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पिता ने तंगहाली में भी नहीं छोड़ा हौसला, बेटी ने एथलेटिक्स में कमाया नाम

Sat, 19 Jun 2021 01:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 01:57 AM IST
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father day vishes
फादर्स डे की खबर में ....
झांसी। एक पिता कितनी भी तंगी में क्यूं न हो, वह अपने बच्चों के सपनों को कभी बिखरने नहीं देता। एथलीट पूजा रायकवार के पिता भी इन्हीं में से एक हैं। एक छोटी सी प्राइवेट नौकरी करने वाले इनके पिता ने जहां अपनी बड़ी बेटी पूजा को इस काबिल बनाया है वहीं बाकी तीनों बच्चों को भी पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान तो नौकरी के भी लाले पड़ गए लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। ऐसे पिता पर उनके बच्चों को नाज है।
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आवास विकास में एक किराए के मकान में रहने वाली पूजा बताती हैं कि उनके पिता सुनील रायकवार प्राइवेट नौकरी करते हैं लेकिन तंगहाली के बाद भी अपने चारों बच्चों के सपने पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बच्चों की जिंदगी संवारने में मां चंदा भी घर में सिलाई का काम करती हैं। छोटा सा किराए का मकान, बिजली का बिल, घर-गृहस्थी का खर्च और चार बच्चों की परवरिश कभी उनके लिए आसान नहीं थी। इन्होंने अपनी बड़ी बेटी को पूजा पढ़ाया लिखाया। पूजा की रुचि स्पोर्ट्स की तरफ देखकर उसे हौसला दिया। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बाद यूपी टीम से एथलेटिक्स में सिलेक्ट हुईं पूजा बताती हैं कि उन्हें पापा के हौसले से गोवा और सोनभद्र में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। 2017-18 में बंगलुरू में हुई नेशनल एथलीट प्रतियोगिता में भी पहुंचीं। अब तक ढेरों मेडल हासिल कर चुकीं हैं। खो-खो, कबड्डी और जिमनेजियम में बेहतरीन प्रदर्शन रहा। घर में आर्थिक संकट के चलते किसी तरह पापा ने उसे बीपीएड कराया ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी होकर अच्छी नौकरी पा सके। सुनील रायकवार की छोटी बेटी रिया 11वीं कक्षा की छात्रा है। बड़ा बेटा अमित 10वीं में और छोटा बेटा सचिन 9वीं का छात्र है।
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इस परिवार में लॉकडाउन का समय स्थिति बहुत खराब रही। उस वक्त पिता की नौकरी भी चली गई। ऐसे में गृहस्थी की गाड़ी चलाना काफी मुश्किल रहा। पूजा बताती हैं कि जब उनके पापा ने कठिन समय में भी उन लोगों को हमेशा आगे बढ़ाया तो उसने भी घर-घर जाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। कई जगह लॉकडाउन के दौरान ट्यूशन भी नहीं मिला तो उन्होंने घर पर ही ऑनलाइन ट्यूशन देकर पापा का सहयोग किया। सुनील रायकवार का सपना है कि तंगहाली में पल-बढ़ रहे उनके बच्चे एक दिन उनका और झांसी का नाम रोशन करें यही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी होगी।
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