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नकली रेमडेसिविर बनाने वाले गिरोह का एसओजी ने किया भंडाफोड़

Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 01 May 2021 10:10 PM IST
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झांसी। रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर चारों ओर मचे हाहाकार के बीच एसओजी ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। नकली इंजेक्शन बनाने के साथ ही यह लोग असली इंजेक्शन की कालाबाजारी भी करते थे। गिरोह का मास्टर मांइड मेडिकल कालेज में तैनात नर्सिंग स्टाफ निकला। एसओजी ने मास्टर माइंड समेत सात सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी फरार है। गिरोह के पास से 2.30 लाख नकद समेत आधा दर्जन नकली इंजेक्शन बरामद किए हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है।
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कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर के शुरू होने के साथ ही रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग अचानक बढ़ गई थी। इसके साथ ही सक्रिय हो गए थे कालाबाजारी। हालात ये हैं कि लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए झांसी में ये इंजेक्शन एक-एक लाख रुपये तक में बेचा जा रहा था। लेकिन, रेमडेसिविर इंजेक्शन लगने के बाद भी मरीजों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। क्योंकि, मरीजों को या तो ये इंजेक्शन लगाए ही नहीं जा रहे थे या फिर नकली इंजेक्शन लगाए जा रहे थे। इस काम में मौत के सौदागरों का पूरा एक गिरोह सक्रिय हो गया था, जिसका मास्टर माइंड महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में तैनात नर्सिंग स्टाफ निकला। मौत के सौदागरों के गिरोह के खुलासे के लिए एसएसपी रोहन पी कनय ने एसओजी प्रभारी राजेश पाल की अगुवाई में एक टीम गठित की थी। प्रभारी राजेश पाल ने गिरोह की तलाश में मेडिकल कॉलेज के आसपास जाल बिछाया। शुक्रवार रात एसओजी टीम ने सिपाही को तीमारदार बनाकर भेजा। उसके साथ पचास हजार रुपये में सौदा तय हुआ। उसके बाद एसओजी ने छापेमारी करते हुए मौके से सात लोगों को पकड़ लिया। पूछताछ में मालूम चला कि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बतौर स्टॉफ नर्स काम करने वाले जमुना प्रसाद (30) निवासी कृष्णानगर कॉलोनी प्रेमनगर, मनीष पाल (28) निवासी गुमनावारा, नवाबाद पिछले एक साल से यह काम कर रहे थे। रेमडेसिविर की मांग होने पर मेडिकल कॉलेज के स्टोर से निकालकर उसे बेच देते। उसके बाद खाली शीशी में डिस्टिल वाटर के साथ एंटीबायोटिक मिलाकर स्टोर में जमा कर देते थे। अप्रैल माह की शुरूआत से जब मांग बढ़ी तब इन्होंने खाली शीशियों के लिए मेडिकल कॉलेज के समीप स्थित मेडिकल स्टोर में काम करने वाले विशाल बिरथरे समेत दूसरे प्राइवेट नर्सिग होम में कंपाउडर, सुपरवाइजर का काम करने वाले हिमांशु समाधिया (जैन्या नर्सिग होम) निवासी टहरौली, हरेंद्र पटेल (मानस हास्पिटल ) निवासी मयूर कॉलोनी, मानवेंद्र पटेल (मानस हास्पिटल) निवासी टहरौली, सचिन प्रजापति (सन्मति अस्पताल) निवासी करगुवांजी को भी साथ में मिला लिया। यह सभी ग्राहक भी लेकर आते थे। आसपास के नर्सिग होम में जितनी भी शीशियां खाली होती थीं यह लोग अपने संपर्क से उसे अपने पास मंगा लेते थे। इसके बाद नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाकर इनको ऊंची कीमत पर जरूरतमंदों को बेच दिया जाता था। छापेमारी के दौरान राजेंद्र कुशवाहा निवासी पिछोर फरार हो गया। एसओजी ने इनके पास से कुल 2.30 लाख रुपये नकद समेत असली एवं नकली रेमडेसिविर के नौ इंजेक्शन भी बरामद किए हैं। धरपकड़ वाली पुलिस टीम में नवाबाद इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह, उपनिरीक्षक प्रमोद तिवारी, दिनेश तिवारी समेत डेढ़ दर्जन सिपाही शामिल रहे। पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया है।

मरीज को न लगाना पड़े इंजेक्शन इसलिए मरने का करते थे इंतजार
पैसा कामने की होड़ में मेडिकल कॉलेज में स्टॉफ नर्स के तौर पर काम करने वाले जमुना प्रसाद एवं मनीष पाल ने इंसनियत का गला घोंटने से भी परहेज नहीं किया। अस्पताल के प्रोटोकाल के मुताबिक जिस मरीज को इंजेक्शन लगना होता है, उतने इंजेक्शन आईसीयू इंचार्ज को दिए जाते हैं। आईसीयू इंचार्ज यह इंजेक्शन ड्यूटी में तैनात स्टॉफ नर्स को लगाने के लिए देते हैं। एसओजी प्रभारी राजेश पाल के मुताबिक जमुना और मनीष की ड्यूटी वार्ड में रहती है। इनको जब इंजेक्शन मिलते थे, तब यह लोग उसे मरीज को समय पर नहीं लगाते थे बल्कि मरीज के मरने का इंतजार करते थे। मरीज की मौत के बाद परिजन बदहवास हो जाते। शव लेने की औपचारिकता में उलझ जाने के बीच यह असली इंजेक्शन गायब कर देते। इसे वह ऊंची कीमत पर बेच देते थे। उन्होंने इस तरह दर्जनों इंजेक्शन बेचने की बात कुबूली है। यह इंजेक्शन उन्होंने पचास हजार रुपये तक की कीमत पर बेचे हैं।

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