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Jhansi News: समृद्ध है एरच का इतिहास, संस्कृति भी गौरवशाली
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एरच। एरच अपनी संस्कृति के कारण कई शताब्दियों का इतिहास रखता है। इतिहासकार डाॅक्टर चित्रगुप्त श्रीवास्तव का कहना है कि बौद्ध साहित्य में एरच नगर को कच्छ और जैन साहित्य में दशार्णपुर कहा गया है। इसका नाम ऐडिकच्छ भी कहा गया है। अनेक प्राचीन ग्रंथ में एरच का उल्लेख मिलता है।
एरच के उत्खनन पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अपनी रिपोर्ट 1989 में प्रस्तुत की। जिसमें बताया कि पुरातत्वविद् एचएन सिंह के निर्देश में एक टीम का गठन उत्खनन के लिए किया गया है। उस टीम में पुरातत्वविद् अरूण कुमार, आर पाठक, इंदु प्रकाश, एसपी शुक्ला एवं पीएम सक्सेना थे। गठित टीम ने एरच को बेतवा नदी किनारे मिट्टी के टीलों और पहाड़ियों का अपना उत्खनन किया। जिसमें अपनी रिपोर्ट में बताया कि यहां प्राचीन चेंदी गणराज्य की राजधानी शक्ति माती से जुड़ाव के संकेत मिलते हैं।
- एरच संसार की प्रथम राजधानी थी। इसे पर्यटन मानचित्र में लाकर इसकाे वास्वतिक गौरव हासिल होना चाहिए। इसे अयोध्या ओर प्रयागराज की तरह तीर्थ स्थल बनाया जाना चाहिए। इस नगर में तीन देवताओं ने अवतार लिए हैं। इसका इतिहास पौराणिक गाथाओं से भरा है। - हरगोविंद कुशवाहा, राज्यमंत्री अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान
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- नगर की प्राचीन धरोहर जो आज रखरखाव के अभाव में बिलुप्त हो रही हैं। इसे संवारा जाना जरूरी है। जिससे नगर की प्राचीन धरोहर को सुरिक्षत रखा जा सके। - जयचंद्र राजपूत, अध्यक्ष नगर पंचायत एरच
- प्राचीन नगर जो आज विकास में काफी पिछड़ा हुआ है। यहां पर पुरातत्व विभाग को चाहिए कि कई प्राचीन धरोहर को संरक्षित कर उनको संवारा जाए। -धर्मेंद्र कुमार वाजपेयी
- कई शताब्दी ईसा पूर्व इतिहास के साक्ष्य यहां पर मिले हैं। इस कस्बे ने ही दुनिया को सतरंगी होली पर्व की सौगात दी है। इसका विकास होना जरूरी है। - डाॅ रमेशचंद्र बुधौलिया
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एरच के उत्खनन पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अपनी रिपोर्ट 1989 में प्रस्तुत की। जिसमें बताया कि पुरातत्वविद् एचएन सिंह के निर्देश में एक टीम का गठन उत्खनन के लिए किया गया है। उस टीम में पुरातत्वविद् अरूण कुमार, आर पाठक, इंदु प्रकाश, एसपी शुक्ला एवं पीएम सक्सेना थे। गठित टीम ने एरच को बेतवा नदी किनारे मिट्टी के टीलों और पहाड़ियों का अपना उत्खनन किया। जिसमें अपनी रिपोर्ट में बताया कि यहां प्राचीन चेंदी गणराज्य की राजधानी शक्ति माती से जुड़ाव के संकेत मिलते हैं।
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- एरच संसार की प्रथम राजधानी थी। इसे पर्यटन मानचित्र में लाकर इसकाे वास्वतिक गौरव हासिल होना चाहिए। इसे अयोध्या ओर प्रयागराज की तरह तीर्थ स्थल बनाया जाना चाहिए। इस नगर में तीन देवताओं ने अवतार लिए हैं। इसका इतिहास पौराणिक गाथाओं से भरा है। - हरगोविंद कुशवाहा, राज्यमंत्री अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान
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- नगर की प्राचीन धरोहर जो आज रखरखाव के अभाव में बिलुप्त हो रही हैं। इसे संवारा जाना जरूरी है। जिससे नगर की प्राचीन धरोहर को सुरिक्षत रखा जा सके। - जयचंद्र राजपूत, अध्यक्ष नगर पंचायत एरच
- प्राचीन नगर जो आज विकास में काफी पिछड़ा हुआ है। यहां पर पुरातत्व विभाग को चाहिए कि कई प्राचीन धरोहर को संरक्षित कर उनको संवारा जाए। -धर्मेंद्र कुमार वाजपेयी
- कई शताब्दी ईसा पूर्व इतिहास के साक्ष्य यहां पर मिले हैं। इस कस्बे ने ही दुनिया को सतरंगी होली पर्व की सौगात दी है। इसका विकास होना जरूरी है। - डाॅ रमेशचंद्र बुधौलिया