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Jhansi News: परीक्षा का दबाव बच्चों पर पड़ रहा भारी, उड़ गई नींद, लग गई सिर दर्द की बीमारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंकों से पास होने के लिए बच्चे दिन रात पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ बच्चों में जुनून इतना है कि वह खाना, पीना और सोना तक छोड़ चुके हैं। क्षमता से अधिक पढ़ाई का बोझ उठा रहे कई बच्चे सिर दर्द का शिकार भी हो रहे हैं। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में प्रतिदिन ऐसे चार बच्चे आ रहे हैं जो तनाव और नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं। इससे उनकी स्मरण शक्ति भी कम हो रही है। कुछ मामले इतने गंभीर हैं कि उन्हें दवाएं देकर इस समस्या से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
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- ये आ रहे लक्षण
दिनरात जागकर पढ़ रहे बच्चों के शरीर और व्यवहार में अजीब बदलाव देखे जा रहे हैं। इन बच्चों में चिड़चिड़ापन, हाथ-पांव में कंपन, घबराहट और भूलने की समस्या हो रही है।
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- 12 वीं में 10 वीं जैसा प्रदर्शन करने के दबाव में हैं बच्चे
मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन ने बताया कि ऐसे बच्चे बहुत आ रहे हैं, जो 10वीं की परीक्षा में टॉपर रहे हैं। अब उन्हें 12वीं में वैसा ही प्रदर्शन करने की चिंता सता रही है। इसके लिए वह पूरा दिन और पूरी रात पढ़ाई कर रहे हैं। वह सिर्फ 3 घंटे ही सो रहे हैं। ऐसे में वह जो भी पढ़ रहे हैं उन्हें मुश्किल से याद रह पा रहा है। जिससे उनका आत्मविश्वास भी कम हो रहा है।
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- बच्चों पर न बनाएं दबाव
मनोचिकित्सक ने बच्चों की काउंसिलिंग कर बताया कि उन पर अभिभावकों और स्कूल का दबाव होने के चलते वह सो नहीं पा रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर माता-पिता की भी काउंसिलिंग कर रहे हैं। सलाह दी है कि बच्चों को कम से कम 6 घंटे जरूर सोना चाहिए तभी वह शांत मन से पढ़ाई कर सकते हैं। उन पर अच्छे नंबर लाने का प्रेशर न बनाएं।
इंसान का दिमाग तभी सही से काम करता है जब वह 6 घंटे सोते हैं। परीक्षा के दबाव में बच्चे सो नहीं रहे हैं। इसलिए उन्हें दिक्कत हो रही है। बच्चों की याद करने की क्षमता में भी कमी देखी गई है। बच्चों पर पढ़ाई का दबाव न बनाएं, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित करें।
डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल।
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झांसी। बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंकों से पास होने के लिए बच्चे दिन रात पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ बच्चों में जुनून इतना है कि वह खाना, पीना और सोना तक छोड़ चुके हैं। क्षमता से अधिक पढ़ाई का बोझ उठा रहे कई बच्चे सिर दर्द का शिकार भी हो रहे हैं। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में प्रतिदिन ऐसे चार बच्चे आ रहे हैं जो तनाव और नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं। इससे उनकी स्मरण शक्ति भी कम हो रही है। कुछ मामले इतने गंभीर हैं कि उन्हें दवाएं देकर इस समस्या से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
- ये आ रहे लक्षण
दिनरात जागकर पढ़ रहे बच्चों के शरीर और व्यवहार में अजीब बदलाव देखे जा रहे हैं। इन बच्चों में चिड़चिड़ापन, हाथ-पांव में कंपन, घबराहट और भूलने की समस्या हो रही है।
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- 12 वीं में 10 वीं जैसा प्रदर्शन करने के दबाव में हैं बच्चे
मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन ने बताया कि ऐसे बच्चे बहुत आ रहे हैं, जो 10वीं की परीक्षा में टॉपर रहे हैं। अब उन्हें 12वीं में वैसा ही प्रदर्शन करने की चिंता सता रही है। इसके लिए वह पूरा दिन और पूरी रात पढ़ाई कर रहे हैं। वह सिर्फ 3 घंटे ही सो रहे हैं। ऐसे में वह जो भी पढ़ रहे हैं उन्हें मुश्किल से याद रह पा रहा है। जिससे उनका आत्मविश्वास भी कम हो रहा है।
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- बच्चों पर न बनाएं दबाव
मनोचिकित्सक ने बच्चों की काउंसिलिंग कर बताया कि उन पर अभिभावकों और स्कूल का दबाव होने के चलते वह सो नहीं पा रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर माता-पिता की भी काउंसिलिंग कर रहे हैं। सलाह दी है कि बच्चों को कम से कम 6 घंटे जरूर सोना चाहिए तभी वह शांत मन से पढ़ाई कर सकते हैं। उन पर अच्छे नंबर लाने का प्रेशर न बनाएं।
इंसान का दिमाग तभी सही से काम करता है जब वह 6 घंटे सोते हैं। परीक्षा के दबाव में बच्चे सो नहीं रहे हैं। इसलिए उन्हें दिक्कत हो रही है। बच्चों की याद करने की क्षमता में भी कमी देखी गई है। बच्चों पर पढ़ाई का दबाव न बनाएं, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित करें।
डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल।