फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   father and sons listed as gangster

पिता-पुत्रों का बनाया गिरोह

Tue, 29 Sep 2015 01:53 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
ब्यूराे/अमर उजाला Updated Tue, 29 Sep 2015 01:53 AM IST
विज्ञापन
झांसी। यूं ही पुलिस से जनता का विश्वास नहीं उठ रहा। यह रस्सी को सांप और सांप को रस्सी बना देती है। ऐसा ही मामला सोमवार को प्रकाश में आया है, जिसमें पुलिस ने पिता और उसके दो पुत्रों का गिरोह बना दिया। जिला मजिस्ट्रेट की कमेटी इस गिरोह को खारिज कर चुकी है, इसके बावजूद  तीनों के खिलाफ नवाबाद थाने में कोर्ट में हाजिर नहीं होने की रिपोर्ट भी दर्ज करवा दी गई है।
विज्ञापन



नवाबाद थानांतर्गत पिछोर निवासी चंदन सिंह पुत्र भगवान दास और उसके पुत्र विकास उर्फ टिंकू व अनुराग उर्फ रूप सिंह के खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज थे, जिनमें दो एनसीआर थी। 24 फरवरी 2012 और दो जुलाई 2014 को दो मामलों में कोर्ट इनको बरी कर चुकी है। इसके बावजूद नवाबाद थाना पुलिस ने एक सितंबर 2014 को गैंगेस्टर एक्ट की आख्या भेजी, जिसमें दोनों मामलों को विचाराधीन दर्शाया गया। इसपर पीड़ित ने डीएम से गुहार लगाते हुए पुलिस कार्रवाई को अनुचित बताया। इस मामले की गंभीरता से लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट अनुराग यादव की अध्यक्षता में गठित कमेटी की नौ जुलाई 2015 को डीएम कैंप कार्यालय में बैठक हुई। इस बैठक में निवर्तमान एसएसपी किरण एस, एसपी सिटी राजेश कुमार, ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी श्याम सुंदर सिंह, जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी मनीष सिंह यादव शामिल हुए।
विज्ञापन



पीड़ित चंदन सिंह ने बताया कि वह कृषक है। विकास उर्फ टिंकू पेशे से अधिवक्ता और अनुराग व्यवसायी है। दो मुकदमों में उन्हें बरी किया जा चुका है। नवाबाद थाना पुलिस ने साजिशन उनके खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट में कार्रवाई की है। इस एक्ट के लिए कोर्ट से खारिज हो चुके दो मुकदमों को भी गैंग चार्ट में आधार बनाया गया है। इन मुकदमों को कोर्ट में विचाराधीन दर्शा दिया गया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान डीएम कमेटी ने फैसला सुनाया कि अभियोगों की प्रकृति उप्र. गिरोहबंद अधिनियम में वर्णित गिरोह एवं गिरोह के रूप में आर्थिक, भौतिक, दुनियावी लाभ लेने या लोक व्यवस्था अस्त-व्यस्त करने का कारित किया जाना नहीं पाया जाता है। तीनों अभियुक्त पिता व पुत्र हैं और एक साथ गांव में रहते हैं। इनके खिलाफ कोई अन्य प्रतिकूल तथ्य जनता की ओर से नहीं दर्शाये गए हैं। इसलिए डीएम कमेटी ने सर्वसम्मत राय से इस गिरोहबंद अभियोग की विवेचना समाप्त करके शासनादेश की मंशा के अनुसार पुलिस अभिलेखों से खारिज किए जाने का निर्णय लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन




 हैरानी की बात है कि डीएम कमेटी द्वारा गिरोहबंद अभियोग की विवेचन खारिज किए जाने के बावजूद कोतवाली में तैनात एसएन शुक्ला ने 26 सितंबर को पिता व दो पुत्रों के खिलाफ नवाबाद थाने में धारा 174 में मुकदमा दर्ज करवा दिया, जिसमें कहा गया है कि उक्त आरोपी उक्त अभियोग में कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे है।



मंगलवार को इस मामले का रिकॉर्ड तलब करके देखा जाएगा। इसके बाद ही कहा जा सकता है कि क्या सही है और क्या गलत ? यदि कमेटी के आदेश के बावजूद मुकदमा दर्ज कराया गया है, तो वह गलत है। यह भी पता लगाया जाएगा कि आखिर किस वजह से मुकदमा दर्ज किया गया।
सुभाष चंद्र दुबे, एसएसपी, झांसी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed