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झांसी वालों को खूब भा रहीं इलेक्ट्रिक बसें
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झांसी। गर्मी बढ़ने के साथ इलेक्ट्रिक बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या भी बढ़ गई है। इससे जहां पहले 30 से 35 हजार की कमाई होती थी। वहीं, अब 40 से 50 हजार पहुंच गई है।
महानगर में कुल 15 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कोछाभांवर से बरुआसागर, बबीना, अंबाबाय, रेलवे स्टेशन, झलकारी बाई से रक्सा रूट पर किया जाता है। इन रूटों पर जहां सर्दियों के दिनों में प्रतिदिन यात्रियों की संख्या 300 से 400 और राजस्व की कमाई 30 से 35 हजार ही हो पाती थी। वहीं, गर्मी बढ़ते ही सभी रूटों पर यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है। अब वातानुकूलित बसें होने के कारण प्रतिदिन 500 से 600 यात्री सफर करने लगे हैं। इससे इनसे 40 से 50 हजार की कमाई होने लगी है।
बस की खासियत
इलेक्ट्रिक बस लो फ्लो वातानुकूलित है और इसमें 28 सीट लगी हैं, जिसमें दो सीट दिव्यांग की हैं। बस में सुरक्षा के लिए पांच कैमरे लगे हैं और पैनिक बटन लगा है। जीपीएस के जरिए बस की गतिविधि कंट्रोल रूम में बैठकर देखी जा सकेगी। बस में दो दरवाजे हैं। खिड़की खुलने की व्यवस्था नहीं है। इसकी जगह पर शीशे लगे हैं, जो पूरी तरह से सील हैं।
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शुरू में तो यात्री कम मिल रहे थे। लेकिन गर्मी बढ़ते ही अचानक वातानुकूलित बस से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ गई है। इससे कमाई भी बढ़ गई है। - मनोज खन्ना, इलेक्ट्रिक बस डिपो प्रबंधक
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महानगर में कुल 15 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कोछाभांवर से बरुआसागर, बबीना, अंबाबाय, रेलवे स्टेशन, झलकारी बाई से रक्सा रूट पर किया जाता है। इन रूटों पर जहां सर्दियों के दिनों में प्रतिदिन यात्रियों की संख्या 300 से 400 और राजस्व की कमाई 30 से 35 हजार ही हो पाती थी। वहीं, गर्मी बढ़ते ही सभी रूटों पर यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है। अब वातानुकूलित बसें होने के कारण प्रतिदिन 500 से 600 यात्री सफर करने लगे हैं। इससे इनसे 40 से 50 हजार की कमाई होने लगी है।
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बस की खासियत
इलेक्ट्रिक बस लो फ्लो वातानुकूलित है और इसमें 28 सीट लगी हैं, जिसमें दो सीट दिव्यांग की हैं। बस में सुरक्षा के लिए पांच कैमरे लगे हैं और पैनिक बटन लगा है। जीपीएस के जरिए बस की गतिविधि कंट्रोल रूम में बैठकर देखी जा सकेगी। बस में दो दरवाजे हैं। खिड़की खुलने की व्यवस्था नहीं है। इसकी जगह पर शीशे लगे हैं, जो पूरी तरह से सील हैं।
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शुरू में तो यात्री कम मिल रहे थे। लेकिन गर्मी बढ़ते ही अचानक वातानुकूलित बस से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ गई है। इससे कमाई भी बढ़ गई है। - मनोज खन्ना, इलेक्ट्रिक बस डिपो प्रबंधक