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Jhansi News: सत्यापन के फेर में फंसे किसान, बिचौलिए हुए बेलगाम

Tue, 08 Apr 2025 02:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 08 Apr 2025 02:30 AM IST
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Farmers stuck in the verification process, middlemen run amok

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संवाद न्यूज एजेंसी



झांसी। सत्यापन के फेर में फंसे किसान अब बिचौलियों को गेहूं बेच रहे हैं। वहीं, क्रय केंद्रों पर उम्मीद से कम गेहूं पहुंच रहा है। इस समय जहां 4-5 एमटी की गेहूं खरीद होनी चाहिए, वहीं सिर्फ एक हजार एमटी ही खरीद हो रही है। यही हाल रहा तो इस साल भी खरीद का लक्ष्य पूरा होना संभव नहीं होगा।

17 मार्च से गेहूं की खरीद शुरू हो गई थी। सभी केंद्र पर बारदाना, इलेक्ट्रॉनिक कांटा, छन्ना की व्यवस्था कर दी गई थी। मार्च के अंत में किसान केंद्रों पर पहुंचना शुरू हुए। अब गेहूं की अधिकांश फसलें कट चुकी हैं, लेकिन कुछेक किसान ही केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण है पंजीकरण के बाद होने वाला सत्यापन। झंझट में पड़ने के बजाय किसान बिचौलियों के माध्यम से या आढ़तियों के यहां सस्ते दामों पर गेहूं बेचने के लिए मजबूर हैं।
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भारतीय किसान यूनियन के नेता अविनाश भार्गव ने बताया कि यदि किसान 100 क्विंटल गेहूं बेचने के लिए आवेदन कर रहा है तो सत्यापन लंबित हो जा रहा है या फिर गेहूं को कम आंक कर फीड कर रहा है। जैसे कोई किसान 100 क्विंटल के लिए आवेदन कर रहा है तो पोर्टल पर 66 क्विंटल दर्ज हो रहा है।
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खाद्य विपणन अधिकारी संतोष पटेल का कहना है कि पोर्टल पर पहले खामियां थीं। इस खामी को दूर कर दिया गया है। अब किसान जितना चाहे उतना गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कर सकता है।




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