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पोस्टमार्टम से नहीं खुला राज: मां-बेटे की मौत की गुत्थी नहीं सुलझी, सड़ी हालत में मिले थे दोनों के शव

Tue, 24 Oct 2023 11:10 PM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Tue, 24 Oct 2023 11:10 PM IST
सार

पुरानी तहसील के पीछे बंद मकान में मृत मिले बुजुर्ग मां और उसके बेटे की मौत की गुत्थी पोस्टमार्टम से भी नहीं सुलझी। जबलपुर से परिजनों के आने के बाद मंगलवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया लेकिन मौत का राज नहीं खुल सका।

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Even post mortem did not reveal the secret of mother and son's death
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुरानी तहसील के पीछे बंद मकान में मृत मिले बुजुर्ग मां और उसके बेटे की मौत की गुत्थी पोस्टमार्टम से भी नहीं सुलझी। जबलपुर से परिजनों के आने के बाद मंगलवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया लेकिन मौत का राज नहीं खुल सका। यह दोनों कैसे मरे। कोई नहीं जान सकेगा। हालांकि पुलिस विसरा जांच के लिए भेज रही है लेकिन जिस तरह से दोनों शव सड़ चुके हैं उस हिसाब से पता चल पाना मुश्किल ही है।
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जबलपुर से हेमलता की पुत्री मीरा का बड़ा पुत्र रितेश पत्नी कीर्ति को लेकर मंगलवार सुबह झांसी पहुंचा। रितेश जबलपुर में प्राइवेट कंपनी में काम करता है। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों के पैनल ने हेमलता एवं उसके पुत्र रवि के शव का पोस्टमार्टम किया। पुलिस अफसरों के मुताबिक 7 दिन पुराना हो जाने से शव काफी हद तक नष्ट हो चुका था। वहीं, पोस्टमार्टम में शामिल डॉक्टरों का कहना है कि शव देखने से मालूम चल रहा था कि हेमलता (70) की मौत पहले हुई। उसके बाद बेटे रवि (45) की मौत हुई। दोनों के शरीर में गहरे निशान बन गए थे। इस वजह से शरीर में कोई चोट भी नजर नहीं आ रही थी। शरीर से फ्लूड निकल चुका था। इससे दोनों के अमाशय में भोजन के अंश भी नहीं मिले। डॉक्टरों का कहना है कि मौत के 6-10 घंटे के अंदर पोस्टमार्टम कराने पर ही मौत की वजह मालूम चल पाती है। नवाबाद इंस्पेक्टर तुलसी राम पांडेय के मुताबिक दोनों शव का पोस्टमार्टम कराया गया। मौत की वजह साफ नहीं हो सकी है। दोनों के विसरा को फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
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मां की मौत के बाद से कट गया था ननिहाल से रिश्ता
नानी का शव लेने आए रितेश ने बताया कि मां मीरा की मौत कैंसर से हुई जबकि पिता पहले ही बीमारी में चल बसे थे। मां मीरा की मौत के बाद से उन लोगों का ननिहाल आना जाना बेहद कम हो गया था। करीब दो साल पहले ही वह कुछ देर के लिए यहां आया था। आखिरी बार करीब चार साल पहले नानी उसकी शादी में जबलपुर आई थीं। उसके बाद से उन लोगों का रिश्ता बेहद सीमित रह गया था। उनकी मौसी मेरठ में रहती थीं लेकिन, उनकी भी मौत हो चुकी।
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रितेश के मुताबिक कभी-कभार फोन पर मामा रवि से बात होती थी। 27 सितंबर को उसने मामा को फोन किया था। रवि बहुत कम देर बात करता था लेकिन, मामा ने बताया था कि फिसल जाने से नानी को चोट लगी है। उनकी दवा चल रही है। रितेश के आने के बाद हंसारी में रहने वाले उनके फुफरे भाई भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उनका कहना था कि अधिक उम्र हो जाने से हेमलता बोल नहीं पाती थीं। सिर्फ कागज पर लिखकर ही बात करती थीं। उधर, पोस्टमार्टम कराने के बाद स्वयंसेवी संस्था श्रीराम राजा के अध्यक्ष श्यामसुंदर शर्मा की मदद से अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। मुखाग्नि रितेश ने दी।
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