श्रावकों ने पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटामंदिर चौबीसी जिनालयों पर धर्मध्वजा फहराई। मौके पर प्रतिष्ठाचार्य पं. संतोष जैन अमृत मंदिर प्रबंधक मनोज जैन, अजय जैन, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, धन्यकुमार जैन, कपूरचंद, शिखरचंद जैन, पुष्पेंद्र जैन आदि मौजूद रहे। सायंकाल आर्यिका माता जी के सानिध्य में गुरु भक्ति में श्रोता झूम उठे।
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आर्यिका माता ने धर्मसभा में बताए अच्छे संस्कारों के सुख
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिनधर्म प्रभाविका आर्यिका सृष्टि भूषण माता ने जीवन अच्छे संस्कारों के सुख बताते हुए कहा कि बुरे संस्कार पतन के कारण हैं। प्राचीन गुरुकुल पद्धति को संस्कारों की जननी बताया, जहां बच्चों को शिक्षित करके चऱित्रवान और धार्मिक शिक्षा के साथ उन्हें धर्मगुरुओं का चरित्र बताया जाता रहा है। वह बृहस्पतिवार को नगर के पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटामंदिर में धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं।
आर्यिका श्री ने कहा कि जब मां-बाप संस्कारहीन होंगे, तब बच्चे क्या सीखेंगे। समाज में भ्रूण हत्या और तलाक जैसी कुरीति को लेकर उन्होंने कहा कि नारी एक नहीं दो-दो कुलों को संस्कारित करती है। आज संस्कारों के अभाव में न तो उसे यह बताया जाता है कि कैसे रिश्ते व्यवहार निभाए जाते हैं और कैसे परिवार चलाया जाता है। संस्कार जो मां-बाप से मिलना चाहिए, उन्हें अब टीवी और फिल्मों के माध्यम से मिल रहे हैं जिससे पाश्चात संस्कृति को बढावा मिल रहा है।
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धर्मसभा में आर्यिका विश्वयश मति माता ने कहा कि प्रातःकाल प्रभु के दर्शन करने की जगह युवा पीढ़ी मोबाइल को देखकर उठती है और वही देखकर सोती है उसे फुर्सत ही नहीं रहती कि वह अपने मां-बाप के पास बैठकर अच्छे बुरे के बारे में बात करे। धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज एवं आचार्य विद्याभूषण सन्मतिसागर महाराज के सम्मुख श्रेष्ठीजनों ने दीपप्रज्जवलित कर किया। मंगलाचरण कविता जैन ने किया। श्रावकों ने पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटामंदिर चौबीसी जिनालयों पर धर्मध्वजा फहराई। मौके पर प्रतिष्ठाचार्य पं. संतोष जैन अमृत मंदिर प्रबंधक मनोज जैन, अजय जैन, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, धन्यकुमार जैन, कपूरचंद, शिखरचंद जैन, पुष्पेंद्र जैन आदि मौजूद रहे। सायंकाल आर्यिका माता जी के सानिध्य में गुरु भक्ति में श्रोता झूम उठे।
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