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उद्यान बदलेंगे किसानों की तकदीर

Thu, 03 Dec 2015 12:35 AM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Thu, 03 Dec 2015 12:35 AM IST
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 Farmers will change the fate of the garden
झांसी। पिछले तीन साल से प्रकृति की मार झेल रहे किसानों का भाग्य बदलने के लिए सरकार ने उद्यान योजना शुरू की है। खेत में उद्यान लगाने वाले किसान को सरकार हर माह सहायता देगी।
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बुंदेलखंड की आबोहवा बेर, अमरूद, जामुन, आंवला, नीबू, संतरा आदि फलों के उत्पादन को अनुकूल है। लेकिन, बुंदेलखंड के कुछ ही किसान ऐसे हैं जो खेतों में उद्यान लगाते हैं। फसलों पर निर्भर रहने के कारण किसानों को हर वर्ष प्रकृति की मार के कारण नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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किसानों को उद्यान से जोड़ने के लिए शासन ने नई योजना शुरू की है। उद्यान निदेशालय लखनऊ के अपर निदेशक एमपी सिंह के अनुसार बुंदेलखंड के किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध करने के लिए उद्यानिकी, पॉली हाउस व ग्रीन हाउस खेती ही सहायक हो सकती है। पॉली हाउस खेती के लिए उप्र सरकार 50 प्रतिशत अनुदान दे रही है।
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उप निदेशक उद्यान डा. महेंद्र नाथ पांडेय के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड में सघन उद्यानीकरण योजना शुरू की है, जिसके तहत किसानों को कम से कम एक एकड़ खेत में उद्यान रोपित करना होगा। उद्यान रोपने वाले किसानों को 3000 रुपये प्रतिमाह की सहायता 36 माह तक दी जाएगी। किसान इस योजना से जुड़ कर आर्थिक संकट से उबर सकते हैं।


तेंदू प्रजाति के बेर का बढ़ेगा उत्पादन
बुंदेलखंड में बेर का उत्पादन व्यवस्थित तरीके से नहीं होता है। अपने आप उगने वाले पेड़ों से ही बेर की फसल ली जाती है। बेर के उत्पादन के लिए बुंदेलखंड की धरती अनुकूल है। बेर की तेंदू प्रजाति का उत्पादन बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग कलम विधि के माध्यम से पौधे रोपित करा रहा है। इस प्रणाली को अपनाकर किसान लाभ कमा सकते हैं।
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