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पिता का अंतिम संस्कार कर दी परीक्षा, होनहार बेटा 96.2 फीसदी अंकों से हुआ पास
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सार्थक शर्मा।
- फोटो : REPORTERS
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झांसी। परीक्षा के ठीक एक दिन पहले पिता की मौत हो गई। सुबह अंतिम संस्कार किया और दोपहर में बेटे सार्थक शर्मा ने परीक्षा दी। जब रिजल्ट आया तो बेटे ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए आईएससी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में 96.2 फीसदी अंक प्राप्त किए। रिजल्ट आया तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। पिता की फोटो के सामने जाकर बोला कि आपका सपना पूरा हो गया। बेहद कठिन समय में शानदार प्रदर्शन कर सार्थक ने समाज के आगे एक मिसाल पेश की है।
सदर बाजार निवासी सार्थक शर्मा ने आईएससी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा के दौरान 14 फरवरी को पहला पेपर दिया था। 20 फरवरी को उसका इंग्लिश लिट्रेचर का दूसरा पेपर होना था कि अचानक तबीयत खराब होने पर उनके पिता जोगेंदर शर्मा का निधन हो गया। वह किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। दूसरे पेपर की सुबह नौ बजे घाट पहुंचकर पिता का अंतिम संस्कार किया। चूंकि, सार्थक अच्छे नंबर से पास होकर अपने पिता को सरप्राइज गिफ्ट देना चाहता था। ऐसे में पिता के निधन से वह पूरी तरह टूट गया। उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि परिवार वालों ने आगे आकर उसका मनोबल बढ़ाया और परीक्षा देने के लिए कहा। 20 फरवरी को ही सार्थक ने दोपहर में परीक्षा दी। इसके बाद घर में आगे के कर्मकांड चलते रहे। नाते-रिश्तेदारों का आना जारी रहा और सार्थक ने खुद को एक कमरे में अलग कर दिया। सारा ध्यान पेपर के रिवीजन पर लगाया। शुक्रवार को जब रिजल्ट आया तो सार्थक फूट-फूटकर रोने लगा। रोना इसलिए नहीं आया कि उसके अच्छे नहीं आए थे, बल्कि उसके आंसू इसलिए बहने लगे कि 96.2 फीसदी अंकों से पास होने के बाद वह अपने पिता को सरप्राइज गिफ्ट नहीं दे पाया, जैसा कि उसने सोचा था। हालांकि, पिता की फोटो के सामने जाकर उसने यह जरूर कहा कि पापा आप हमेशा से चाहते थे कि मैं अच्छे नंबरों से पास होऊं। आज यह सपना पूरा हो गया है लेकिन आप हमारे बीच नहीं हैं। सार्थक ने बताया कि पिता की ख्वाहिश थी कि वह भारतीय सेना या फिर सिविल सर्विसेज में जाए। अब वह पिता की इस चाह को पूरा करने में जुट गया है। सार्थक का कहना है कि वह भारतीय सेना में अफसर बनकर अपने पिता का नाम रोशन करूंगा।
17 साल की उम्र में दिखाया मजबूत जज्बा
सार्थक की उम्र महज 17 साल की है। इस छोटी सी उम्र में ही उसके ऊपर पिता की मौत के बाद पहाड़ सा टूट पड़ा। मगर उसने मजबूत जज्बे से साबित कर दिया है कि ठान लो तो कोई भी चीज बड़ी नहीं होती। कठिन परिस्थितियों में हार मानने से अच्छा है, मजबूती से उस समय का सामना करना। हर रात के बाद सुबह जरूर होती है।
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सदर बाजार निवासी सार्थक शर्मा ने आईएससी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा के दौरान 14 फरवरी को पहला पेपर दिया था। 20 फरवरी को उसका इंग्लिश लिट्रेचर का दूसरा पेपर होना था कि अचानक तबीयत खराब होने पर उनके पिता जोगेंदर शर्मा का निधन हो गया। वह किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। दूसरे पेपर की सुबह नौ बजे घाट पहुंचकर पिता का अंतिम संस्कार किया। चूंकि, सार्थक अच्छे नंबर से पास होकर अपने पिता को सरप्राइज गिफ्ट देना चाहता था। ऐसे में पिता के निधन से वह पूरी तरह टूट गया। उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि परिवार वालों ने आगे आकर उसका मनोबल बढ़ाया और परीक्षा देने के लिए कहा। 20 फरवरी को ही सार्थक ने दोपहर में परीक्षा दी। इसके बाद घर में आगे के कर्मकांड चलते रहे। नाते-रिश्तेदारों का आना जारी रहा और सार्थक ने खुद को एक कमरे में अलग कर दिया। सारा ध्यान पेपर के रिवीजन पर लगाया। शुक्रवार को जब रिजल्ट आया तो सार्थक फूट-फूटकर रोने लगा। रोना इसलिए नहीं आया कि उसके अच्छे नहीं आए थे, बल्कि उसके आंसू इसलिए बहने लगे कि 96.2 फीसदी अंकों से पास होने के बाद वह अपने पिता को सरप्राइज गिफ्ट नहीं दे पाया, जैसा कि उसने सोचा था। हालांकि, पिता की फोटो के सामने जाकर उसने यह जरूर कहा कि पापा आप हमेशा से चाहते थे कि मैं अच्छे नंबरों से पास होऊं। आज यह सपना पूरा हो गया है लेकिन आप हमारे बीच नहीं हैं। सार्थक ने बताया कि पिता की ख्वाहिश थी कि वह भारतीय सेना या फिर सिविल सर्विसेज में जाए। अब वह पिता की इस चाह को पूरा करने में जुट गया है। सार्थक का कहना है कि वह भारतीय सेना में अफसर बनकर अपने पिता का नाम रोशन करूंगा।
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17 साल की उम्र में दिखाया मजबूत जज्बा
सार्थक की उम्र महज 17 साल की है। इस छोटी सी उम्र में ही उसके ऊपर पिता की मौत के बाद पहाड़ सा टूट पड़ा। मगर उसने मजबूत जज्बे से साबित कर दिया है कि ठान लो तो कोई भी चीज बड़ी नहीं होती। कठिन परिस्थितियों में हार मानने से अच्छा है, मजबूती से उस समय का सामना करना। हर रात के बाद सुबह जरूर होती है।
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