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यूरोपियन स्टैंडर्ड का होगा लक्ष्मी ताल का ट्रीटमेंट प्लांट
ब्यूरो
Updated Sat, 05 Dec 2015 12:51 AM IST
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झांसी। लक्ष्मी ताल की सौंदर्यीकरण की योजना में शामिल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट यूरोपियन स्टैंडर्ड का होगा। प्लांट में गंदे पानी को शुद्धीकरण कर तालाब में छोड़ा जाएगा। जल निगम द्वारा निर्माण की दिशा में कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
लक्ष्मी ताल के सौंदर्यीकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा 54 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसमें से तीन करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है। कार्यदायी संस्था जल निगम को नामित किया गया है। जल निगम द्वारा योजना के तहत ताल के नजदीक स्थित राजकीय उद्यान नारायण बाग की चार एकड़ भूमि में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाना है।
इस पर 24 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी। ताल में पांच नालों से गिरने वाले शहर के गंदे पानी को सीधे प्लांट में ले जाया जाएगा। प्लांट में प्रतिदिन 26 एमएलडी पानी का शुद्धीकरण यूरोपियन स्टैंडर्ड के अनुरूप किया जाएगा। इसमें से 22 एमएलडी पानी 10 बीओडी (बायो केमिकल ऑक्सीजन) तक शुद्ध किया जाएगा।
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इस पानी को नारायण बाग से गुजरने वाले नाले के माध्यम से पहूज नदी में छोड़ा जाएगा। जबकि, शेष चार एमएलडी पानी का और भी अधिक शुद्धीकरण चार बीओडी (नहाने योग्य ) तक किया जाएगा, यह पानी लक्ष्मीताल में छोड़ा जाएगा। ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना के लिए जल निगम ने जियोमिलर कंपनी से अनुबंध किया है। कंपनी द्वारा सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
अभी ‘डेड वाटर’ है ताल का पानी
झांसी। वर्तमान में लक्ष्मीताल का पानी ‘डेड वाटर’ की श्रेणी में है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ताल के पानी को मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया है। बोर्ड द्वारा पिछले चार सालों में पानी का 38 बार परीक्षण किया गया। सभी रिपोर्टों में पानी अत्यधिक प्रदूषित पाया गया। परीक्षण में ताल के आसपास का भूगर्भ जल भी प्रदूषित पाया गया।
दो साल में सुंदर हो जाएगा ताल
झांसी। जल निगम की लक्ष्मीताल के सौंदर्यीकरण की योजना 24 माह में पूरा करने की है। योजना के तहत ताल के निकट मेडिटेशन सेंटर, पार्क व शौचालय बनाया जाएगा। चारों ओर बाउंड्रीवॉल का निर्माण होगा तथा लाइटिंग की जाएगी। ताल के भीतर फव्वारा लगाया जाएगा तथा वोटिंग की भी व्यवस्था होगी। इसके अलावा जल कुंभी की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा।
गायब है ताल की सात एकड़ जमीन
झांसी। भू अभिलेखों में ताल का रकबा अस्सी एकड़ दर्ज है, परंतु मौके पर तेहत्तर एकड़ जमीन ही मिल पाई है। तमाम कोशिशों के बाद भी प्रशासन अवशेष सात एकड़ जमीन नहीं खोज पाया है। ताल के आसपास की जमीन पर प्राइवेट काश्तकारों द्वारा दावा किया जा रहा है, जिससे जल निगम बाउंड्रीवॉल का निर्माण शुरू नहीं कर पा रहा है। पंचायत चुनाव के बाद एक बार फिर से जमीन की खोज की जाएगी।
‘ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की दिशा में कार्यवाही तेजी से जारी है। इसके लिए चिह्नित भूमि का सर्वे जारी है। जल्द ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।’
- राजेश मित्तल, मुख्य अभियंता - जल निगम
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लक्ष्मी ताल के सौंदर्यीकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा 54 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसमें से तीन करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है। कार्यदायी संस्था जल निगम को नामित किया गया है। जल निगम द्वारा योजना के तहत ताल के नजदीक स्थित राजकीय उद्यान नारायण बाग की चार एकड़ भूमि में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाना है।
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इस पर 24 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी। ताल में पांच नालों से गिरने वाले शहर के गंदे पानी को सीधे प्लांट में ले जाया जाएगा। प्लांट में प्रतिदिन 26 एमएलडी पानी का शुद्धीकरण यूरोपियन स्टैंडर्ड के अनुरूप किया जाएगा। इसमें से 22 एमएलडी पानी 10 बीओडी (बायो केमिकल ऑक्सीजन) तक शुद्ध किया जाएगा।
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इस पानी को नारायण बाग से गुजरने वाले नाले के माध्यम से पहूज नदी में छोड़ा जाएगा। जबकि, शेष चार एमएलडी पानी का और भी अधिक शुद्धीकरण चार बीओडी (नहाने योग्य ) तक किया जाएगा, यह पानी लक्ष्मीताल में छोड़ा जाएगा। ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना के लिए जल निगम ने जियोमिलर कंपनी से अनुबंध किया है। कंपनी द्वारा सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
अभी ‘डेड वाटर’ है ताल का पानी
झांसी। वर्तमान में लक्ष्मीताल का पानी ‘डेड वाटर’ की श्रेणी में है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ताल के पानी को मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया है। बोर्ड द्वारा पिछले चार सालों में पानी का 38 बार परीक्षण किया गया। सभी रिपोर्टों में पानी अत्यधिक प्रदूषित पाया गया। परीक्षण में ताल के आसपास का भूगर्भ जल भी प्रदूषित पाया गया।
दो साल में सुंदर हो जाएगा ताल
झांसी। जल निगम की लक्ष्मीताल के सौंदर्यीकरण की योजना 24 माह में पूरा करने की है। योजना के तहत ताल के निकट मेडिटेशन सेंटर, पार्क व शौचालय बनाया जाएगा। चारों ओर बाउंड्रीवॉल का निर्माण होगा तथा लाइटिंग की जाएगी। ताल के भीतर फव्वारा लगाया जाएगा तथा वोटिंग की भी व्यवस्था होगी। इसके अलावा जल कुंभी की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा।
गायब है ताल की सात एकड़ जमीन
झांसी। भू अभिलेखों में ताल का रकबा अस्सी एकड़ दर्ज है, परंतु मौके पर तेहत्तर एकड़ जमीन ही मिल पाई है। तमाम कोशिशों के बाद भी प्रशासन अवशेष सात एकड़ जमीन नहीं खोज पाया है। ताल के आसपास की जमीन पर प्राइवेट काश्तकारों द्वारा दावा किया जा रहा है, जिससे जल निगम बाउंड्रीवॉल का निर्माण शुरू नहीं कर पा रहा है। पंचायत चुनाव के बाद एक बार फिर से जमीन की खोज की जाएगी।
‘ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की दिशा में कार्यवाही तेजी से जारी है। इसके लिए चिह्नित भूमि का सर्वे जारी है। जल्द ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।’
- राजेश मित्तल, मुख्य अभियंता - जल निगम