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Jhansi News: दुनिया का हर चौथा टीबी रोगी भारत में, माैतों में भी यही अनुपात
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झांसी। दुनिया में टीबी (क्षय रोग) के हर चार मरीजों में से एक भारत का है। इस बीमारी से होने वाली मौतों में भी भारत का हिस्सा करीब एक चौथाई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ग्लोबल ट्यूबरकुलोसिस रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनिया भर में करीब 1.07 करोड़ लोग टीबी से पीड़ित हुए, जबकि 12.3 लाख लोगों की इस बीमारी से मौत हुई। भारत में इसी अवधि में अनुमानित 27.1 लाख नए मरीज मिले और टीबी से तीन लाख से अधिक लोगों की जान गई।
यह जानकारी शनिवार को झांसी पहुंचे प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने अमर उजाला से खास बातचीत में दी। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ तमाम प्रयासों के बावजूद मरीजों की बड़ी संख्या चिंता का विषय है। इस बीमारी से मुक्ति के लिए आम लोगों से लेकर प्रधानमंत्री तक, सभी के सामूहिक सहयोग की जरूरत है। जिस तरह पूरे देश के एकजुट प्रयासों से पोलियो पर काबू पाया गया, उसी तरह टीबी के उन्मूलन के लिए भी मिलकर प्रयास करने होंगे।
जांच, दवा और पौष्टिक आहार पर जोर
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि वर्ष 2018 में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में बड़े बदलाव किए गए। इसके तहत मरीजों की निशुल्क जांच और दवाओं की सुविधा के साथ पौष्टिक आहार के लिए आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था शुरू की गई। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मरीजों की पहचान और उपचार की व्यवस्था में सुधार हुआ है। टीबी से होने वाली मौतों को कम करने के लिए समय पर जांच और पूरा उपचार जरूरी है।
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फेफड़े का हर धब्बा टीबी नहीं
डॉ. सूर्यकांत ने डॉक्टरों को आगाह किया कि फेफड़े के एक्सरे में धब्बा दिखने का मतलब टीबी होना नहीं है। ऐसा दूसरी गंभीर बीमारियों या वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण भी हो सकता है। इसलिए केवल एक्सरे में धब्बा दिखने पर टीबी का इलाज शुरू करने के बजाय जरूरी जांच से बीमारी की पुष्टि करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच की सुविधा उपलब्ध है। लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी बनी रहे, बुखार आए या वजन कम हो रहा हो, तो उसे टीबी की जांच जरूर करानी चाहिए। समय पर बीमारी की पहचान और पूरा उपचार संक्रमण पर नियंत्रण के लिए जरूरी है।
झांसी में इस साल मिले 7,490 नए मरीज
झांसी जिले में भी टीबी के मरीजों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। क्षय रोग विभाग के अनुसार, एक जनवरी से अब तक जिले में 7,490 नए मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई है।
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यह जानकारी शनिवार को झांसी पहुंचे प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने अमर उजाला से खास बातचीत में दी। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ तमाम प्रयासों के बावजूद मरीजों की बड़ी संख्या चिंता का विषय है। इस बीमारी से मुक्ति के लिए आम लोगों से लेकर प्रधानमंत्री तक, सभी के सामूहिक सहयोग की जरूरत है। जिस तरह पूरे देश के एकजुट प्रयासों से पोलियो पर काबू पाया गया, उसी तरह टीबी के उन्मूलन के लिए भी मिलकर प्रयास करने होंगे।
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जांच, दवा और पौष्टिक आहार पर जोर
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि वर्ष 2018 में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में बड़े बदलाव किए गए। इसके तहत मरीजों की निशुल्क जांच और दवाओं की सुविधा के साथ पौष्टिक आहार के लिए आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था शुरू की गई। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मरीजों की पहचान और उपचार की व्यवस्था में सुधार हुआ है। टीबी से होने वाली मौतों को कम करने के लिए समय पर जांच और पूरा उपचार जरूरी है।
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फेफड़े का हर धब्बा टीबी नहीं
डॉ. सूर्यकांत ने डॉक्टरों को आगाह किया कि फेफड़े के एक्सरे में धब्बा दिखने का मतलब टीबी होना नहीं है। ऐसा दूसरी गंभीर बीमारियों या वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण भी हो सकता है। इसलिए केवल एक्सरे में धब्बा दिखने पर टीबी का इलाज शुरू करने के बजाय जरूरी जांच से बीमारी की पुष्टि करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच की सुविधा उपलब्ध है। लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी बनी रहे, बुखार आए या वजन कम हो रहा हो, तो उसे टीबी की जांच जरूर करानी चाहिए। समय पर बीमारी की पहचान और पूरा उपचार संक्रमण पर नियंत्रण के लिए जरूरी है।
झांसी में इस साल मिले 7,490 नए मरीज
झांसी जिले में भी टीबी के मरीजों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। क्षय रोग विभाग के अनुसार, एक जनवरी से अब तक जिले में 7,490 नए मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई है।